Mandi bhav: प्याज के रेट में क्यों आ रही गिरावट? 1600 रुपये क्विंटल हुआ रेट.. कीमतें और हो सकती हैं कम

खरीफ प्याज की बढ़ती आवक और कमजोर निर्यात के कारण थोक और खुदरा कीमतों पर दबाव बना हुआ है. लासलगांव और दिल्ली मंडियों में दाम गिरे हैं. रिकॉर्ड उत्पादन और बांग्लादेश द्वारा आयात रोकने से आने वाले समय में कीमतें नरम रहने की संभावना है.

Kisan India
नोएडा | Published: 10 Jan, 2026 | 11:19 AM

Mandi Rate: खरीफ प्याज की आवक बढ़ने और निर्यात कमजोर रहने के कारण महाराष्ट्र के लासलगांव मंडी में थोक प्याज के दाम गिरकर 1600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं, जो दस दिन पहले 1900 रुपये थे. बांग्लादेश सरकार द्वारा भारत से प्याज आयात के लिए नए परमिट जारी न करने से घरेलू बाजार में सप्लाई ज्यादा रहने की संभावना है, जिससे आने वाले हफ्तों में कीमतें और गिर सकती हैं. लासलगांव APMC के निदेशक जयदत्त होलकर के अनुसार, खरीफ की आवक बढ़ने और निर्यात में सुस्ती से दामों पर दबाव बना रहेगा. उन्होंने कहा कि अगर सरकार निर्यात सब्सिडी दे, तो निर्यात बढ़ेगा और घरेलू कीमतों में ज्यादा गिरावट को रोका जा सकता है.

द फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ का कहना है कि शुक्रवार को प्याज की औसत खुदरा कीमत  29.35 रुपये प्रति किलो रही, जो एक महीने पहले के मुकाबले करीब 11 फीसदी ज्यादा है. हालांकि, यह कीमत एक साल पहले के 40 रुपये प्रति किलो के स्तर से लगभग 26 फीसदी कम है. आजादपुर मंडी के पूर्व अध्यक्ष और प्याज व्यापारी सुरेंद्र बुढ़िराजा के मुताबिक, अगले कुछ महीनों में प्याज के दामों में तेज उछाल आने की संभावना नहीं है, क्योंकि राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में खरीफ फसल की पैदावार के संकेत अच्छे हैं. दिल्ली की मंडियों में फिलहाल प्याज के थोक दाम करीब 1600 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं, जो पहले के मुकाबले 300 रुपये प्रति क्विंटल कम हैं.

बांग्लादेश को करीब 250 डॉलर प्रति टन की दर से प्याज निर्यात

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार ने घरेलू किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए हिली लैंड पोर्ट के जरिए भारत से प्याज आयात  के लिए नए परमिट जारी करना बंद कर दिया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि 7 दिसंबर के बाद भारत से 73,050 टन प्याज आयात की मंजूरी दी गई थी, जिसकी आपूर्ति इस महीने के अंत तक जारी रहेगी. एक निर्यातक के अनुसार, पाकिस्तान बांग्लादेश को करीब 250 डॉलर प्रति टन की दर से प्याज निर्यात कर रहा है, जबकि भारत से अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज लगभग 293 डॉलर प्रति टन पड़ रहा है. इस वजह से भारत से प्याज भेजना फायदे का सौदा नहीं रह गया है.

प्याज की कीमतों में 55.38 फीसदी तक की गिरावट

वहीं, रिकॉर्ड उत्पादन के चलते प्याज महंगाई में करीब 55 फीसदी की गिरावट आई है. 2024-25 फसल वर्ष (जुलाई-जून) में प्याज का उत्पादन 2023-24 के मुकाबले 27 फीसदी बढ़कर 3.078 करोड़ टन पहुंच गया है. ज्यादा रकबे और बेहतर पैदावार के कारण पिछले कुछ महीनों में प्याज की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है. प्याज की खुदरा महंगाई मई 2025 से लगातार निगेटिव जोन में बनी हुई है. नवंबर 2025 में प्याज की कीमतें साल-दर-साल आधार पर 55.38 फीसदी तक गिर गईं.

प्याज पर लगाई गई 20 फीसदी निर्यात शुल्क हटा

सरकार ने 13 सितंबर 2024 को प्याज पर लगाई गई 20 फीसदी निर्यात शुल्क को 1 अप्रैल 2025 से हटा दिया था.इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने न्यूनतम निर्यात मूल्य तय किया था और करीब पांच महीनों तक, 8 दिसंबर 2023 से 3 मई 2024 तक, प्याज के निर्यात पर पूरी तरह प्रतिबंध भी लगाया गया था. वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से सितंबर के बीच भारत ने 7.2 लाख टन प्याज का निर्यात  किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 80 फीसदी ज्यादा है. हालांकि, पिछले कुछ महीनों में निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ी है, क्योंकि बांग्लादेश ने अगस्त से दिसंबर की शुरुआत तक आयात पर रोक लगा दी थी. पूरे 2024-25 में भारत ने 11.4 लाख टन प्याज का निर्यात किया. इस दौरान बांग्लादेश, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), श्रीलंका और नेपाल भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्य रहे.

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