आधार, पैन और वोटर आईडी से नहीं साबित होगी नागरिकता! कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

कलकत्ता हाईकोर्ट ने नागरिकता को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और बैंक खाता अकेले भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं. यह टिप्पणी एक हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई के दौरान की गई.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 2 Aug, 2026 | 04:24 PM

Indian C itizenship: कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिकता को लेकर एक अहम टिप्पणी की है. अदालत ने साफ कहा है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी (मतदाता पहचान पत्र) और बैंक खाता अपने आप में किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माने जा सकते. कोर्ट ने यह टिप्पणी एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई के दौरान की. यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची की जांच और नाम हटाए जाने को लेकर लगातार चर्चा हो रही है.

हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया फैसला

यह मामला सुमन मोल्ला द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका से जुड़ा था. उन्होंने खुद को हिरासत में लिए गए व्यक्ति का चाचा बताते हुए अदालत से उसकी रिहाई की मांग की थी. उनका कहना था कि संबंधित व्यक्ति की अपील लंबित थी, इसके बावजूद उसे हिरासत में ले लिया गया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने की. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जांच और सत्यापन के बाद संबंधित व्यक्ति की पहचान बांग्लादेशी नागरिक के रूप में हुई है. सरकार ने यह भी कहा कि उसके खिलाफ गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है.

कोर्ट ने दस्तावेजों पर क्या कहा?

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों की भी जांच की. कोर्ट ने पाया कि कई दस्तावेजों में आपस में मेल नहीं था. अदालत ने कहा कि संबंधित व्यक्ति का जन्म प्रमाण पत्र पेश नहीं किया गया. इसके अलावा अलग-अलग दस्तावेजों में उसके पिता का नाम अलग-अलग दर्ज था. अदालत ने यह भी कहा कि केवल भूमि अभिलेख (जमीन के कागजात) के आधार पर किसी की भारतीय नागरिकता साबित नहीं की जा सकती. कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ने अलग-अलग समय पर हिरासत में लिए गए व्यक्ति से अपने रिश्ते को लेकर अलग-अलग दावे किए, जिससे मामले पर और सवाल खड़े हुए.

वोटर आईडी और आधार पर अदालत की स्पष्ट टिप्पणी

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि मतदाता पहचान पत्र केवल यह दिखाता है कि किसी समय व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वह भारतीय नागरिक है. इसी तरह अदालत ने कहा कि आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाता भी अपने आप में भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं. इन दस्तावेजों का उपयोग अलग-अलग सरकारी और वित्तीय कामों के लिए किया जाता है, लेकिन नागरिकता तय करने का आधार केवल यही दस्तावेज नहीं हो सकते.

याचिका खारिज, लेकिन SIR पर बहस जारी

सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि सुमन मोल्ला संबंधित व्यक्ति की भारतीय नागरिकता साबित करने में सफल नहीं हुए. इसी आधार पर अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका खारिज कर दी और हिरासत को चुनौती देने से इनकार कर दिया. यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर बहस चल रही है. इस प्रक्रिया को लेकर कई संगठनों और मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पारदर्शिता और अल्पसंख्यकों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता भी जताई है. दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखने के लिए की जा रही है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़