सरकार की कोशिश बेअसर, लासलगांव मंडी में 800 रुपये क्विंटल प्याज.. किसान परेशान
देश में प्याज की कीमतों में गिरावट के बीच केंद्र सरकार ने नासिक के किसानों से खरीद शुरू की है, लेकिन असर सीमित है. लासलगांव मंडी में भाव 800 रुपये से 1100 रुपये के बीच बने रहे. किसानों ने कीमत और प्रक्रिया को लेकर विरोध किया है, जबकि विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं.
Onion Mandi Rate: देश में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. इसकी वजह घरेलू मांग में कमी और ईरान-यूएस तनाव के चलते खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात का रुकना बताया जा रहा है. हालांकि, कीमतों को स्थिर करने के लिए केंद्र सरकार ने नासिक के किसानों से प्याज की खरीद शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक सरकार का यह कदम असरदार साबित नहीं हुआ. देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में सोमवार को प्याज की थोक कीमतें लगभग 800 रुपये से 1,100 रुपे प्रति क्विंटल के बीच बनी रहीं. यानी सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद किसानों को मंडियोंं में कम रेट ही मिल रहा है.
दरअसल, केंद्र सरकार प्याज किसानों को घाटे से ऊबारने के लिए नासिक के किसानों से 2 लाख टन प्याज खरीदने का फैसला किया है. इसका मकसद बफर स्टॉक बनाना और मंडियों में थोक प्याज की कीमतों को स्थिर रखना है. यह खरीद दो केंद्रीय एजेंसियों के जरिए की जा रही है. भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) नाम की दो एजेंसियों ने पिछले शुक्रवार से अब तक 400 क्विंटल से ज्यादा प्याज खरीदा है. सरकारी फैसले के अनुसार यह खरीद 1,235 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है.
मंडियों में किसान बेच रहे उपज
लासलगांव APMC के चेयरमैन डीके जगताप ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से कहा कि केंद्र सरकार की यह पहल अभी तक जिले की मंडियों में थोक प्याज की कीमतों को बढ़ाने में खास असर नहीं दिखा रही है. उन्होंने कहा कि सरकारी दो एजेंसियां सिर्फ अच्छी (सुपीरियर क्वालिटी) प्याज ही 1,235 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही हैं. जबकि ऐसी अच्छी क्वालिटी की प्याज किसान मंडियों में 1,400 रुपये से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल तक आसानी से बेच सकते हैं. इसी वजह से कई किसान अपनी बेहतर गुणवत्ता वाली प्याज सरकारी एजेंसियों को बेचने के बजाय सीधे मंडियों में बेचना पसंद कर रहे हैं.
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किसान प्याज बेचने से हिचकिचा रहे हैं
प्याज उत्पादक संघ ने कहा कि कई किसान दो केंद्रीय एजेंसियों को अपना प्याज बेचने में हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि इसकी प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल है. प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत दिगोले ने कहा कि किसानों को सरकारी एजेंसियों को प्याज बेचने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन कराना होता है और आधार कार्ड, 7/12 जैसे दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं. कई किसानों को यह प्रक्रिया लंबी और झंझट वाली लगती है, इसलिए वे एजेंसियों को प्याज बेचने से बचते हैं.
अधिकारियों ने इस आरोप को खारिज किया
हालांकि, दोनों केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों ने इस आरोप को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया हर साल प्याज खरीद के दौरान अपनाई जाती है ताकि किसानों के पैसे सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच सकें. इसी बीच, प्याज की कम कीमतों को लेकर किसानों में बढ़ते असंतोष के कारण सोमवार को विपक्ष के दो वरिष्ठ नेताओं- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के रोहित पवार और शिवसेना (UBT) के अंबादास दानवे ने नासिक और संभाजीनगर में विरोध प्रदर्शन किया.
प्याज की खेती पर 2,000 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च
रोहित पवार ने लासलगांव में एक ट्रैक्टर रैली का नेतृत्व किया, जिसमें बड़ी संख्या में प्याज किसानों ने हिस्सा लिया. इस दौरान एनसीपी (शरद पवार गुट) के लोकसभा सांसद भास्कर भगरे भी मौजूद रहे. प्रदर्शनकारियों ने लासलगांव मंडी के बाहर धरना भी दिया. रोहित पवार ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसानों को प्याज उत्पादन पर लगभग 2,000 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च आता है, तो केंद्र सरकार इसे 1,235 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कैसे खरीद सकती है. उन्होंने कहा कि साल 2023 में केंद्र सरकार ने प्याज की खरीद 2,410 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से की थी. लेकिन इस बार उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद सरकारी खरीद कीमत कम कर दी गई है, जो समझ से परे है. उन्होंने मांग की कि सरकार प्याज को 2,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदे.