केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें देश के किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने के लिए हर संभव प्रयास करती हैं. सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार सारी चीजें मुहैया कराना और ये सुनिश्चित करना है कि किसानों को खेती करने में किसी भी तरह की दिकक्त का सामना न करना पड़े. इसी कड़ी में अब बिहार सरकार ने एक अहम फैसला लिया है जिसके चलते प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे होगा. जिसकी मदद से सरकार ये जानकारी जुटा पाएगी कि किसान अपने खेतों में कौन सी फसल उगा रहे हैं और किसानों की क्या जरूरतें हैं जिनपर सरकार का ध्यान जाना चाहिए.
11 लाख से ज्यादा खेतों का होगा सर्वे
साल 2025 के बिहार विधानसभा नजदीक हैं, ऐसे में सभी पार्टियां अपनी कमर कस चुकी है. प्रदेश की वर्तमान सरकारी भी फुल एक्शन मोड में है और लगातार प्रदेश के लोगों के विकास के लिए काम कर रही है. इसी कड़ी में अब प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे कराया जा रहा है. इस सर्वे के लिए प्रदेश की करीब 242 पंचायतों के 910 गांवों को चुना गया है. इन गांवों के लगभग 11 लाख से ज्यादा खेतों का सर्वे कराया जाएगा. बता दें कि, डेमो के तौर पर प्रदेश सरकार ने सर्वे के पहले चरण में 9 प्रखंडों का चुनाव किया था जो कि सफल रहा था. इस सफल सर्वे के बाद प्रदेश सरकार ने अब डिजिटल सर्वे का रकबा बढ़ा दिया है.
सर्वे के लिए दी गई ट्रेनिंग
बिहार कृषि विभाग द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी के अनुसार, डिजिटल क्रॉप सर्वे की शुरुआत से पहले सभी सर्वेयर को खास तौर पर ट्रेनिंग दी गई है. उन्हें एक मोबाइल ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा करना सिखाया गया है. साथ ही इन सर्वेयर को खास तौर पर ये बताया गया है कि सर्वे के दौरान उन्हें हर खेत की फोटो और किसान की फोटो, मोबाइल ऐप में अपलोड करनी होगी. बता दें कि, अगर किसी कारण से किसान की फोटो नहीं मिल पाती है तो सिर्फ खेत की साफ फोटो ली जाएगी जिसमें फसल और जमीन की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखे.
किसानों को कैसे होगा फायदा
बिहार में होने वाले डिजिटल क्रॉप सर्वे से होने वाले फायदों की बात करें तो सबसे पहले जान लें कि, इस सर्वे से प्रदेश सरकार को जमीन पर हो रही असली खेती की जानकारी मिलेगी. इस जानकारी के आधार पर सरकार ऐसी योजनाएं बनाने की तैयारी करेगी ताकि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार मदद पहुंचाई जा सके. साथ ही किसान सिंचाई के लिए किस तरह के साधनों का इस्तेमाल करते हैं, उसकी भी जानकारी मिलेगी ताकि सरकार जल संरक्षण की ओर भी ध्यान दे सके. बता दें कि, यह सर्वे हर मौसम में किया जाएगा ताकि हर बार की खेती की जानकारी सरकार को उपलब्ध हो सके.