11 फीसदी आयात शुल्क हटाने से कपास किसानों को होगा नुकसान? आखिर SKM ने केंद्र के खिलाफ क्यों खोला मोर्चा

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने कपास आयात शुल्क हटाने के केंद्र सरकार के निर्णय का विरोध किया है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और दयनीय होगी. SKM ने सरकार से यह निर्णय वापस लेने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती, तो पूरे देश में आंदोलन होगा.

नोएडा | Updated On: 30 Aug, 2025 | 07:16 PM

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने केंद्र सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें कपास पर 11 फीसदी आयात शुल्क हटाने का निर्णय लिया गया है. SKM का कहना है कि केंद्र की इस फैसले से घाटे में चल रहे कपास किसानों की आर्थिक स्थिति और दयनीय हो जाएगी. ऐसे में किसान कपास की खेती से दूरी बना लेंगे. साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा केंद्र सरकार से अपने फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है. SKM ने कहा है कि अगर सरकार अपने निर्णय को वापस नहीं लेती है, तो पूरे देश में आंदोलन करेंगे. बड़ी बात यह है कि SKM ने सरकार के सामने कई मांगें भी रखी हैं और कहा है कि उदारवादी कृषि नीतियों के कारण देश में किसानों की आत्महत्या के मामले बढ़े हैं.

दरअसल, वित्त मंत्रालय ने 19 अगस्त 2025 को एक अधिसूचना जारी करते हुए कपास पर लगे 11 प्रतिशत आयात शुल्क और कृषि अवसंरचना विकास उपकर (AIDC) को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया. यह निर्णय 30 सितंबर तक लागू रहेगा. सरकार ने कहा था कि यह कदम जनहित में लिया गया है. हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण से विपरीत प्रतीत होता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे भारतीय किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के खिलाफ किसी भी नीति के खिलाफ खड़े हैं. लेकिन हकीकत यह है कि पीएम मोदी की नीतियां भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करने में विफल रही हैं.

किस देश में कपास किसानों को मिलती है ज्यादा सब्सिडी

संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार, ट्रंप द्वारा भारत के वस्त्र निर्यात पर 50 फीसदी शुल्क लगाने के बाद पीएम मोदी ने भारतीय कपास किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला फैसला लिया, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की सबसे कमजोर कड़ी हैं. इस निर्णय का असर यह होगा कि आयातित कपास की कीमतें घट जाएंगी और घरेलू कपास के दाम भी और कम हो जाएंगे. ऐसे में भारत के छोटे कपास उत्पादक अमेरिका के बड़े पैमाने पर कपास उगाने वाले किसानों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते, जिन्हें सरकार से बहुत बड़ी सब्सिडी मिलती है. SKM की माने तो अमेरिकी लॉबिंग द्वारा भारत सरकार पर दबाव डालकर भारतीय किसानों को मिलने वाली राज्य सहायता कम कर दी गई है. अमेरिका में कपास उत्पादन की लगभग 12 फीसदी कीमत सब्सिडी के रूप में दी जाती है, जबकि भारत में यह केवल 2.37 फीसदी है. यह असमानता अमेरिकी किसानों को विकासशील देशों के किसानों पर बढ़त दिलाती है.

संयुक्त किसान मोर्चा पूरे देश में करेगा प्रदर्शन

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि केंद्र के इस निर्णय का तत्काल असर और भी गंभीर होगा, क्योंकि अधिकांश कपास उत्पादक किसानों ने दो महीने पहले ही अपनी फसल बो दी थी और उन्होंने इस उम्मीद में बड़े खर्च किए थे कि उनकी उपज उन्हें अच्छा लाभ दिलाएगी. ऐसे समय पर शुल्क हटाने का फैसला किसानों के लिए भारी नुकसान का कारण बनेगा. संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि भारत के कपास उगाने वाले इलाके पहले से ही कृषि संकट और किसान आत्महत्याओं के लिए कुख्यात हैं. अब यह नया कदम किसानों को और कर्ज में डालेगा और आर्थिक संकट को और बढ़ाएगा. कपास पर शुल्क हटने से घरेलू कीमतें और गिरेंगी, जिससे 60 लाख कपास उत्पादक परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा. ऐसे में अगर सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है, तो पूरे देश में प्रदर्शन होगा.

