केंद्र सरकार ने आलू की 4 नई किस्मों को दी मंजूरी, अब 90 दिनों में तैयार होगी फसल.. इन राज्यों को फायदा
आईसीएआर-सीपीआरआई के निदेशक डॉ. बृजेश सिंह ने इन किस्मों को किसानों और आलू उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि इन नई किस्मों में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए खास फायदे दिए गए हैं. ‘कुफरी रतन’ 90 दिन में तैयार होने वाली किस्म हैं. इसके छिलके लाल होते हैं.
Potato Farming: आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने ICAR-सेंट्रल पोटैटो रिसर्च इंस्टीट्यूट (शिमला) द्वारा विकसित आलू की चार नई किस्मों को देशभर में बीज उत्पादन और उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है. केंद्रीय बीज समिति की सिफारिश के आधार पर ‘कुफरी रतन’, ‘कुफरी चिपभारत-1’, ‘कुफरी चिपभारत-2’ और ‘कुफरी तेजस’ को गुणवत्तापूर्ण बीज के रूप में स्वीकृति मिली है. सरकार को उम्मीद है कि इससे आलू की पैदावार बढ़ाने और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को मजबूत करने के नए अवसर मिलेंगे.
आईसीएआर-सीपीआरआई के निदेशक डॉ. बृजेश सिंह ने इसे किसानों और आलू उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि इन नई किस्मों में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए खास फायदे दिए गए हैं. ‘कुफरी रतन’ 90 दिन में तैयार होने वाली किस्म हैं. इसके छिलके लाल होते हैं. इसके चलते इसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह किस्म ज्यादा उत्पादन देने वाली आलू की किस्मों में शामिल है, जो उत्तर भारत के मैदानी और पठारी इलाकों के लिए उपयुक्त है. इसके आलू दिखने में अच्छे होते हैं और लंबे समय तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं.
आलू के उत्पादन में इजाफा होगा
वहीं, ‘कुफरी तेजस’ भी 90 दिन में तैयार होने वाली और अधिक उत्पादन देने वाली किस्म है, जो गर्मी को सहन कर सकती है. यह हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के लिए उपयुक्त है और सामान्य तापमान पर भी अच्छी तरह स्टोर की जा सकती है. इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि खाने और प्रोसेसिंग दोनों के लिए आलू सेक्टर को मजबूती मिलेगी. सरकार को उम्मीद है कि इन किस्मों की खेती करने पर आलू के उत्पादन में इजाफा होगा.
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इन किस्मों को मिली थी मंजूरी
बता दें कि बीते दिनों मध्य प्रदेश सरकार ने आईसीएआर-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित सोयाबीन की तीन नई किस्में- NRC 157, NRC 131 और NRC 136 किस्मों को मंजूरी दी थी. माना जा रहा है कि ये नई किस्में किसानों के लिए ज्यादा उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता देने में मददगार साबित होंगी. अगर किसान इन किस्मों की खेती करते हैं, तो उनकी कमाई में बढ़ोतरी हो सकती है.
देरी से बोने पर भी यह किस्म अच्छी पैदावार देती है
प्रिंसिपल साइंटिस्ट और ब्रीडर, डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि NRC 157 (IS 157) एक मीडियम-ड्यूरेशन सोयाबीन किस्म है, जो सिर्फ 94 दिनों में पक जाती है. इसका औसत उत्पादन 16.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और यह अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट, बैक्टीरियल पस्चुल्स और टारगेट लीफ स्पॉट जैसी बीमारियों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है. संस्थान में किए गए फील्ड ट्रायल में यह किस्म 20 जुलाई तक देरी से बोई जाए तो भी अच्छे उत्पादन के साथ ठीक रहती है.