UP में किसानों से होगी 20 लाख टन आलू की खरीद, सरकार से मिली मंजूरी.. इतने रुपये क्विंटल होगा रेट
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के तहत वर्ष 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के आलू खरीद प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इसके अंतर्गत राज्य में 20 लाख मीट्रिक टन आलू की खरीद 6,500.9 रुपये प्रति मीट्रिक टन के भाव पर की जाएगी.
Potato purchase approval: केंद्र सरकार ने आलू किसानों के हित में एक अहम और राहत देने वाला फैसला लिया है. उसने उत्तर प्रदेश में आलू खरीद की मंजूरी दी है. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से आलू किसानों को फायदा होगा. उन्हें उनकी उपज का बेहतर रेट मिलेगा. खास बात यह है कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के तहत वर्ष 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के आलू खरीद प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इसके अंतर्गत राज्य में 20 लाख मीट्रिक टन आलू की खरीद 6,500.9 रुपये प्रति मीट्रिक टन के भाव पर की जाएगी. यानी किसानों को 650.09 रुपये प्रति क्विंटल रेट मिलेगा. इस योजना में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी लगभग 203.15 करोड़ रुपये होगी.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और उन्हें मजबूरी में कम दाम पर फसल न बेचनी पड़े.
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया ये फैसला। pic.twitter.com/HhySmxwWSm
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— PIB Agriculture (@PIBAgriculture) April 18, 2026
आलू किसानों को मिलेगा उचित रेट
उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के आलू किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलने में मदद मिलेगी और उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने से राहत मिलेगी. यह कदम राज्य के आलू बाजार को संतुलित करने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उन्होंने बताया कि कृषि मंत्रालय राज्यों के साथ लगातार समन्वय में काम कर रहा है और किसानों के हित में जल्दी, संवेदनशील और प्रभावी फैसले लिए जा रहे हैं. इसी क्रम में आज संबंधित राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की गई. इस दौरान आलू खरीद की मंजूरी दी गई.
क्या बोले किसान नेता
वहीं, भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार का यह कदम किसानों के हित में है, लेकिन इससे अन्नदाताओं को फायदा होने वाला नहीं है. उनके मुताबिक, 650.09 रुपये प्रति क्विंटल भाव बहुत कम है. यह रेट ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर है. किसान लागत भी नहीं निकाल पाएंगे. उन्होंने कहा कि सरकार को कम से कम 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से आलू की खरीद करनी चाहिए, क्योंकि पिछले साल किसानों को मार्केट में 10 रुपये किलो भाव मिला था. उन्होंने कहा कि आलू की खेत में हर साल लागत बढ़ती जा रही है. इसलिए सरकार इनपुट लागत को ध्यान में रखने हुए आलू की खरीद शुरू करे. तभी जाकर अन्नदाताओं को फायदा होगा.
यूपी में आलू का उत्पादन और रकबा
बता दें कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है. यहां हर साल लगभग 6.1 लाख हेक्टेयर में भूमि पर आलू की खेती की जाती है, जिससे करीब 155 लाख टन आलू का उत्पादन होता है. यहां प्रति हेक्टेयर औसतन 25.4 टन उपज मिलती है. यह देश के कुल आलू उत्पादन का लगभग 31 फीसदी हिस्सा है, जिससे उत्तर प्रदेश आलू उत्पादन में सबसे आगे है. यहां की प्रमुख आलू किस्मों में कुफरी पुखराज, कुफरी बहार और कुफरी ज्योति शामिल हैं. आलू की प्रमुख मंडियां आगरा (बेलनगंज), फर्रुखाबाद और कन्नौज हैं, जहां बड़े पैमाने पर व्यापार होता है.