 प्रदर्शन को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की क्या है तैयारी

  • SKM ने कपास किसानों से अपील की है कि वे 19 अगस्त 2025 की अधिसूचना की प्रतियां जलाकर और गांव-गांव में विरोध प्रदर्शन करें.
  • 1, 2 और 3 सितम्बर 2025 को कपास उगाने वाले गांवों में जनसभाएं आयोजित की जाएंगी.
  • आयोजनों में 19 अगस्त की अधिसूचना को वापस लेने और 10,075 रुपये प्रति क्विंटल MSP@C2+50 फीसदी की घोषणा करने की मांग की जाएगी.
  • साथ ही यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा जाएगा.
  • NCC द्वारा 24 अगस्त 2025 को अपील पत्र और मांगपत्र का मसौदा उपलब्ध कराया जाएगा.
  • गांव की जनसभा स्थानीय निकायों से तत्काल ग्राम सभा बुलाने और MSP@C2+50 फीसदी लागू करने का प्रस्ताव पारित करने की मांग करेगी.
  • 10 सितम्बर 2025 तक, सभी स्थानीय निकाय के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपने के लिए हस्ताक्षर अभियान और घर-घर पर्चा वितरण किया जाएगा.
  • यदि प्रधानमंत्री मांगों को स्वीकार नहीं करते हैं, तो कपास किसान मंडल महापंचायत बुलाएंगे और संबंधित सांसदों के खिलाफ विरोध मार्च निकालेंगे.
  • SKM की राज्य समन्वय समितियां 11 कपास उत्पादक राज्यों में जल्द ही बैठकें और सम्मेलन आयोजित करेंगी.
  • कपास किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं के बीच, SKM का एक प्रतिनिधिमंडल 17 और 18 सितम्बर 2025 को महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का दौरा करेगा.

भारत में कितना है कपास का रकबा

भारत में कपास की खेती का क्षेत्रफल लगभग 120.55 लाख हेक्टेयर है, जो पूरी दुनिया के कुल कपास क्षेत्रफल का करीब 36 फीसदी है. इस हिसाब से भारत दुनिया में सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है. राज्यों में महाराष्ट्र का क्षेत्रफल सबसे अधिक है. इसके बाद गुजरात और तेलंगाना आते हैं. भारत में करीब 67 फीसदी कपास की खेती वर्षा आधारित क्षेत्रों पर निर्भर करती है. ऐसे भारत, चीन, अमेरिका, पाकिस्तान और ब्राजील कपास के प्रमुख उत्पादक देश हैं. दुनिया भर में कपास उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 0.9 फीसदी है. 2014-15 में 119 मिलियन गांठ का उत्पादन बढ़कर 2024-25 में लगभग 133 मिलियन गांठ तक पहुंचने का अनुमान है. वहीं, 2024-25 तक, दुनिया में कुल कपास उत्पादन में चीन का हिस्सा 23 फीसदी और अमेरिका का हिस्सा 13 फीसदी रहने का अनुमान है. हालांकि, पिछले 11 वर्षों में भारत में कपास उत्पादन में लगभग 10 लाख मीट्रिक टन की गिरावट आई है.

प्रति क्विंटल लगभग 2,365 रुपये का नुकसान

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) के अनुसार, 2024-25 के खरीफ विपणन मौसम में कपास उत्पादन की अनुमानित C2 लागत 6,230 रुपये प्रति क्विंटल रही. जबकि, कपास किसानों को 2024-25 सीजन में C2+50 फीसदी स्तर पर MSP नहीं मिलने के कारण उन्हें नुकसान हुआ. मध्यम रेशा कपास का MSP 7,121 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया, जबकि C2+50 फीसदी का रेट 10,075 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था. यानी किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 2,365 रुपये का नुकसान हुआ है.

किसानों की आत्महत्या के बढ़े मामले

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि 1991 में लागू की गई नई उदारवादी कृषि नीतियों के बाद से किसानों की आत्महत्याएं आम हो गई हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 4.5 लाख से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं. SKM का आरोप है कि पीएम मोदी सरकार ने इस विषय पर आंकड़े रखना लगभग बंद कर दिया है. संयुक्त किसान मोर्चा की माने तो पीएम मोदी के शासन में हर दिन 31 किसान आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन पिछले 11 वर्षों में किसानों के लिए कोई ऋण माफी योजना नहीं आई. इसके उलट, 16.11 लाख करोड़ रुपये का कॉरपोरेट कर्ज माफ किया गया.

मुआवजा राशि बढ़ाकर 25 लाख करे सरकार

संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार, महाराष्ट्र विधानसभा में 4 जुलाई 2025 को राहत और पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव ने कहा था कि मार्च और अप्रैल 2025 में सिर्फ दो महीनों में 479 किसानों ने आत्महत्या की. मार्च 2025 में 250 आत्महत्याएं हुईं, खासकर मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र में, जबकि अप्रैल 2025 में 229 आत्महत्याएं हुईं. राज्य सरकार ऐसे मामलों में मृतक के परिवार को 1 लाख रुपये की सहायता देती है, जो जिला स्तर पर जांच और समिति की मंजूरी के बाद दी जाती है. संयुक्त किसान मोर्चा की मांग है कि केंद्र और राज्य सरकारें तुरंत यह मुआवजा बढ़ाकर कम से कम 25 लाख करें और इसे 2014 से लागू करें.

Published: 30 Aug, 2025 | 06:10 PM