चीन का असली चेहरा! 7 भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन किया रद्द.. कारोबार को नुकसान
चीन ने GMO की मौजूदगी का आरोप लगाकर 7 भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है. इससे दोनों देशों के बीच चावल कारोबार पर असर पड़ा है. मई तक चीन 70 भारतीय नॉन-बासमती चावल की खेपें खारिज कर चुका था. भारतीय निर्यातकों और विशेषज्ञों ने चीन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है.
Rice Export: चीन ने जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) की मौजूदगी का आरोप लगाते हुए 7 भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है. इसके बाद इन कंपनियों के जरिए भारत और चीन के बीच चावल का कारोबार रुक गया है. चीन ने इस साल की शुरुआत में इनमें से 3 निर्यातकों को पहले ही निलंबित कर दिया था. चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स (GACC) ने इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया है. ये कंपनियां छत्तीसगढ़, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में स्थित हैं. रजिस्ट्रेशन रद्द होने को इन निर्यातकों पर प्रतिबंध के तौर पर देखा जा रहा है.
अंग्रेजी अखबार बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि चीन का यह कदम गलत मंशा से उठाया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, चीन ने इस साल अपनी चावल की जरूरत पूरी कर ली है, इसलिए उसने भारतीय निर्यातकों के खिलाफ यह कार्रवाई की है. वहीं, भारतीय कारोबारियों, निर्यातकों और विशेषज्ञों ने चीन की ओर से भारतीय चावल की खेपों को GMO बताकर खारिज करने और निर्यातकों के लाइसेंस रद्द करने पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि चीन की एक एजेंसी भारत से चावल की खेप रवाना होने से पहले उसकी जांच और मंजूरी देती है. ऐसे में मंजूरी मिलने के बाद चीन पहुंचने पर उसी खेप में GMO मिलने का दावा सवाल खड़े करता है. भारत में फिलहाल कोई भी GM फसल नहीं उगाई जाती है.
GMO आरोपों से चावल कारोबार प्रभावित
मई के अंत तक चीन कम से कम 70 भारतीय नॉन-बासमती चावल की खेपों को GMO होने का आरोप लगाकर खारिज कर चुका था. भारत सरकार पहले ही चीन को बता चुकी है कि देश में कोई GM फसल नहीं उगाई जाती. एक भारतीय निर्यातक के मुताबिक, चीन को चावल निर्यात करना अब जोखिम भरा हो गया है. उन्होंने कहा कि एक खेप की कुल लागत का करीब आधा हिस्सा माल ढुलाई पर खर्च होता है. ऐसे में चीन की ओर से बार-बार खेपों को खारिज किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच चावल का कारोबार लगभग पूरी तरह रुक गया है.
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चीन के कदम से भारतीय चावल की साख पर असर का डर
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की ओर से बनाई जा रही ऐसी धारणा का असर पश्चिमी देशों, खासकर यूरोपीय संघ में भारत के बासमती और नॉन-बासमती चावल के निर्यात पर पड़ सकता है. भारत की हिस्सेदारी वैश्विक चावल निर्यात बाजार में करीब 40 फीसदी है. विशेषज्ञों ने सरकार से इस मामले में सक्रिय होकर जवाब देने की मांग की है, ताकि भारतीय चावल की साख और निर्यात पर असर न पड़े.
छत्तीसगढ़ राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने चीन में भारतीय चावल की खेपों को GMO बताकर खारिज किए जाने का मुद्दा उठाया है. एसोसिएशन ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के चेयरमैन अभिषेक देव को पत्र लिखकर चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स (GACC) से बातचीत कर इस मामले को सुलझाने की मांग की है.
520 टन चावल की खेप चीन ने GMO के आरोप में लौटाई
एसोसिएशन के मुताबिक, विशाखापत्तनम पोर्ट से चीन के शेकोउ भेजी गई 520 टन स्वर्णा व्हाइट राइस की पूरी तरह टूटी हुई चावल की खेप को हाल ही में GMO की मौजूदगी के आरोप में खारिज कर दिया गया. इस खेप की भारत में रवाना होने से पहले जांच भी की गई थी. एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश जैन ने कहा कि भारत में GM धान को मंजूरी नहीं मिली है और इसकी व्यावसायिक खेती भी नहीं होती है.
जीन-एडिटेड धान को लेकर भी बढ़ी चिंता
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत आगामी खरीफ सीजन से जीन-एडिटेड धान की खेती शुरू करने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, जीन-एडिटेड फसल और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसल अलग होती हैं. GM फसल में बाहरी जीन डाला जाता है. अधिकारियों के मुताबिक, मई के तीसरे सप्ताह में भारतीय अधिकारियों ने GACC के अधिकारियों से इस मुद्दे पर बातचीत की थी. हालांकि, चीन ने भारतीय चावल की खेपों को खारिज करने के लिए इस्तेमाल की गई जांच प्रक्रिया के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार विवाद बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है.