Basmati Rice: सूखे में भी नहीं घटेगी पैदावार, 135 दिन में तैयार होगी ये नई बासमती किस्म

बदलते मौसम और पानी की कमी के बीच किसानों के लिए एक नई बासमती धान किस्म उम्मीद बनकर सामने आई है. यह किस्म कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खेती का जोखिम घटेगा, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय को मजबूती मिलेगी.

नोएडा | Published: 23 Jun, 2026 | 04:28 PM

Basmati Rice: देश में बदलते मौसम, अनियमित बारिश और घटते भूजल स्तर के कारण धान की खेती करने वाले किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं. खासकर बासमती उत्पादक क्षेत्रों में पानी की कमी का असर उत्पादन पर साफ दिखाई दे रहा है. ऐसे समय में एक नई सूखा-सहनशील बासमती धान किस्म किसानों के लिए राहत लेकर आई है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार यह किस्म कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती है, जिससे किसानों का जोखिम कम हो सकता है.

बासमती उत्पादक क्षेत्रों के लिए खास किस्म

ये नई किस्म विशेष रूप से उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के बासमती उत्पादक  क्षेत्रों के लिए विकसित की गई है. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान इसकी खेती कर सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जिन इलाकों में पानी की उपलब्धता कम होती जा रही है, वहां यह किस्म बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. इसकी खासियत यह है कि सूखे जैसी परिस्थितियों में भी पौधे का विकास सामान्य रूप से जारी रहता है.

कम अवधि में तैयार, अच्छी पैदावार की क्षमता

ये खरीफ सीजन  की फसल है, जो लगभग 135 दिनों में तैयार हो जाती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के मुताबिक इसकी औसत उपज करीब 46.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है, जबकि अनुकूल परिस्थितियों में उत्पादन 59.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक दर्ज किया गया है. कम समय में तैयार होने के कारण किसान अगली फसल की तैयारी भी जल्दी कर सकते हैं, जिससे खेती का पूरा चक्र अधिक लाभदायक बनता है.

सूखे में भी उत्पादन बनाए रखने की क्षमता

विशेषज्ञ के अनुसार इस किस्म में ऐसे गुण विकसित किए गए हैं जो फसल को पानी की कमी  के दौरान भी मजबूती प्रदान करते हैं. विशेष रूप से बालियां बनने के समय यदि पानी की कमी हो जाए, तब भी यह किस्म उत्पादन को काफी हद तक सुरक्षित रखने में सक्षम है. परीक्षणों में पाया गया कि सूखे की स्थिति में इसका प्रदर्शन पारंपरिक किस्मों की तुलना में काफी बेहतर रहा. इससे किसानों को मौसम की मार से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है.

किसानों की लागत घटाने में मददगार

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कम पानी की जरूरत और बेहतर उत्पादन क्षमता  के कारण यह किस्म किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है. जल संकट वाले क्षेत्रों में इसकी खेती से सिंचाई पर खर्च कम हो सकता है और उत्पादन स्थिर रहने से किसानों की आय बढ़ने की संभावना रहती है. बदलते जलवायु हालात में यह किस्म टिकाऊ कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में बासमती उत्पादन को नई मजबूती दे सकती है.

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