Agriculture News: तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में बढ़ती गर्मी और पानी की कमी का असर रेशम उद्योग पर साफ दिखने लगा है. अधिक तपिश के चलते रेशम के पेड़ सूखने लगे हैं, जिससे रेशम के कीड़ों और उनके कोकून की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है. स्थानीय किसानों का कहना है कि इस भीषण गर्मी के चलते अगले महीने रेशम उत्पादन में करीब 20 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है. ऐसे में किसानों की कमाई पर भी असर पड़ेगा.
धर्मपुरी जिले में करीब 724.25 एकड़ में रेशम की खेती की जाती है. ये खेती किसानों की आजीविका का मुख्य आधार है. यहां हर साल 17 लाख टन से ज्यादा रेशम के कोकून का उत्पादन होता है. अनुकूल मौसम के कारण यहां चार रोड जंक्शन पर एक रेशम मंडी भी संचालित होती है, जहां रोजाना औसतन 1 से 3 टन कोकून की नीलामी होती है. इस नीलामी में लगभग 50 से 90 किसान हिस्सा लेते हैं.
गर्मी के कारण रेशम की गुणवत्ता प्रभावित
इस बार भीषण गर्मी और हीटवेव के कारण किसानों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि रेशम कोकून की कीमत और उसकी गुणवत्ता दोनों में गिरावट आई है. धर्मपुरी के मधिकोनपालयम के रेशम किसान एम.जी. मणिवन्नन ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि गर्मी के कारण रेशम की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. पानी की कमी और तेज तापमान से पेड़ कमजोर हो रहे हैं, जिससे उत्पादन भी घट रहा है. उन्होंने कहा कि जब रेशम की गुणवत्ता खराब होती है, तो उससे रेशम के कीड़ों (silkworms) का पालन भी प्रभावित होता है और इसी वजह से तैयार होने वाले कोकून की गुणवत्ता भी कम हो जाती है.
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धर्मपुरी के पेननागरम के रेशम किसान बी. महालिंगम ने कहा कि अगर पानी की पर्याप्त व्यवस्था होती, तो हालात संभाले जा सकते थे. लेकिन अभी पूरे जिले में खेती के लिए पानी की भारी कमी है, जिसका सीधा असर रेशम उद्योग पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि आमतौर पर गर्मियों में सूखा मौसम कोकून की गुणवत्ता बेहतर करता है, लेकिन इस बार भीषण गर्मी ने रेशम के कीड़ों की वृद्धि रोक दी है, जिससे कोकून की गुणवत्ता भी खराब हो गई है. महालिंगम ने जोर देकर कहा कि रेशम की बेहतर पैदावार के लिए पानी की तुरंत जरूरत है.
कोकून की औसत कीमत 537 रुपये प्रति किलो
धर्मपुरी में बुधवार को रेशम कोकून की औसत कीमत 537 रुपये प्रति किलो रही, जबकि अधिकतम कीमत 674 रुपये प्रति किलो तक पहुंची. इससे पहले औसत कीमत करीब 650 रुपये थी और सबसे ऊंची नीलामी 725 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर गई थी. रेशम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सही तरीके से गर्मी से निपटने की व्यवस्था होने पर यह समस्या कम हो सकती है. उन्होंने कहा कि किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है, लेकिन इस बार हीटवेव बहुत तेज है और नमी बेहद कम है. फिलहाल धर्मपुरी के कोकून बाजार में रोजाना औसतन 50 टन का कारोबार हो रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, इस स्थिति के कारण उत्पादन में 10 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आने की संभावना है.
धागे निकालने में रीलर्स को हो रहीं दिक्कतें
नमी की कमी के कारण कोकून से रेशम के धागे निकालने में रीलर्स को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई मामलों में तेज गर्मी की वजह से कोकून पर छोटे काले धब्बे भी दिखाई दे रहे हैं. कम नमी के कारण निकलने वाले रेशम के धागों का रंग भी हल्का बदल जाता है, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है. इसी वजह से इस सीजन में रेशम का कारोबार घट गया है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी का यह असर अस्थायी है और मौसम सामान्य होने के बाद स्थिति फिर से ठीक हो जाएगी.