किसानों को मिला उन्नत खेती का तोहफा, कृषि किट से बढ़ेगी अरहर की पैदावार और कमाई
बिहार में अरहर की खेती को नई रफ्तार देने के लिए कृषि विभाग ने बड़ा कदम उठाया है. आत्मा योजना के तहत 60 किसानों को कृषि किट देकर वैज्ञानिक खेती की शुरुआत की गई है. डेमो प्लॉट के जरिए किसान बेहतर उत्पादन की तकनीक सीखेंगे और आय बढ़ाएंगे.
बिहार में दलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार लाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने अरहर की उन्नत खेती को लेकर नई पहल शुरू की है. आत्मा योजना के तहत बुधवार को जिला कृषि कार्यालय में जिले के 20 प्रखंडों के चयनित 60 किसानों को कृषि किट उपलब्ध कराई गई. इन किसानों के खेतों में वैज्ञानिक तकनीक से अरहर की खेती कराकर डेमो प्लॉट तैयार किए जाएंगे, ताकि दूसरे किसान भी बेहतर उत्पादन की तकनीक सीख सकें.
20 प्रखंडों के 60 प्रगतिशील किसानों का किया गया चयन
कृषि विभाग की इस योजना के तहत जिले के सभी 20 प्रखंडों से तीन-तीन प्रगतिशील किसानों का चयन किया गया है. चयनित किसानों को अरहर की उन्नत खेती के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई गई है. जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने मीडिया को बताया कि इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों से जोड़ना है. उन्होंने कहा कि किसानों के खेतों में प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए जाएंगे, जहां उन्नत बीज, जैव उर्वरक और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए अरहर की बेहतर पैदावार हासिल करने का प्रयास किया जाएगा. इन खेतों को देखकर आसपास के किसान भी नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित होंगे.
कृषि किट में मिले उन्नत बीज और फसल सुरक्षा सामग्री
कृषि विभाग की ओर से किसानों को दी गई किट में अरहर का आधार (फाउंडेशन) बीज, माइकोराइजा जैव उर्वरक और कीट नियंत्रण की दवाइयां शामिल हैं. किसानों को इमिडाक्लोप्रिड और इमैमेक्टिन बेंजोएट जैसी दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं. मौके पर मौजूद कृषि विशेषज्ञों, एटीएम (सहायक तकनीकी प्रबंधक) और बीटीएम (प्रखंड तकनीकी प्रबंधक) ने किसानों को बीज उपचार, फसल प्रबंधन और कीट नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी. किसानों को बताया गया कि सही तकनीक अपनाने से अरहर की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है.
माइकोराइजा खाद से मजबूत होंगी फसल की जड़ें
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को माइकोराइजा जैव उर्वरक के महत्व के बारे में भी जानकारी दी. बताया गया कि यह खाद पौधों की जड़ों के साथ जुड़कर फॉस्फोरस और अन्य पोषक तत्वों को ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाती है. इसके उपयोग से पौधों की जड़ों का विकास तेजी से होता है और फसल मजबूत बनती है. खास बात यह है कि माइकोराइजा मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ पौधों को सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता भी प्रदान करती है. इससे कम पानी वाले क्षेत्रों में भी फसल को लाभ मिल सकता है.
डेमो प्लॉट से दूसरे किसानों को मिलेगी वैज्ञानिक खेती की सीख
जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने मीडिया को बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देखकर विश्वास करो की तर्ज पर किसानों को प्रेरित करना है. चयनित किसानों के खेतों में तैयार होने वाले डेमो प्लॉट दूसरे किसानों के लिए सीखने का माध्यम बनेंगे. जब किसान अपनी आंखों से देखेंगे कि उन्नत बीज, जैव उर्वरक और वैज्ञानिक तकनीक से अरहर की पैदावार बढ़ रही है, तो वे भी पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक तरीकों को अपनाएंगे. कृषि विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से जिले में अरहर का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ेंगे और किसानों की आमदनी में भी सुधार आएगा.