अमरूद की खेती से होगी बंपर कमाई, बिहार सरकार दे रही है प्रति एकड़ 40 हजार तक की सब्सिडी

Amrood Ki Kheti: बिहार में अमरूद की खेती अब किसानों के लिए कमाई का बढ़िया जरिया बन चुकी है. इसे कम लागत में उगाया जा सकता है और यह छोटी या सूखी जमीन में भी अच्छी पैदावार देती है. अमरूद सिर्फ फल बेचने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जूस, जेली, स्क्वैश जैसे तैयार उत्पाद बनाकर भी किसान ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं और रोजगार के नए मौके भी मिलते हैं. सरकार की MIDH योजना किसानों को शुरुआती निवेश में मदद करती है और इससे किसानों की आय बढ़ती है, पोषण बेहतर होता है और खेती में विविधता आती है.

नोएडा | Updated On: 8 Apr, 2026 | 09:02 AM

Guava Farming Tips: बिहार कृषि के क्षेत्र में अपनी विविध जलवायु और मिट्टी की विशेषताओं के कारण अमरूद उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल राज्य बनता जा रहा है. राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव के अनुसार, अमरूद सिर्फ एक फल फसल नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है.

अमरूद: कम लागत, अधिक लाभ

अमरूद एक ऐसी बागवानी फसल है जिसे हल्की बलुई से लेकर भारी दोमट मिट्टी तक आसानी से उगाया जा सकता है. यह फसल सूखा सहन करने में सक्षम है और सीमांत भूमि पर भी अच्छी पैदावार देती है. यही कारण है कि बिहार के छोटे और सीमांत किसान इस फसल को अपनाकर कम लागत में अधिक लाभ कमा सकते हैं. मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि यह फसल किसानों के लिए व्यवहारिक विकल्प के रूप में उभर रही है और उनकी आय को स्थिर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

अमरूद से रोजगार और मूल्य संवर्धन

अमरूद की मांग पूरे वर्ष बनी रहती है. इससे किसान नियमित और स्थिर आय अर्जित कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त, अमरूद से जैम, जेली, जूस, स्क्वैश और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद बनाए जाते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार अवसर भी उत्पन्न होते हैं. इस प्रकार अमरूद ग्रामीण उद्योग और व्यापार को भी गति देता है.

सरकार की योजना और वित्तीय सहायता

अमरूद बागवानी को बढ़ावा देने के लिए मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत प्रति हेक्टेयर बागवानी की लागत लगभग 1.0 से 1.2 लाख रुपये तय की गई है. इसके तहत किसानों को 40 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाता है, जिससे प्रारंभिक निवेश में मदद मिलती है और बागवानी को प्रोत्साहन मिलता है. यह योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ अमरूद उत्पादन को राज्य में बढ़ाने में भी सहायक है.

पोषण और स्वास्थ्य लाभ

अमरूद पोषण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण फल है. इसमें विटामिन-सी, फाइबर, कैल्शियम और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. ये तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन सुधारने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हैं. इस प्रकार अमरूद न केवल आर्थिक रूप से बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी किसानों और उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी है.

अमरूद जैसी बागवानी फसलों को बढ़ावा देकर बिहार में कृषि विविधीकरण को गति दी जा रही है. पारंपरिक फसलों के साथ फलोत्पादन को प्रोत्साहित करने से किसानों की आय में स्थिरता आती है, कृषि जोखिम कम होते हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सुरक्षा मिलती है.

Published: 8 Apr, 2026 | 06:00 AM

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