पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य, 15 दिन में न कराने पर 2000 रुपये जुर्माना

शहर में पालतू और आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इससे लोगों की सुरक्षा और साफ-सफाई पर असर पड़ रहा है. निगम की मानें तो फिलहाल शिमला में सिर्फ 160 पालतू कुत्ते रजिस्टर्ड हैं, जबकि असल संख्या 1500 से ज्यादा है. ऐसे में न तो सही रिकॉर्ड मिल पा रहा है और न ही कुत्तों पर नियंत्रण.

नई दिल्ली | Published: 30 Aug, 2025 | 09:52 AM

अगर आप शिमला में रहते हैं और आपके पास पालतू कुत्ता है, तो अब आपको और जिम्मेदार बनना होगा. शहर में पालतू और लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नगर निगम ने एक कड़ा फैसला लिया है. शुक्रवार को हुई मासिक बैठक में इस मुद्दे पर जमकर बहस हुई. पार्षदों और अधिकारियों के बीच गरमा-गरम चर्चा के बाद निगम ने यह तय किया कि हर पालतू कुत्ते का अगले 15 दिनों के भीतर पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) अनिवार्य होगा. तय समयसीमा में पंजीकरण न कराने पर 2000 रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा.

क्यों लिया गया यह फैसला?

शहर में पालतू और लावारिस कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इससे लोगों की सुरक्षा और साफ-सफाई पर असर पड़ रहा है. निगम की मानें तो फिलहाल शिमला में सिर्फ 160 पालतू कुत्ते रजिस्टर्ड हैं, जबकि असल संख्या 1500 से ज्यादा है. ऐसे में न तो सही रिकॉर्ड मिल पा रहा है और न ही कुत्तों पर नियंत्रण.

ऑनलाइन और ऑफलाइन सुविधा

लोगों को सुविधा देने के लिए निगम ने ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके अलावा निगम दफ्तर में विशेष काउंटर भी बनाए जाएंगे. यहां जाकर पालतू मालिक आसानी से रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे. निगम का कहना है कि प्रक्रिया सरल और तेज रखी जाएगी, ताकि किसी को परेशानी न हो.

पंजीकरण क्यों जरूरी है?

  • पालतू कुत्तों की पहचान और रिकॉर्ड आसानी से बनेगा.
  • शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या पर नियंत्रण मिलेगा.
  • कुत्तों के टीकाकरण और स्वास्थ्य की जानकारी निगम के पास रहेगी.
  • किसी घटना या शिकायत की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना आसान होगा.

पालतू मालिकों के लिए संदेश

नगर निगम ने सभी कुत्ता मालिकों से अपील की है कि वे समय रहते अपने पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन कराएं. साथ ही निगम ने यह भी कहा है कि टीकाकरण, साफ-सफाई और कुत्तों की सही देखभाल हर मालिक की जिम्मेदारी है.