कॉफी किसानों की बढ़ी चिंता! कम बारिश से व्हाइट स्टेम बोरर का हमला, उत्पादन घटने का डर
कर्नाटक और केरल के प्रमुख कॉफी उत्पादक इलाकों में सामान्य से 2 से 61 फीसदी तक कम बारिश हुई है. सूखे दौर से अरेबिका फसल पर व्हाइट स्टेम बोरर का प्रकोप बढ़ा है. कोडागु, चिकमगलूर, हासन और वायनाड से देश के 87 फीसदी कॉफी उत्पादन में योगदान मिलता है. ऐसे में बारिश की कमी का असर 2026-27 सीजन के उत्पादन पर पड़ सकता है.
देश के प्रमुख कॉफी उत्पादक इलाकों में अब तक औसत से काफी कम बारिश हुई है. कर्नाटक और केरल के चार बड़े कॉफी उत्पादक जिलों में सामान्य से 2 से 61 फीसदी तक कम बारिश हुई है. वहीं, देश के प्रमुख कॉफी उत्पादक इलाकों में बारिश की कमी से फसल पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. कर्नाटक और केरल के प्रमुख कॉफी उत्पादक जिलों में कम बारिश के साथ सूखे दौर ने व्हाइट स्टेम बोरर (WSB) नामक खतरनाक कीट का प्रकोप बढ़ा दिया है. यह कीट खास तौर पर अरेबिका कॉफी की फसल को नुकसान पहुंचाता है. किसानों का कहना है कि इससे आने वाले सीजन में उत्पादन प्रभावित हो सकता है.
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बारिश की इस कमी का असर कॉफी की फसल के विकास पर पड़ सकता है. इन हालात का असर अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 कॉफी सीजन के उत्पादन पर भी पड़ने की आशंका है. कर्नाटक के कोडागु, चिकमगलूर और हासन तथा केरल के वायनाड जिले देश के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्र हैं. इन चार जिलों से 2025-26 में देश के कुल 3.73 लाख टन कॉफी उत्पादन का करीब 87 फीसदी हिस्सा आया था. ऐसे में इन इलाकों में बारिश की कमी का असर देश के कुल कॉफी उत्पादन पर भी पड़ सकता है.
11 अगस्त तक सामान्य से करीब 25 फीसदी कम बारिश
देश के सबसे बड़े कॉफी उत्पादक जिले कोडागु में 1 जून से 11 अगस्त तक सामान्य से करीब 25 फीसदी कम बारिश हुई है. इस दौरान जिले में 1,260.6 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 1,677.3 मिमी होती है. खास बात यह है कि हासन में बारिश की कमी सबसे ज्यादा है. यहां मॉनसून सीजन में सामान्य से 61 फीसदी कम बारिश हुई है. 1 जून से अब तक जिले में सिर्फ 173.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 445.7 मिमी है.
केरल के वायनाड में भी हालात चिंताजनक
केरल के वायनाड में भी हालात चिंताजनक हैं. यहां बारिश में 50 फीसदी की कमी रही है. जिले में 1 जून से अब तक 955 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 1,904.2 मिमी है. वहीं, चिकमगलूर में स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है. यहां बारिश की कमी करीब 2 फीसदी रही है. जिले में 1,071.2 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 1,088.2 मिमी है.
कॉफी के पौधों पर व्हाइट स्टेम बोरर का प्रकोप
बारिश की कमी और बीच-बीच में लंबे समय तक सूखा रहने से कॉफी के पौधों पर व्हाइट स्टेम बोरर का प्रकोप बढ़ा है. किसानों को डर है कि अगर कीट का असर बढ़ा तो अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 कॉफी सीजन में उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है. कॉफी उत्पादक इलाकों में मॉनसून ने जुलाई के मध्य के बाद रफ्तार पकड़ी है, लेकिन बारिश अब भी कई क्षेत्रों में असमान है. ऐसे में 2026-27 सीजन में कॉफी उत्पादन की सही तस्वीर अगले 2-3 हफ्तों में साफ होने की उम्मीद है.
4.04 लाख टन कॉफी उत्पादन का अनुमान
कॉफी बोर्ड ने 2026-27 सीजन के लिए 4.04 लाख टन कॉफी उत्पादन का अनुमान लगाया है. इसमें 1.20 लाख टन अरेबिका और 2.84 लाख टन रोबस्टा शामिल है. इसके मुकाबले 2025-26 में देश का अंतिम कॉफी उत्पादन अनुमान 3.73 लाख टन रहा था. इसमें 1.11 लाख टन अरेबिका और 2.62 लाख टन रोबस्टा का उत्पादन हुआ था. हालांकि, इस साल बारिश की कमी और अरेबिका में बढ़ते कीट प्रकोप को देखते हुए कॉफी उत्पादक इलाकों में आने वाले महीनों की बारिश फसल के लिए बेहद अहम होगी.