‘पराली से पैसा’ बनाना सीखेंगे किसान, कृषि मेला में वैज्ञानिक बदलेंगे किसानों की राह, जानें 3 दिन में क्या-क्या होगा

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से मध्य प्रदेश में होने जा रहे 3 दिवसीय राष्ट्रीय कृषि मेले में किसानों को आधुनिक खेती, तकनीक इस्तेमाल के साथ ही पराली को जलाने की बजाय पैसे में बदलने की तकनीक और तरीका बताया जाएगा. मंत्रालय की ओर से 3 दिन मेला में किसानों के लिए क्या क्या होगा, इसकी डिटेल्स जारी की हैं.

Kisan India
नोएडा | Published: 5 Apr, 2026 | 07:31 PM

National Agriculture Fair Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होने जा रहे राष्ट्रीय कृषि मेले में किसानों को ‘पराली को पैसे में बदलने’ का तरीका बताएंगे. मतलब पराली को जलाने की बजाए अन्य दूसरे तरीके से इस्तेमाल करके उससे बनने वाले उत्पाद की बिक्री करके मोटा पैसा कमा सकते हैं. कृषि मेले में कृषि वैज्ञानिक आधुनिक उपकरणों को पेश करेंगे जो फसल अवशेष को भूसा समेत अन्य उत्पादों में बदल देंगे. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के लिए नई राह लेकर आ रहा है राष्ट्रीय कृषि मेला.

रायसेन का “उन्नत कृषि महोत्सव 2026 – प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण” के माध्यम से किसानों को देश के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन मिलेगा, वहीं पराली को “कचरे से कंचन” (Waste to Wealth) बनाने की तकनीक और तीन दिन तक लगातार चलने वाले प्रशिक्षण से किसानों की खेती को नए पायदान पर ले जाएगी. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि राष्ट्रीय मेला में तीनों दिन फसल प्रबंधन से लेकर बाजार और आधुनिक तकनीक पर किसानों को जानकारी दी जाएगी.

पहले दिन किसानों को मिलेगा वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहले दिन 11 अप्रैल को दोपहर के सत्रों में फसल कटाई के बाद प्रबंधन और कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund – AIF) के उपयोग से उन्नत कृषि, डिजिटल कृषि और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान, मधुमक्खी पालन से कमाई में वृद्धि और कृषि मशीनों के जरिए से खेती में उन्नति जैसे विषय शामिल रहेंगे. साथ ही, दलहन फसलों में उत्पादकता वृद्धि और क्षेत्र विस्तार, प्राकृतिक खेती, बागवानी फसलों का विस्तार तथा पराली प्रबंधन पर “वेस्ट‑टू‑वेल्थ (कचरे से कंचन)” के साथ नुक्कड़ नाटक के जरिए किसानों को व्यावहारिक संदेश दिए जाएंगे.

मेला में दूसरे दिन एफपीओ मीट के साथ एकीकृत खेती सत्र होंगे

दूसरे दिन 12 अप्रैल को सुबह एफपीओ मीट होगी. इसके अलावा मृदा स्वास्थ्य के माध्यम से हरित और सुरक्षित कृषि, संरक्षित खेती (पॉलीहाउस‑शेडनेट) को जलवायु‑अनुकूल कृषि के सतत दृष्टिकोण के रूप में और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) पर जागरूकता एवं संवाद कार्यशाला के साथ नुक्कड़ नाटक भी होंगे.एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, फूलों और सब्जियों की वैज्ञानिक खेती, एकीकृत कीट प्रबंधन– Integrated Pest Management (IPM) और बायो पेस्टीसाइड का उपयोग, नर्सरी प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई और फर्टिगेशन, हाइड्रोपोनिक्स, प्रिसिजन फार्मिंग और वर्टिकल फार्मिंग पर विशेष सत्र होंगे.

तीसरे दिन देशभर के केवीके साइंटिस्ट का जुटान

तीसरे दिन 13 अप्रैल को सुबह KVK यानी कृषि विज्ञान केंद्र सम्मेलन, धान में आत्मनिर्भरता हेतु बीज प्रणाली, मत्स्यपालन और मोतीपालन, कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. इसी दिन दोपहर के सत्रों में मध्य प्रदेश की जलवायु आधारित डेयरी संवर्धन एवं पशुपालन, धान की सीधी बुआई, मुर्गीपालन‑बकरीपालन से आय‑वृद्धि और “धरती बचाओ” विषय पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जलवायु‑संतुलित एवं टिकाऊ खेती का संदेश दिया जाएगा.

पराली से कमाई करना सीखेंगे किसान

शिवराज सिंह ने बताया कि महोत्सव में पराली प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाएगा. जहाँ “कचरे से कंचन” की अवधारणा के तहत वेस्ट‑टू‑वेल्थ मॉडल किसानों के समक्ष रखे जाएंगे ताकि पराली और कृषि अपशिष्ट को जलाने की जगह खाद, ऊर्जा और अतिरिक्त कमाई के रूप में बदला जा सके. पराली प्रबंधन पर सत्र के साथ‑साथ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और वैज्ञानिक प्रबंधन से मिलने वाले आर्थिक लाभ को सरल और सहज रूप में समझाया जाएगा.

ICAR के मृदा परीक्षण, ड्रोन, हाइड्रोपोनिक्स और खेती प्रणाली के लाइव मॉडल पेश होंगे

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि मेले के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद “वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन, उन्नत कृषि की झलक” को धरातल पर उतारेगी; किसानों द्वारा लाए गए मिट्टी के नमूनों का परीक्षण कर मृदा स्वास्थ्य रिपोर्ट दी जाएगी. ग्राफ्टिंग, उन्नत नर्सरी प्रबंधन, हाइड्रोपोनिक्स, हाई‑टेक हॉर्टिकल्चर और समेकित कृषि प्रणाली के लाइव मॉडल प्रदर्शित होंगे. ताकि किसान इन तकनीकों को देखकर‑समझकर अपनी खेती में लागू कर सकें.
केंद्रीय कृषि ने कहा कि यह तीन दिन का कार्यक्रम वास्तव में किसानों की जिंदगी बदलने को साकार करेगा. उन्होंने किसानों से इस आयोजन में ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है.

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