रूस और यूएई की बढ़ती मांग से कोच्चि चाय बाजार में आई जबरदस्त तेजी, ऑर्थोडॉक्स चाय के दाम चढ़े

दक्षिण भारत की चाय को इस बार उत्तर भारत की स्थिति का भी फायदा मिला है. पहले दौर की तुड़ाई के बाद उत्तर भारत में चाय की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. ऐसे में विदेशी खरीदार अब दक्षिण भारतीय नीलामी केंद्रों की ओर रुख कर रहे हैं. हालांकि व्यापारियों का कहना है कि दक्षिण भारत के बाजार में चाय की आवक अभी सीमित है.

नई दिल्ली | Published: 16 May, 2026 | 07:37 AM

Kochi tea auction: देश के चाय कारोबार में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है. खासतौर पर दक्षिण भारत के कोच्चि चाय नीलामी केंद्र में इस बार विदेशी खरीदारों की मजबूत मांग ने बाजार को नई मजबूती दी है. रूस, संयुक्त अरब अमीरात और आसपास के कई देशों से लगातार बढ़ती खरीदारी के कारण ऑर्थोडॉक्स चाय की कीमतों में सुधार हुआ है. यही वजह रही कि नीलामी में लगभग पूरी चाय बिक गई और उत्पादकों को बेहतर दाम मिले.

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि इस बार विदेशों से मांग काफी मजबूत रही. खासतौर पर रूस और संयुक्त अरब अमीरात के खरीदार लगातार सक्रिय बने हुए हैं. वहीं ईरान से भी तीसरे देशों के जरिए खरीदारी जारी है. बाजार में चर्चा है कि ईरान नए रास्तों से चाय आयात करने की संभावनाएं तलाश रहा है. अगर आने वाले समय में ईरान की सीधी खरीद फिर शुरू होती है तो इससे दक्षिण भारत के चाय बाजार को और मजबूती मिल सकती है.

नीलामी में लगभग पूरी चाय बिकी

कोच्चि नीलामी केंद्र में इस बार कुल 2 लाख 18 हजार 683 किलोग्राम ऑर्थोडॉक्स चाय बिक्री के लिए लाई गई थी. इसमें से लगभग 99 प्रतिशत चाय बिक गई. पिछले मुकाबले औसत कीमत में करीब 3 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

व्यापारियों के मुताबिक अच्छी गुणवत्ता वाली चाय के लिए खरीदार ज्यादा कीमत देने को तैयार दिखाई दिए. खासकर लंबी पत्ती और टूटे दानों वाली चाय की मांग मजबूत बनी हुई है. वहीं साधारण गुणवत्ता वाली चाय को अब भी बाजार में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

उत्तर भारत में बढ़ी कीमतों का मिला फायदा

दक्षिण भारत की चाय को इस बार उत्तर भारत की स्थिति का भी फायदा मिला है. पहले दौर की तुड़ाई के बाद उत्तर भारत में चाय की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. ऐसे में विदेशी खरीदार अब दक्षिण भारतीय नीलामी केंद्रों की ओर रुख कर रहे हैं. हालांकि व्यापारियों का कहना है कि दक्षिण भारत के बाजार में चाय की आवक अभी सीमित है. अगर आने वाले समय में उत्पादन नहीं बढ़ा तो विदेशी खरीदार श्रीलंका जैसे दूसरे देशों की ओर भी जा सकते हैं. इसलिए उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बनाए रखना जरूरी होगा.

मानसून से बढ़ सकती है गुणवत्ता

चाय उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारत में मानसून की शुरुआत चाय फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. बारिश से चाय की नई पत्तियों की गुणवत्ता बेहतर होगी और उत्पादन में भी सुधार आने की उम्मीद है. किसानों को उम्मीद है कि अगर मौसम अनुकूल रहा तो आने वाले हफ्तों में अच्छी गुणवत्ता वाली चाय की पैदावार बढ़ेगी. इससे न केवल घरेलू बाजार बल्कि निर्यात कारोबार को भी मजबूती मिलेगी.

दूसरी किस्म की चाय में भी रही मांग

ऑर्थोडॉक्स चाय के अलावा दूसरी किस्म की चाय में भी बाजार अच्छा बना रहा. पत्ती वाली चाय की मांग मजबूत रही और कीमतों में भी सुधार देखा गया. करीब 26 हजार किलोग्राम चाय बिक्री के लिए लाई गई थी, जिसमें केरल और दूसरे राज्यों के खरीदार मुख्य भूमिका में रहे. हालांकि धूल जैसी बारीक चाय की मांग कमजोर रही. कई किस्मों को पर्याप्त खरीदार नहीं मिले, जिससे बिक्री प्रभावित हुई. इस श्रेणी में कुल 5 लाख 37 हजार 381 किलोग्राम चाय बिक्री के लिए लाई गई थी, जिसमें केवल 79 प्रतिशत बिक्री हो सकी.

व्यापारियों का कहना है कि इस समय बाजार गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. खरीदार केवल अच्छी खुशबू, स्वाद और रंग वाली चाय को ही बेहतर दाम दे रहे हैं. साधारण गुणवत्ता वाली चाय को अब भी कम बोली मिलने की समस्या बनी हुई है.

चाय कारोबारियों में बढ़ी उम्मीद

कोच्चि चाय व्यापार संघ के अध्यक्ष अनिल जॉर्ज ने कहा कि इस बार बाजार में खरीदारी का रुख मजबूत बना हुआ है. पश्चिम एशिया और स्वतंत्र राष्ट्र समूह के देशों से निर्यातकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि बाजार अब गुणवत्ता आधारित हो गया है. अच्छी चाय के लिए खरीदार खुलकर कीमत दे रहे हैं, जबकि कमजोर गुणवत्ता वाली चाय को संघर्ष करना पड़ रहा है.

विदेशी मांग में आई इस तेजी ने दक्षिण भारत के चाय उद्योग को राहत दी है. अगर आने वाले महीनों में उत्पादन और निर्यात दोनों मजबूत बने रहते हैं तो चाय कारोबार को बड़ा फायदा मिल सकता है.

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