सूखे इलाकों के किसानों के लिए वरदान है स्प्रिंकलर सिस्टम, जानिए इसके जबरदस्त फायदे

पहले यह तकनीक केवल घरों के लॉन और बगीचों में पौधों को पानी देने के लिए इस्तेमाल की जाती थी, लेकिन अब यह खेती में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है. आज देश के कई राज्यों में किसान इस आधुनिक सिंचाई प्रणाली को अपनाकर पानी की बचत के साथ अच्छी पैदावार हासिल कर रहे हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 9 Mar, 2026 | 01:09 PM

Sprinkler irrigation system: खेती में पानी का सही उपयोग आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है. कई इलाकों में पानी की कमी, अनियमित बारिश और भूजल स्तर गिरने जैसी समस्याओं के कारण किसानों को सिंचाई के नए और बेहतर तरीकों की तलाश करनी पड़ रही है. ऐसे समय में स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली किसानों के लिए एक प्रभावी समाधान बनकर सामने आई है.

पहले यह तकनीक केवल घरों के लॉन और बगीचों में पौधों को पानी देने के लिए इस्तेमाल की जाती थी, लेकिन अब यह खेती में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है. आज देश के कई राज्यों में किसान इस आधुनिक सिंचाई प्रणाली को अपनाकर पानी की बचत के साथ अच्छी पैदावार हासिल कर रहे हैं. बता दें कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई प्रणाली लगाने पर किसानों को 50 फीसदी से 90 फीसदी तक की भारी सब्सिडी मिलती है. यह सहायता राशि लघु, सीमांत, महिला और SC/ST किसानों को 90 फीसदी (या 25,000/हेक्टेयर तक), जबकि अन्य किसानों को 70-80 फीसदी तक दी जाती है.

क्या है स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली

स्प्रिंकलर सिंचाई एक ऐसी तकनीक है जिसमें खेत में पानी बिल्कुल बारिश की तरह छिड़का जाता है. इसमें पानी को पंप के माध्यम से पाइपलाइन में भेजा जाता है और फिर स्प्रिंकलर हेड के जरिए पूरे खेत में बूंदों के रूप में फैलाया जाता है.

जब यह पानी हवा में घूमते हुए खेत में गिरता है तो यह बारिश जैसा प्रभाव पैदा करता है. इससे खेत के हर हिस्से में समान रूप से नमी पहुंचती है और पौधों को पर्याप्त पानी मिल जाता है. इस प्रणाली का इस्तेमाल खेत, बगीचे, सब्जी की खेती और कई नकदी फसलों में आसानी से किया जा सकता है.

किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है यह तकनीक

स्प्रिंकलर सिंचाई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे पानी का उपयोग बहुत संतुलित तरीके से होता है. पारंपरिक सिंचाई में कई बार पानी का बड़ा हिस्सा बहकर बेकार चला जाता है, लेकिन स्प्रिंकलर प्रणाली में पानी बूंदों के रूप में सीधे पौधों तक पहुंचता है.

इस तकनीक से खेत के बड़े हिस्से में एक साथ सिंचाई की जा सकती है. इससे समय और मेहनत दोनों की बचत होती है. इसके अलावा खेत में पानी का समान वितरण होने से फसल की वृद्धि भी बेहतर होती है और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है.

कम मेहनत में ज्यादा सिंचाई

स्प्रिंकलर सिस्टम का उपयोग करने में ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती. एक बार सिस्टम लग जाने के बाद किसान आसानी से बड़े क्षेत्र में सिंचाई कर सकते हैं. यही कारण है कि कई किसान इसे पारंपरिक सिंचाई के मुकाबले ज्यादा सुविधाजनक मानते हैं.

यह प्रणाली गेहूं, दालें, सब्जियां, चारा फसल और बागवानी फसलों के लिए भी काफी उपयोगी साबित होती है. जिन क्षेत्रों में जमीन समतल नहीं होती, वहां भी यह तकनीक अच्छी तरह काम करती है.

सभी प्रकार की मिट्टी में उपयोगी

स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली की खास बात यह है कि इसे लगभग हर प्रकार की मिट्टी में इस्तेमाल किया जा सकता है. चाहे रेतीली मिट्टी हो या दोमट मिट्टी, यह तकनीक हर जगह प्रभावी रहती है. जहां पानी तेजी से जमीन में चला जाता है, वहां स्प्रिंकलर प्रणाली धीरे-धीरे पानी देकर मिट्टी में नमी बनाए रखती है. इससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त पानी मिलता है और फसल का विकास बेहतर होता है.

सरकार से मिलती है सब्सिडी

किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए सरकार भी प्रोत्साहित कर रही है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना में स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर सब्सिडी दी जाती है.

इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को लगभग 55 प्रतिशत तक और अन्य किसानों को करीब 45 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है. इसके अलावा SC/ST किसानों को 90 फीसदी तक लाभ मिलता है. कई राज्यों में राज्य सरकारें भी अतिरिक्त सहायता देती हैं, जिससे किसानों के लिए यह तकनीक और सस्ती हो जाती है.

जल संरक्षण के लिए बेहतर विकल्प

स्प्रिंकलर सिंचाई सिर्फ फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. इस तकनीक से पारंपरिक सिंचाई की तुलना में काफी कम पानी में खेतों की सिंचाई की जा सकती है. आज जब जल संकट बढ़ता जा रहा है, तब यह तकनीक खेती को टिकाऊ बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है.

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