धान बोने से पहले जान लें ये खास बातें, कम खर्च में मिलेगा बंपर उत्पादन और ज्यादा फायदा
बिहार में खरीफ सीजन की तैयारी शुरू हो चुकी है और किसान धान की खेती पर फोकस कर रहे हैं. कृषि विभाग ने किसानों को सही समय, मौसम और उन्नत बीजों के इस्तेमाल की सलाह दी है. वैज्ञानिक तरीके अपनाने से कम लागत में बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा मिलने की संभावना बढ़ सकती है.
Paddy Farming: बिहार में रबी फसलों की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है और अब किसान खरीफ सीजन की तैयारियों में जुट गए हैं. राज्य में खरीफ मौसम के दौरान सबसे ज्यादा धान की खेती की जाती है. यही वजह है कि किसान समय से बिचड़ा तैयार करने और खेतों की तैयारी में लगे हुए हैं. कृषि विभाग का कहना है कि धान की खेती में सही समय पर तैयारी करना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह लंबी अवधि वाली फसल मानी जाती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर किसान खेती शुरू करने से पहले मौसम, मिट्टी और बीज की सही जानकारी हासिल कर लें तो कम लागत में अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है. कई बार जानकारी के अभाव में किसान गलत किस्म का चयन कर लेते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है और नुकसान उठाना पड़ता है.
सही समय और मौसम की जानकारी बेहद जरूरी
कृषि विभाग के अनुसार धान की खेती के लिए मौसम की जानकारी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. बुवाई का सही समय चुनने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और फसल पर रोगों का खतरा भी कम रहता है. अगर किसान समय से बिचड़ा तैयार कर लें तो रोपाई में भी आसानी होती है और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है. विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के पैटर्न और तापमान को ध्यान में रखकर ही बुवाई करनी चाहिए. मौसम की सही जानकारी नहीं होने पर कई बार बिचड़ा खराब हो जाता है या पौधों की वृद्धि रुक जाती है. ऐसे में किसानों को कृषि विभाग की सलाह और मौसम पूर्वानुमान पर ध्यान देना चाहिए.
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इन धान किस्मों से मिल सकता है ज्यादा उत्पादन
बिहार कृषि विभाग ने किसानों को कुछ उन्नत धान किस्मों को अपनाने की सलाह दी है. इनमें राजेंद्र श्वेता, एमटीयू-7029, सबौर हर्षित और सबौर सम्पन्न जैसी किस्में शामिल हैं. ये किस्में कम लागत में अधिक उत्पादन देने के लिए जानी जाती हैं. राजेंद्र श्वेता मध्यम अवधि की किस्म है, जो लगभग 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है. इसकी पैदावार अच्छी मानी जाती है और यह बिहार की मिट्टी के लिए उपयुक्त बताई गई है. वहीं एमटीयू-7029 भी किसानों के बीच काफी लोकप्रिय किस्म मानी जाती है.
सबौर हर्षित लगभग 115 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी उत्पादन क्षमता करीब 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई जाती है. इसके अलावा सबौर सम्पन्न किस्म लगभग 110 दिनों में पक जाती है और इसकी उपज क्षमता 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है. कृषि विभाग का कहना है कि इन किस्मों में रोगों का खतरा कम रहता है और किसानों को बेहतर मुनाफा मिल सकता है.
खेती शुरू करने से पहले अपनाएं ये जरूरी उपाय
धान की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी भी बेहद जरूरी मानी जाती है. किसानों को खेत की अच्छी तरह जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाना चाहिए. इसके साथ ही संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि पौधों को पर्याप्त पोषण मिल सके. कृषि विभाग ने किसानों को प्रमाणित बीज का उपयोग करने की सलाह दी है. साथ ही बीज उपचार करने पर भी जोर दिया गया है, जिससे फसल में रोग लगने का खतरा कम हो सकता है. समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण करने से भी उत्पादन बेहतर होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से धान की खेती करें और कृषि विभाग की सलाह का पालन करें तो इस खरीफ सीजन में बेहतर उपज के साथ अच्छी कमाई हासिल कर सकते हैं.