Onion Mandi Rate: ईरान- इजरायल जंग का असर अब भारत के प्याज बाजार पर साफ दिखने लगा है. निर्यात में कमी आने से देश में प्याज की सप्लाई बढ़ गई है, जिससे कीमतों में तेज गिरावट आई है. इससे किसानों को नुकसान हो रहा है. महाराष्ट्र के नासिक स्थित एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव एपीएमसी में इस समय प्याज का औसत भाव गिरकर करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. हालांकि, दूसरी मंडियों में स्थिति और खराब है. ऐसे में कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट आ सकती है.
कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि खाड़ी देशों में अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय मांग घटी है, जिससे निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है. अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच भारत ने 12.83 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात किया था, जिससे करीब 2,970 करोड़ रुपये की कमाई हुई. लेकिन मौजूदा हालात के चलते व्यापार प्रभावित हुआ है और घरेलू बाजार में प्याज की अधिकता बढ़ गई है.
मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है
निर्यात घटने की वजह से जो प्याज पहले विदेश भेजा जाता था, वह अब बड़ी मात्रा में स्थानीय मंडियों में आ रहा है. इससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है और थोक कीमतों में तेज गिरावट आई है. कई इलाकों में दाम उत्पादन लागत से भी नीचे चले गए हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. चूंकि प्याज एक प्रमुख नकदी फसल है, इसलिए कीमतों में गिरावट से इससे जुड़े पूरे आर्थिक तंत्र पर असर पड़ रहा है.
महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज का ताजा रेट (Source- Agmarknet)
| मंडी का नाम | आगमन तिथि | आवक (मीट्रिक टन) | किस्म | न्यूनतम मूल्य (₹/क्विंटल) | अधिकतम मूल्य (₹/क्विंटल) | मॉडल मूल्य (₹/क्विंटल) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| अहमदनगर APMC | 18/04/2026 | 2,507.40 | लाल | 150 | 150 | 150 |
| अकलुज APMC | 19/04/2026 | 73.50 | लाल | 200 | 1,150 | 600 |
| अकोला APMC | 16/04/2026 | 408.80 | अन्य | 200 | 1,351 | 1,061 |
| बार्शी APMC | 23/04/2026 | 91.00 | अन्य | 150 | 750 | 500 |
| लासलगांव APMC | 22/04/2026 | 394.80 | अन्य | 400 | 1,600 | 1,051 |
| लासलगांव APMC | 23/04/2026 | 1,003.60 | अन्य | 400 | 1,501 | 1,025 |
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
एचपीईए के उपाध्यक्ष विकास सिंह ने ‘द फ्री प्रेस जर्नल’ से बात करते हुए कहा कि निर्यातकों को सहारा देने और किसानों की सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है. उनका कहना है कि केंद्र सरकार को निर्यात नीतियों को स्थिर रखना चाहिए, निर्यात प्रोत्साहन बढ़ाना चाहिए और कम से कम 7 फीसदी तक परिवहन सब्सिडी देनी चाहिए. साथ ही, आधुनिक भंडारण सुविधाएं विकसित करने और बंदरगाह व लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है. विकास सिंह का कहना है कि खुदरा कीमतें अभी काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन थोक बाजार में तेज गिरावट बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है. घरेलू मांग कमजोर है और बड़ी मात्रा में खरीद (बल्क परचेजिंग) भी कम हो गई है, जिससे कीमतों पर दबाव और बढ़ गया है.
मध्य पूर्व के तनाव के चलते निर्यात में बाधा
उन्होंने कहा कि कीमतों में गिरावट के मुख्य कारणों में मध्य पूर्व के तनाव के चलते निर्यात में बाधा, घरेलू बाजार में अधिक आपूर्ति और परिवहन व अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं. ये सभी वजहें मिलकर बाजार पर दबाव बना रही हैं, जिससे दाम तेजी से नीचे आ रहे हैं. निर्यात घटने से जो प्याज पहले खाड़ी देशों में भेजा जाता था, वह अब देश के अंदर ही बेचा जा रहा है. इससे घरेलू बाजार में स्टॉक बढ़ गया है और सप्लाई ज्यादा होने से कीमतें गिरने लगी हैं. कई थोक बाजारों में दाम उत्पादन लागत से भी नीचे चले गए हैं, जिससे बाजार का संतुलन बिगड़ गया है.
प्याज निर्यात से देश की कमाई
पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत प्याज का शुद्ध निर्यातक देश है और इससे विदेशी मुद्रा कमाता है. बीगत तीन वर्षों में प्याज के निर्यात से भारत की कमाई अलग-अलग रही है. वर्ष 2021-22 में करीब 3,326.99 करोड़ रुपये, वर्ष 2022-23 में 4,525.91 करोड़ रुपये और वर्ष 2023-24 में 3,513.22 करोड़ रुपये का शुद्ध निर्यात मूल्य प्राप्त हुआ.