कम बारिश और नदियों में घटते जलस्तर से कश्मीर की खेती पर खतरा, किसानों को फसल बदलने की सलाह

इस बार सूखी सर्दियों का असर नदियों में भी साफ दिखाई दे रहा है. झेलम नदी का जलस्तर मार्च के पहले सप्ताह में शून्य गेज से नीचे चला गया, जो एक असामान्य स्थिति मानी जा रही है. फ्लड कंट्रोल विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कश्मीर के संगम क्षेत्र में झेलम नदी का जलस्तर माइनस 0.86 फीट दर्ज किया गया.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Mar, 2026 | 08:20 AM

Kashmir agriculture: कश्मीर घाटी में इस साल सर्दियों के दौरान सामान्य से काफी कम बारिश और बर्फबारी होने के कारण कृषि क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ गई है. मौसम में असामान्य गर्मी, नदियों के जलस्तर में गिरावट और कई फसलों में समय से पहले फूल आने की घटनाओं ने किसानों और कृषि विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया है. ऐसे हालात को देखते हुए कृषि विभाग और शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी ऑफ कश्मीर (SKUAST-K) ने किसानों को पानी की अधिक जरूरत वाली फसलों से बचने की सलाह दी है.

विशेष रूप से उन किसानों को सावधानी बरतने को कहा गया है जिनके खेत सिंचाई नहरों के अंतिम छोर पर स्थित हैं, क्योंकि वहां पानी की उपलब्धता सबसे पहले प्रभावित होती है.

कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह

ग्रेटर कश्मीर की खबर के अनुसार, कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले महीनों में सूखा जैसी स्थिति बनी रहती है तो धान और कई सब्जियों जैसी फसलें किसानों के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती हैं. इसलिए किसानों को मक्का, दालें और मोटे अनाज (मिलेट्स) जैसी कम पानी में उगने वाली फसलों की ओर रुख करने की सलाह दी गई है.

कश्मीर के कृषि निदेशक सरताज अहमद ने मीडिया को बताया कि इस साल सर्दियों के दौरान पूरे क्षेत्र में वर्षा बेहद कम हुई है. यदि यह स्थिति जारी रहती है तो आने वाले समय में लंबा शुष्क दौर देखने को मिल सकता है और सूखे की संभावना भी बढ़ सकती है. उन्होंने बताया कि विभाग ने नहरों के अंतिम हिस्सों में स्थित खेतों के किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया है.

सब्जियों की खेती में बरतनी होगी सावधानी

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सब्जियों की खेती केवल उन्हीं इलाकों में की जानी चाहिए जहां सिंचाई की पक्की व्यवस्था हो और पानी का स्थायी स्रोत मौजूद हो. सरताज अहमद के अनुसार, किसानों के पास कई वैकल्पिक फसलें उपलब्ध हैं, जिनसे कम पानी में भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि आने वाले कुछ हफ्तों में बारिश होती है तो धान और सब्जियों की खेती के जोखिम कुछ हद तक कम हो सकते हैं.

पहले भी अपनाए गए थे ऐसे कदम

कृषि विस्तार अधिकारी सैयद तालिब ने बताया कि पिछले साल भी जून में बारिश की कमी के कारण दक्षिण कश्मीर के कुछ हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बन गई थी. उस समय विभाग ने किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया था. उनके अनुसार, कुलगाम और अनंतनाग जिलों के होम-शालीबुग क्षेत्र में किसानों को मिलेट्स के बीज वितरित किए गए थे. यह इलाका कश्मीर का “चावल का कटोरा” भी कहा जाता है. यहां सिंचाई के लिए नदी नहर का इस्तेमाल होता है, लेकिन लंबे समय तक सूखा रहने पर यह जल्दी सूख जाती है, जिससे फसलों को खतरा बढ़ जाता है.

नदियों के जलस्तर में आई भारी गिरावट

इस बार सूखी सर्दियों का असर नदियों में भी साफ दिखाई दे रहा है. झेलम नदी का जलस्तर मार्च के पहले सप्ताह में शून्य गेज से नीचे चला गया, जो एक असामान्य स्थिति मानी जा रही है. फ्लड कंट्रोल विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कश्मीर के संगम क्षेत्र में झेलम नदी का जलस्तर माइनस 0.86 फीट दर्ज किया गया.

इसके अलावा घाटी की कई सहायक नदियों और नालों जैसे विशॉ, लिद्दर, ब्रेंगी, संदरन, वेथ वेथास्तु, रोमशी नल्लाह, टोंगरी नल्लाह, आरिपल नल्लाह, रम्बियारा और फिरोजपोरा नल्लाह में भी पानी का स्तर कम हो गया है.

कम बारिश और गर्म मौसम बना वजह

मौसम विभाग के अनुसार इस साल कश्मीर में सर्दियों के दौरान सामान्य से लगभग 65 प्रतिशत कम वर्षा हुई है. दिसंबर से फरवरी के बीच घाटी में केवल 100.6 मिलीमीटर बारिश और बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि औसत 284.9 मिलीमीटर होती है.

इसी कारण फरवरी और मार्च के शुरुआती दिनों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया. अधिकतम तापमान सामान्य से 10.8 से 13.7 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रहा, जिससे कई फसलों और फलदार पेड़ों में समय से पहले फूल आने लगे.

जल्दी फूल आने से बढ़ा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार बादाम, सेब और सरसों जैसी फसलों में जल्दी फूल आना किसानों के लिए चिंता का कारण है. यदि आने वाले दिनों में अचानक पाला पड़ता है तो इससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

हालांकि हाल ही में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण कश्मीर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और लद्दाख के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी हुई है. मौसम विभाग ने 20 मार्च तक रुक-रुक कर बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है.

अधिकारियों का कहना है कि यदि मार्च और अप्रैल के दौरान पर्याप्त वर्षा होती है, तो नदियों और सिंचाई नहरों में पानी का स्तर कुछ हद तक स्थिर हो सकता है. क्योंकि ये दोनों महीने कश्मीर में सामान्य रूप से सबसे ज्यादा वर्षा वाले माने जाते हैं. फिलहाल कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम के बीच किसानों को सावधानी से खेती की योजना बनानी होगी, ताकि पानी की कमी से होने वाले संभावित नुकसान से बचा जा सके.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 16 Mar, 2026 | 08:20 AM
ज्ञान का सम्मान क्विज

किस फसल को सफेद सोना कहा जाता है?

9319947093
जवाब इस नंबर पर करें Whatsapp

सवाल का दीजिए सही जवाब और जीतिए ₹1000 का इनाम! 🏆
पिछले Quiz का सही जवाब
गेहूं को फसलों का राजा कहा जाता है.
विजेताओं के नाम
नसीम अंसारी, देवघर, झारखंड.
रमेश साहू, रायपुर, छत्तीसगढ़

लेटेस्ट न्यूज़