गोदामों में 3 साल से पड़ा है 3 करोड़ टन पुराना चावल, व्यापारियों ने लगाए बड़े आरोप

वियतनाम और थाईलैंड जैसे चावल निर्यातक देशों ने आशंका जताई है कि अगर भारत यह पुराना चावल वैश्विक बाजार में उतारता है, तो कीमतें और नीचे चली जाएंगी. अनुमान है कि भारत अगर 20 एमटी तक पुराना चावल बेचता है, तो इसका असर बाकी देशों की उत्पादन योजनाओं पर पड़ेगा.

नई दिल्ली | Published: 30 Aug, 2025 | 10:32 AM

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है, लेकिन अब यही चावल सरकार के लिए सिरदर्द बन गया है. व्यापारी संगठनों का कहना है कि देश के गोदामों में करीब 3 करोड़ टन से ज्यादा पुराना चावल पिछले तीन सालों से जमा पड़ा है. यह स्टॉक न सिर्फ सरकार पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नए संकट खड़े कर सकता है.

रिकॉर्ड स्तर पर चावल का भंडारण

भारतीय खाद्य निगम (FCI) के आंकड़ों के मुताबिक 1 सितंबर तक देश के गोदामों में 37.97 मिलियन टन (एमटी) चावल और 21.35 एमटी धान मौजूद है. यह अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है.

पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने लगातार बड़े पैमाने पर धान की खरीद की है. 2022-23 में 68.4 एमटी, 2023-24 में 71.9 एमटी और 2024-25 में 76.81 एमटी चावल खरीदा गया. इसमें से लगभग 35 एमटी चावल राशन दुकानों और सरकारी योजनाओं में बंटा, लेकिन भारी मात्रा में स्टॉक गोदामों में ही पड़ा रह गया.

बढ़ती लागत से सरकार परेशान

व्यापारियों का कहना है कि एक टन धान सरकार औसतन 23,000 रुपये में खरीदती है. इसके बाद प्रोसेसिंग, भंडारण और ब्याज की लागत मिलाकर यह खर्च 35,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच जाता है. पुराने चावल को लंबे समय तक रखने से यह लागत और भी बढ़ जाती है.

सरकार ने खुले बाजार में बिक्री योजना (OMSS) के तहत चावल को 28,000 रुपये प्रति टन पर बेचने की कोशिश की, लेकिन खरीदार नहीं मिले. वजह साफ है कि दुनियाभर में चावल की मांग सुस्त है और दाम कई सालों के निचले स्तर पर हैं.

अंतरराष्ट्रीय बाजार पर असर

वियतनाम और थाईलैंड जैसे चावल निर्यातक देशों ने आशंका जताई है कि अगर भारत यह पुराना चावल वैश्विक बाजार में उतारता है, तो कीमतें और नीचे चली जाएंगी. अनुमान है कि भारत अगर 20 एमटी तक पुराना चावल बेचता है, तो इसका असर बाकी देशों की उत्पादन योजनाओं पर पड़ेगा.

थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान मिलकर 20-25 एमटी चावल का निर्यात करते हैं. अगर भारत अकेले 19-20 एमटी निर्यात कर देता है (जिसमें बासमती भी शामिल है), तो बाकी देशों को भारी नुकसान होगा.

विकल्प क्या हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने चावल को एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे स्टॉक कम होगा और किसानों को भी नई खरीदी में फायदा मिलेगा. वहीं, कुछ व्यापारी यह भी सुझाव दे रहे हैं कि सरकार को 2003-04 की तरह पुराने स्टॉक को सस्ते दामों पर निकालकर गोदाम खाली करने चाहिए.

किसानों और उपभोक्ताओं पर असर

पुराने स्टॉक का बोझ बढ़ने से भविष्य में किसानों से धान की खरीद पर असर पड़ सकता है. वहीं अगर सरकार अचानक बड़ी मात्रा में चावल बाजार में उतार देती है तो इसका सीधा असर किसानों की आय और वैश्विक कीमतों पर पड़ेगा.