पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग पर संकट, कच्चे माल की कमी से बंद होने की कगार पर कई मिलें
जूट उद्योग में बढ़ते संकट का असर सबसे ज्यादा मजदूरों पर पड़ रहा है. उद्योग संगठनों के मुताबिक करीब 75 हजार मजदूर इस समय अनियमित रोजगार या बेरोजगारी जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं. उत्तर 24 परगना, हुगली और आसपास के औद्योगिक इलाकों में कई मिलों में उत्पादन घटा दिया गया है. कहीं शिफ्ट कम कर दी गई हैं तो कहीं काम पूरी तरह रोक दिया गया है.
पश्चिम बंगाल का जूट उद्योग इस समय बड़े संकट से गुजर रहा है. कच्चे जूट की भारी कमी और लगातार बढ़ती कीमतों ने कई जूट मिलों की हालत खराब कर दी है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो आने वाले दिनों में कई मिलें पूरी तरह बंद हो सकती हैं और हजारों मजदूरों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं.
हुगली औद्योगिक क्षेत्र की कम से कम 14 जूट मिलों में कामकाज या तो पूरी तरह प्रभावित हुआ है या उत्पादन काफी कम कर दिया गया है. भारतीय जूट मिल्स एसोसिएशन (IJMA) के अनुसार कच्चे जूट की कमी और ऊंची कीमतों की वजह से मिलों को चलाना मुश्किल होता जा रहा है.
चार महीने में तेजी से बढ़े जूट के दाम
इकोनॉमिक्स टाइम्स की खबर के अनुसार, जूट उद्योग की परेशानी पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़ी है. उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी को जूट बैलर्स एसोसिएशन (JBA) की दर करीब 11,600 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो 6 मई तक बढ़कर 17,100 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई. यानी कुछ ही महीनों में कीमतों में भारी उछाल आ गया. खास बात यह है कि यह कीमत सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5,650 रुपये से कई गुना ज्यादा है.
पूर्व IJMA अध्यक्ष ने PTI को बताया कि पुराने स्टॉक लगभग खत्म हो चुके हैं और नई फसल आने में अभी करीब 10 हफ्ते बाकी हैं. ऐसे में मिलों के सामने कच्चे माल का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
75 हजार मजदूरों पर रोजगार का संकट
जूट उद्योग में बढ़ते संकट का असर सबसे ज्यादा मजदूरों पर पड़ रहा है. उद्योग संगठनों के मुताबिक करीब 75 हजार मजदूर इस समय अनियमित रोजगार या बेरोजगारी जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं.
उत्तर 24 परगना, हुगली और आसपास के औद्योगिक इलाकों में कई मिलों में उत्पादन घटा दिया गया है. कहीं शिफ्ट कम कर दी गई हैं तो कहीं काम पूरी तरह रोक दिया गया है. मजदूरों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा.
सरकार के फैसले से और बढ़ी परेशानी
जूट उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि हाल ही में जूट आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी ‘जीरो स्टॉक’ आदेश से स्थिति और बिगड़ गई है. सरकार ने 5 मई से व्यापारियों और बैलर्स को स्टॉक नहीं रखने का आदेश दिया था, ताकि मिलों को कच्चा जूट मिल सके. लेकिन उद्योग का दावा है कि इससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई. JBA ने 7 मई के बाद से कीमतों की आधिकारिक घोषणा भी बंद कर दी, जिससे मिलों के सामने खरीद लागत तय करने की मुश्किल खड़ी हो गई.
मिल मालिकों ने सरकार से मांगी मदद
जूट उद्योग अब नई बीजेपी सरकार से राहत की उम्मीद लगा रहा है. उद्योग संगठनों और भारतीय किसान संघ (BKS) से जुड़े प्रतिनिधियों ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और प्रधानमंत्री कार्यालय से अलग जूट विकास बोर्ड बनाने और तत्काल राहत देने की मांग की है. उद्योग जगत का कहना है कि सरकार को बचे हुए स्टॉक बाजार में जारी करने, आपातकालीन आयात की अनुमति देने और कीमतों को नियंत्रित करने जैसे कदम उठाने चाहिए.
पूर्व IJMA अध्यक्ष संजय काजारिया ने कहा कि उद्योग को नई सरकार से स्थिर नीति और तेज फैसलों की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि “डबल इंजन सरकार” से उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है.
बांग्लादेश से आयात की मांग तेज
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि फिलहाल हालात संभालने के लिए बांग्लादेश से आपातकालीन जूट आयात की अनुमति दी जानी चाहिए. मिल मालिकों के अनुसार अगर जल्दी कदम नहीं उठाए गए, तो टिटागढ़, भद्रेश्वर, हाजीनगर और जगदल जैसी जगहों की कई मिलें बंद होने की स्थिति में पहुंच सकती हैं. उद्योग का मानना है कि मौजूदा संकट सिर्फ मौसमी नहीं है, बल्कि लंबे समय से हो रही जमाखोरी, प्रशासनिक देरी और बाजार की गड़बड़ियों का नतीजा है.
मजदूरों और उद्योग दोनों की बढ़ी चिंता
जूट उद्योग पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था और रोजगार का बड़ा आधार माना जाता है. लाखों परिवार सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं. ऐसे में अगर हालात लंबे समय तक खराब रहे तो इसका असर सिर्फ उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हजारों मजदूरों और उनके परिवारों की जिंदगी भी प्रभावित होगी. फिलहाल उद्योग जगत की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है. सभी को उम्मीद है कि जल्द कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा, ताकि जूट मिलों का संकट और गहरा न हो.