केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से आज 7 अप्रैल को जयपुर में रीजनल कॉन्फ्रेंस हुई है. इसमें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के चलते खेती को नुकसान पहुंच रहा है. तेजी से बदलते मौसम और पश्चिमी विक्षोभों के प्रभावी होने से असमय बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की गतिविधियां देखी जा रही हैं. उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से किसानों को बचाने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार हर फसल का अलग-अलग रोडमैप तैयार कर रही है. इससे किसानों को सटीक फसलों की खेती और कृषि प्रबंधन की सुविधा मिल सकेगी, जो नुकसान को घटाएगा और उत्पादन को बढ़ाने में मददगार होगा.
राजस्थान के जयपुर में आज मंगलवार को क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री ने संबोधित किया. कृषि पर पश्चिम क्षेत्र की यह पहली जोनल कॉन्फ्रेंस हो रही है. केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के साथ ही अन्य बड़े कृषि अधिकारी शामिल हुए हैं. कृषि सम्मेलन में राज्य में अपनाई गई सर्वोत्तम कृषि कार्य प्रणालियों का प्रजेंटेशन दिया गया है. बूंद बूंद सिंचाई पद्धति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई.
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से किसानों को बचाने के लिए रोडमैप तैयार
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के चलते कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंच रहा है. तेजी से बदलते मौसम और पश्चिमी विक्षोभों के प्रभावी होने से असमय बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की गतिविधियां देखी जा रही हैं. उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से किसानों को बचाने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार हर फसल का अलग-अलग रोडमैप तैयार कर रही है. इससे किसानों को सटीक फसलों की खेती और कृषि प्रबंधन की सुविधा मिल सकेगी, जो नुकसान को घटाएगा और उत्पादन को बढ़ाने में मददगार होगा.
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देश के 310 जिलों में जलवायु बदलावों का बुरा असर
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के जरिए “जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि में राष्ट्रीय नवाचार (NICRA)” नाम की योजना चलाई जा रही है. सरकार ने देश के 651 कृषि प्रधान जिलों में यह देखा कि जलवायु परिवर्तन का असर कहां कितना पड़ रहा है. यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर किया गया. इसमें पता चला कि 310 जिले ऐसे हैं जहां खेती पर खतरा ज्यादा है. इनमें 109 जिले बहुत ज्यादा जोखिम वाले हैं और 201 जिले उच्च जोखिम वाले हैं. यह आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में खेती अब पहले जैसी आसान नहीं रही.
रीजनल कॉन्फ्रेंस के लिए देश के सभी राज्यों को 5 जोन में बांटा गया
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खरीफ की फसल के लिए हम जोनल कॉन्फ्रेंस आयोजित करने जा रहे हैं. अभी तक यह होता था कि एक ही खरीफ और रबी कॉन्फ्रेंस होती थी. अब हमने तय कि है कि जोनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाए, ताकि व्यापक पैमाने कृषि विकास और किसान उन्नति पर चर्चा हो सके. इसके लिए देश के सभी राज्यों को 5 जोन में बांटा गया है.
कब और कहां होगी रीजनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस
कृषि मंत्री ने कहा कि 7 अप्रैल को जयपुर में पश्चिम West Zone की कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा. इसके बाद 17 अप्रैल को लखनऊ में North Zone की रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा. उन्होंने बताया कि 24 अप्रैल को भुवनेश्वर में East Zone की जोनल कॉन्फ्रेंस होगी. कृषि मंत्री ने बताया कि विधानसभा चुनाव के कारण South Zone और North East Zone की बैठकों की तारीख जल्द ही तय की जाएगी. मेरा सभी कृषि मंत्रीगणों से आग्रह है कि वे बैठक में पर्याप्त समय लेकर आएं, ताकि विषयों पर गहन और प्रभावी चर्चा हो सके.
हर फसल का राज्य और केंद्रीय स्तर पर रोडमैप बन रहा
उन्होंने आगे कहा कि खरीफ की फसल की तैयारी के लिए पहले हम एक ही बैठक करते थे लेकिन अब हम रीजनल कॉन्फ्रेंस करेंगे. अभी हमने 3 रीजनल कॉन्फ्रेंस करने का तय किया है. इसमें अधिकारियों के साथ-साथ वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, सफल किसान, किसान उत्पादक संगठन भी भाग लेंगे. ताकि हम खरीफ की फसल की ढंग से रणनीति और योजना बना सकें. हम हर फसल का रोडमैप बनाएंगे. यह रोडमैप राज्य और केंद्रीय स्तर पर बनाया जाएगा.