Crop Management: खेती में सही समय पर सही फैसला लेना ही अच्छी पैदावार की कुंजी माना जाता है. खासकर गेहूं की फसल में थोड़ी सी लापरवाही भी उत्पादन को प्रभावित कर सकती है. ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने किसानों के लिए गेहूं की फसल को लेकर जरूरी सुझाव जारी किए हैं. इन सलाहों को अपनाकर किसान पानी बचा सकते हैं, लागत कम कर सकते हैं और बेहतर उत्पादन पा सकते हैं.
समय पर सिंचाई से बचाएं फसल
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) ने गेहूं किसानों के लिए सलाह जारी की है. संस्थान के अनुसार गेहूं की फसल में जरूरत के हिसाब से ही सिंचाई करनी चाहिए. बिना जरूरत ज्यादा पानी देने से फसल को नुकसान हो सकता है और पानी भी बेकार जाता है. सिंचाई करने से पहले मौसम का हाल जरूर देखना चाहिए. अगर बारिश की संभावना हो तो सिंचाई टाल देना बेहतर होता है. किसानों को सलाह दी गई है कि सिंचाई शाम के समय करें, क्योंकि उस समय हवा कम चलती है और फसल गिरने का खतरा भी कम रहता है. दाने बनने की अवस्था में आखिरी सिंचाई करना जरूरी होता है ताकि दाने अच्छे बन सकें और गर्मी का असर कम पड़े.

गेहूं फसल बचाने की आसान और जरूरी किसान सलाह.
गर्मी से बचाने के आसान उपाय
मार्च के महीने में तापमान बढ़ने लगता है, जिससे गेहूं की फसल पर असर पड़ सकता है. ऐसे में ICAR ने कुछ आसान उपाय बताए हैं. अगर लगातार तीन दिन तक तापमान ज्यादा रहता है तो फूल आने के बाद पोटाश का छिड़काव करना फायदेमंद माना जाता है. किसान 200 लीटर पानी में 400 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं. इसके अलावा 200 लीटर पानी में 4 किलो पोटेशियम नाइट्रेट मिलाकर छिड़काव करने से भी गर्मी का असर कम किया जा सकता है. ज्यादा गर्मी वाले इलाकों में दोपहर के समय हल्की फुहार वाली सिंचाई भी की जा सकती है. इससे पौधों को ठंडक मिलती है और फसल सुरक्षित रहती है.
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कीटों पर रखें नजर
ICAR के अनुसार गेहूं की फसल में चेपा यानी एफिड का हमला अक्सर देखने को मिलता है. इसलिए किसानों को नियमित रूप से फसल की जांच करनी चाहिए. अगर एक पौधे पर 10 से 15 एफिड दिखाई दें तो तुरंत दवा का छिड़काव करना चाहिए. इसके लिए 400 मिली दवा को 200 से 250 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में छिड़काव किया जा सकता है. समय पर नियंत्रण करने से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.

अच्छी पैदावार के लिए सही समय पर सिंचाई करना चाहिए.
रतुआ रोग से बचाव जरूरी
गेहूं की फसल में पीला, भूरा और काला रतुआ रोग भी नुकसान पहुंचाता है. इसलिए किसानों को समय-समय पर फसल का निरीक्षण करते रहना चाहिए. अगर पत्तियों पर पीले या भूरे धब्बे दिखाई दें तो तुरंत इलाज करना जरूरी है. इस स्थिति में एक लीटर पानी में एक मिली दवा मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है. करीब 200 लीटर पानी में 200 मिली दवा मिलाकर एक एकड़ खेत में छिड़काव किया जा सकता है. दवा का छिड़काव साफ मौसम में ही करना चाहिए. बारिश, ओस या कोहरे के समय छिड़काव नहीं करना चाहिए.
सही समय पर करें कटाई
जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल पक चुकी है वहां समय पर कटाई करना जरूरी है. अगर फसल ज्यादा देर तक खेत में खड़ी रहती है तो नुकसान हो सकता है. जहां मशीन उपलब्ध हो वहां मशीन से कटाई करना आसान होता है. अगर हाथ से कटाई की जा रही है तो फसल को सुखाकर ही मड़ाई करनी चाहिए. आईसीएआर के अनुसार किसान अगर इन आसान बातों का ध्यान रखें तो गेहूं की फसल अच्छी होगी. सही सिंचाई, कीट नियंत्रण और समय पर कटाई से लागत भी कम होगी और उत्पादन भी बेहतर मिलेगा.