अब MSP पर नहीं होगी कपास की खरीद! किसानों को इस योजना के तहत होगा भुगतान.. CCI कर रहा तैयारी
एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने CCI की इस तैयारी पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि MSP पर सीधे खरीद करने की जगह ‘भावांतर योजना’ लागू करने से हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कपास किसानों को नुकसान होगा.
Cotton Cultivation: आने वाले समय में नरमा-कपास खरीद नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सीधे खरीद करने की जगह ‘भावांतर योजना’ के लागू करने की तैयारी कर रहा है. इस नई व्यवस्था के तहत किसानों को बाजार भाव और MSP के बीच का अंतर दिया जाएगा. इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट 2026-27 सीजन में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में शुरू किया जाएगा. उद्योग से जुड़े लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे पूरे देश में लागू करने की मांग भी की है.
अब तक सरकार, कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के जरिए MSP पर कपास खरीदकर किसानों को सुरक्षा देती थी, खासकर जब बाजार भाव गिर जाते थे. लेकिन पिछले दो सीजन में CCI पर काफी दबाव बढ़ गया और उसे 100 लाख गांठ से ज्यादा कपास खरीदनी पड़ी. इसके बावजूद सभी किसानों को MSP का फायदा नहीं मिल पाया. इसी समस्या को देखते हुए दिसंबर 2024 में नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक बैठक हुई. इस बैठक में किसानों तक बेहतर फायदा पहुंचाने के लिए ‘भावांतर योजना’ को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया.
क्या बोले किसान नेता गुणी प्रकाश
वहीं, एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने CCI की इस तैयारी पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि MSP पर सीधे खरीद करने की जगह ‘भावांतर योजना’ लागू करने से हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कपास किसानों को नुकसान होगा. उन्होंने बताया कि इससे फर्जीवाड़ा बढ़ जाएगा. ‘भावांतर योजना’ की राशि किसानों को नहीं मिलेगी, बल्कि आढ़ती ही खा जाएंगे. साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से कपास के उन्नत बीज और तकनीक मुहैया कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि हरियाणा में किसान बीटी कपास की खेती करते हैं. इस किस्म में अधिक रोग लगते हैं. इससे किसानों को नुकसान होता है.
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किस तरह होगा किसानों को भुगतान
भावांतर योजना एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें किसान अपनी कपास खुले बाजार में बेचते हैं. अगर बाजार में मिलने वाला भाव MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) से कम होता है, तो दोनों के बीच का अंतर सरकार सीधे किसान के बैंक खाते में DBT के जरिए भेज देती है. खास बात यह है कि इस योजना के तहत भुगतान केंद्र सरकार की पीएम-आशा योजना के जरिए किया जाएगा. पंजीकृत किसान अपनी सुविधा के अनुसार मंडियों में कपास बेच सकेंगे और बाजार भाव व MSP के बीच का अंतर सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा.
MSP पर खरीद का विकल्प भी जारी रहना चाहिए
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना कागज पर अच्छी लगती है, लेकिन इसकी सफलता सही तरीके से लागू होने पर निर्भर करेगी. उनका कहना है कि सिर्फ भावांतर योजना पर निर्भर रहने के बजाय MSP पर खरीद का विकल्प भी जारी रहना चाहिए. साथ ही, अगर योजना पर समय सीमा लगाई गई तो बाजार में गड़बड़ी की आशंका बढ़ सकती है. इसके बावजूद, सही तरीके से लागू होने पर यह योजना किसानों और उद्योग दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.