किसानों को बड़ा झटका! आंध्र प्रदेश में पैराक्वाट पर लगा बैन, जानें क्यों 60 दिनों तक नहीं होगी बिक्री
आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि पिछले कुछ समय में पैराक्वाट के सेवन और इसके संपर्क में आने से कई लोगों की मौत हुई है. ग्रामीण इलाकों और खेती से जुड़े क्षेत्रों में इसके दुष्प्रभाव ज्यादा देखने को मिले हैं. कई बार लोग गलती से इस जहरीले केमिकल के संपर्क में आ जाते हैं, जिससे गंभीर हालत पैदा हो जाती है.
Andhra Pradesh paraquat ban: आंध्र प्रदेश सरकार ने किसानों और आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने बेहद जहरीले माने जाने वाले खरपतवारनाशी केमिकल पैराक्वाट डाइक्लोराइड 24 प्रतिशत एसएल और उससे जुड़े सभी उत्पादों की बिक्री, स्टॉक, वितरण और इस्तेमाल पर अगले 60 दिनों के लिए रोक लगा दी है. सरकार का कहना है कि यह रसायन लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा था और हाल के दिनों में इससे जुड़े कई गंभीर मामले सामने आए हैं.
सरकार के इस फैसले के बाद किसानों, कृषि विशेषज्ञों और व्यापारियों के बीच इसकी चर्चा तेज हो गई है. आंध्र प्रदेश अब उन राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने इस खतरनाक केमिकल पर कार्रवाई की है. इससे पहले तेलंगाना और ओडिशा भी पैराक्वाट पर प्रतिबंध लगा चुके हैं. अब देशभर में इस पर स्थायी बैन लगाने की मांग उठने लगी है.
आखिर क्या है पैराक्वाट?
पैराक्वाट डाइक्लोराइड एक खरपतवारनाशी दवा है, जिसका इस्तेमाल खेतों में उगने वाली घास और अनचाहे पौधों को खत्म करने के लिए किया जाता है. किसान इसे इसलिए ज्यादा इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह बहुत तेजी से असर दिखाता है और खेत जल्दी साफ हो जाते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह रसायन इंसानों के लिए बेहद खतरनाक है.
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अगर इसकी थोड़ी सी मात्रा भी शरीर के अंदर चली जाए तो यह फेफड़ों, किडनी और शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है. कई मामलों में तो लोगों की तुरंत मौत तक हो चुकी है. यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे खतरनाक खरपतवारनाशियों में गिना जाता है.
लगातार बढ़ रहे थे मौत और पॉइजनिंग के मामले
आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि पिछले कुछ समय में पैराक्वाट के सेवन और इसके संपर्क में आने से कई लोगों की मौत हुई है. ग्रामीण इलाकों और खेती से जुड़े क्षेत्रों में इसके दुष्प्रभाव ज्यादा देखने को मिले हैं. कई बार लोग गलती से इस जहरीले केमिकल के संपर्क में आ जाते हैं, जिससे गंभीर हालत पैदा हो जाती है.
सरकार को पुलिस विभाग और कृषि विभाग की ओर से भी लगातार शिकायतें और रिपोर्ट मिल रही थीं. राज्य के पुलिस महानिदेशक ने भी इसकी बिक्री और इस्तेमाल पर अस्थायी रोक लगाने की सिफारिश की थी. इसके बाद सरकार ने कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत कार्रवाई करते हुए यह बड़ा फैसला लिया.
किसानों और दुकानदारों को सख्त निर्देश
सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य में मौजूद सभी निर्माता, डीलर, दुकानदार, वितरक और किसान इस आदेश का तुरंत पालन करें. अगर कोई व्यक्ति प्रतिबंध के बावजूद इस केमिकल की बिक्री या इस्तेमाल करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है.
कृषि आयुक्त को इस आदेश को पूरे राज्य में लागू कराने की जिम्मेदारी दी गई है. प्रशासन अब दुकानों, गोदामों और कृषि केंद्रों पर नजर रखेगा ताकि कहीं भी इस रसायन की अवैध बिक्री न हो सके.
देशभर में स्थायी बैन की मांग तेज
विशेषज्ञों और किसान संगठनों का कहना है कि केवल दो महीने का प्रतिबंध काफी नहीं है. उनका मानना है कि इस जहरीले केमिकल पर पूरे देश में स्थायी रोक लगनी चाहिए. क्योंकि राज्यों के पास सिर्फ सीमित समय के लिए बैन लगाने का अधिकार होता है. सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार भी अब इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है. अगर देशभर में इस पर स्थायी प्रतिबंध लगता है तो यह किसानों और आम लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम माना जाएगा.
किसानों के सामने बढ़ी नई चुनौती
हालांकि पैराक्वाट पर रोक के बाद किसानों के सामने नई परेशानी भी खड़ी हो सकती है. कई किसान खरपतवार खत्म करने के लिए इसी केमिकल पर निर्भर थे. अब उन्हें दूसरे सुरक्षित विकल्प अपनाने होंगे. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को जैविक और कम जहरीले विकल्पों की तरफ बढ़ना चाहिए ताकि खेती भी सुरक्षित रहे और लोगों की सेहत पर भी बुरा असर न पड़े.