आम किसानों के लिए अलर्ट.. ‘शोल्डर ब्राउनिंग’ रोग बर्बाद कर रहा फल, एक्सपर्ट ने बताया उपाय

Mango Fruit Diseases: आम में होने वाला ‘शोल्डर ब्राउनिंग’ रोग किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. इस रोग की वजह से फल की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ा है, जिससे बाजार मूल्य प्रभावित होता है. कृषि वैज्ञानिक एसके सिंह ने आम किसानों को इस रोग से फसल को बर्बाद करने से बचाने के आसान उपाय बताए हैं.

नोएडा | Published: 19 May, 2026 | 07:48 PM

Mango Shoulder Browning Disease: आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी सुंदरता ही बाजार में उसकी असली पहचान बनती है. चमकदार, दाग-धब्बों से मुक्त और आकर्षक रंग वाले आमों की मांग हमेशा अधिक रहती है. लेकिन पिछले कुछ सालों में बदलते मौसम, बढ़ती नमी और अनियमित मानसून ने आम उत्पादकों के सामने एक नई समस्या खड़ी कर दी है. यह समस्या है ‘शोल्डर ब्राउनिंग’ रोग, जो धीरे-धीरे आम की बाहरी गुणवत्ता को खराब कर देता है. बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे आर्द्र क्षेत्रों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है.

बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, यह रोग देखने में सामान्य लगता है, लेकिन इसका असर सीधे किसानों की कमाई, भंडारण क्षमता और निर्यात गुणवत्ता पर पड़ता है.

क्या है शोल्डर ब्राउनिंग रोग?

इस रोग में आम के डंठल के पास वाले हिस्से यानी ‘शोल्डर’ पर भूरे या काले धब्बे बनने लगते हैं. शुरुआत में ये धब्बे छोटे दिखाई देते हैं, लेकिन अधिक नमी और बारिश के कारण तेजी से फैलने लगते हैं. धीरे-धीरे पूरा फल बदरंग और कमजोर हो जाता है. कई किसान इसे मामूली दाग समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही संक्रमण आगे चलकर फल सड़न, एन्थ्रेक्नोज और डंठल सड़न जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म देता है.

आखिर क्यों बढ़ रही है यह समस्या?

किन किस्मों में ज्यादा खतरा?

पतली त्वचा और देर से पकने वाली किस्मों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है. खासतौर पर दशहरी, लंगड़ा, चौसा, मालदा और अम्रपाली जैसी लोकप्रिय किस्में ज्यादा प्रभावित होती हैं.

रोग से बचाव के वैज्ञानिक उपाय

फफूंदनाशी का सही उपयोग

विशेषज्ञों के अनुसार मानसून शुरू होने से पहले और लगातार बारिश के दौरान सुरक्षात्मक फफूंदनाशी छिड़काव बेहद जरूरी है. इसके लिए आप नीचे दिए गए फफूंदनाशी (कोई एक) का इस्तेमाल कर सकते हैं.

छिड़काव का सही समय

एक ही रसायन का बार-बार इस्तेमाल न करें, नहीं तो फफूंद में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है.

तुड़ाई और पैकिंग में बरतें सावधानी

तुड़ाई के समय फल को 1-2 सेंटीमीटर डंठल सहित तोड़ना चाहिए. इसके बाद फल को उल्टा रखकर दूधिया रस निकाल देना चाहिए, क्योंकि यही रस बाद में काले धब्बों का कारण बनता है. गर्म पानी उपचार भी एक असरदार तकनीक मानी जा रही है. इसमें आम को 52-55 डिग्री सेल्सियस गर्म पानी में कुछ मिनट तक डुबोया जाता है, जिससे सड़न कम होती है और भंडारण क्षमता बढ़ती है.

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