सरसों कटाई से पहले जानें जरूरी बातें, फसल बर्बादी से बच जाएंगे आप.. दांतों से बीज दबाकर करें नमी की जांच

सरसों की फसल की परिपक्वता पहचानने का सबसे आसान तरीका है खेत का निरीक्षण करना. जब फलियां हरे रंग से सुनहरी पीली हो जाएं और पौधों की पत्तियां सूखकर गिरने लगें, तो कटाई का सही समय है. 80 फीसदी पीलापन तक इंतजार करने से दाने कम झड़ते हैं और तेल की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 3 Feb, 2026 | 01:06 PM

Mustard cultivation: मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और हरियाणा सहित कई राज्यों में सरसों की फसल पककर तैयार हो गई है. कुछ दिनों में उसकी कटाई शुरू हो जाएगी. लेकिन कटाई करने से पहले किसानों को कुछ जरूरी बातें जरूर जाननी चाहिए. क्योंकि सरसों ऐसी फसल है जिसकी कटाई करते समय थोड़ी सी लापरवाही बरती गई, तो फसल की बर्बाद हो सकती है. ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. लेकिन कृषि जानकारों का कहना है कि सरसों कटाई के समय किसान कुछ सावधानियां अपना कर बर्बादी को कम कर सकते हैं.

दरअसल, कृषि जानकारों का कहना है कि सरसों तैयार होने पर उसकी जल्दी कटाई नहीं करनी चाहिए. साथ ही कटाई में दरे करना भी उचित नहीं है. उनका कहना है कि जल्दी कटाई से दाने पिचक जाते हैं, जबकि देर होने पर फलियां चटकने लगती हैं, जिससे नुकसान होता है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, सरसों की कटाई  का सही समय फसल के रंग और नमी से पता चलता है. जब 75 से 80 फीसदी फलियों का रंग सुनहरा पीला हो जाए और दाने सख्त और गहरे भूरे रंग के दिखें, तो समझें कि फसल तैयार है. कटाई के समय दानों में नमी 15 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, ताकि भंडारण में फफूंद या सड़न न हो.

कैसे करें पहचान सरसों की फसल हो गई है तैयार

सरसों की फसल की परिपक्वता पहचानने का सबसे आसान तरीका है खेत का निरीक्षण करना. जब फलियां हरे रंग से सुनहरी पीली हो जाएं और पौधों की पत्तियां सूखकर गिरने लगें, तो कटाई का सही समय है. 80 फीसदी पीलापन तक इंतजार करने से दाने कम झड़ते हैं और तेल की गुणवत्ता  भी अच्छी रहती है. कटाई के बाद दानों की गुणवत्ता सीधे किसानों के मुनाफे से जुड़ी होती है. दानों को हाथ या दांतों से दबाकर देखें, अगर वे ‘कट’ की आवाज के साथ टूटें, तो नमी का स्तर सही है. हालांकि, नमी 15 फीसदी से कम होनी चाहिए. सही समय पर कटाई से दानों का आकार और वजन भी अच्छा रहता है और मंडी में बेहतर दाम मिलते हैं.

राजस्थान है सबसे बड़ा सरसों उत्पादक राज्य

बता दें कि सरसों मुख्य तिलहनी फसल है. राजस्थान, मध्य  प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में किसान बड़े स्तर पर सरसों की खेती  करते हैं. सरसों तिलहन उत्पादन में करीब 20 फीसदी तक योगदान देती है. खास बात यह है कि राजस्थान देश का सबसे बड़ा सरसों उत्पादक राज्य है. यह अकेले 46 फीसदी से अधिक उत्पादन करता है. इसकी पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.

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Published: 3 Feb, 2026 | 12:51 PM

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