उत्तराखंड के आलू को मिला इंटरनेशनल बाजार, इराक पहुंची 24 टन फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज की पहली खेप

Uttarakhand Potato Export: उत्तराखंड ने कृषि निर्यात के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है. राज्य से पहली बार 24 मीट्रिक टन फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज की खेप इराक भेजी गई है. APEDA के सहयोग से हुए इस निर्यात से उत्तराखंड के आलू को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी.

नोएडा | Updated On: 20 Jul, 2026 | 07:50 PM

Frozen French Fries Export: उत्तराखंड के आलू अब सिर्फ देश की मंडियों तक सीमित नहीं रहेंगे. पहली बार राज्य से 24 मीट्रिक टन फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज की खेप इराक भेजी गई है. यह उत्तराखंड के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. इससे न सिर्फ राज्य के प्रोसेस्ड फूड उद्योग को नई पहचान मिलेगी, बल्कि किसानों के लिए भी विदेशों में बेहतर बाजार बनने की उम्मीद बढ़ गई है.

इस निर्यात को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) का सहयोग मिला. ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर स्थित Virun Global Trade Pvt. Ltd. ने फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज की पहली खेप इराक के लिए रवाना की.

वैल्यू एडिशन से बढ़ेगा आलू का दाम

आलू को कच्चे रूप में बेचने के बजाय फ्रेंच फ्राइज जैसे प्रोसेस्ड उत्पादों में बदलने से उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है. इससे किसानों को भी बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है. साथ ही प्रोसेसिंग उद्योग को अच्छी क्वालिटी का आलू लगातार मिलता है, जिससे खेती और उद्योग दोनों को फायदा होता है. अगर उत्तराखंड में ऐसे उद्योगों का विस्तार होता है तो किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

पहाड़ी राज्य के लिए आसान नहीं था यह सफर

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और लैंडलॉक्ड राज्य के लिए कृषि उत्पादों को विदेश भेजना आसान नहीं होता. लंबी दूरी, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की ज्यादा लागत अक्सर निर्यात को महंगा बना देती है.

APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव के अनुसार, राज्य से कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए परिवहन लागत सबसे बड़ी चुनौती है. इसे कम करने के लिए APEDA राज्य सरकार के साथ मिलकर स्टेट एग्री एक्सपोर्ट पॉलिसी पर काम कर रहा है. इसके तहत भविष्य में निर्यातकों को ट्रांसपोर्ट सहायता देने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है.

प्रोसेस्ड फूड की बढ़ रही है वैश्विक मांग

भारत के प्रोसेस्ड कृषि उत्पादों की विदेशों में मांग लगातार बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 7.26 लाख मीट्रिक टन से अधिक प्रोसेस्ड सब्जियों का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 932.25 मिलियन डॉलर रही. इनमें आलू से बने वैल्यू एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी भी काफी बड़ी रही. इसी दौरान 2.77 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा आलू उत्पादों का निर्यात किया गया, जिनकी कीमत 289.40 मिलियन डॉलर रही. ये आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में भारतीय प्रोसेस्ड फूड की मांग तेजी से बढ़ रही है और उत्तराखंड जैसे राज्यों के लिए भी नए अवसर खुल रहे हैं.

APEDA दे रहा है वैश्विक बाजार तक पहुंच

निर्यात को बढ़ावा देने के लिए APEDA भारतीय कंपनियों को SIAL, Gulfood, IndusFood और World Food India जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेने का मौका देता है. इससे निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से सीधे जुड़ने और नए बाजार तलाशने में मदद मिलती है. निर्यातक कंपनी को उम्मीद है कि पहली खेप की अच्छी क्वालिटी के आधार पर इराक से आगे भी नए ऑर्डर मिलेंगे और लंबे समय तक व्यापारिक संबंध बनेंगे.

किसानों और रोजगार दोनों को मिलेगा फायदा

अगर उत्तराखंड में प्रोसेस्ड फूड उद्योग तेजी से बढ़ता है तो इसका फायदा पूरी कृषि श्रृंखला को मिलेगा. खेत से लेकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात तक रोजगार के नए अवसर बनेंगे. साथ ही किसानों की फसल को बेहतर बाजार मिलेगा और उनकी आय बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी. यही वजह है कि राज्य में कृषि उत्पादों की वैल्यू एडिशन और निर्यात को भविष्य की बड़ी संभावना के रूप में देखा जा रहा है.

Published: 20 Jul, 2026 | 08:22 PM

Topics: