पीली, लाल और मुड़ी पत्तियां क्या कहती हैं? कपास किसान समय रहते समझ लें तो बचेगा बड़ा नुकसान
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि पौधे की पत्तियां उसकी रसोई होती हैं. यहीं भोजन बनता है और यहीं से पौधे की ताकत तय होती है. अगर किसी कारण से पौधे को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, तो उसका असर सबसे पहले पत्तियों पर दिखाई देता है. रंग बदलना, सिकुड़ना, सूखना या कमजोर पड़ना – ये सब संकेत होते हैं कि फसल के भीतर कुछ गड़बड़ चल रही है.
Cotton farming: खेती में अक्सर कहा जाता है कि फसल बोलती है, बस किसान को उसकी भाषा समझनी आनी चाहिए. कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए यह बात बिल्कुल सच बैठती है. कपास का पौधा अपनी सेहत के बारे में सबसे पहले इशारा अपनी पत्तियों के जरिए करता है. अगर पत्तियों के रंग, बनावट और मजबूती पर समय रहते ध्यान दे दिया जाए, तो कई बीमारियों और पोषक तत्वों की कमी को शुरुआती दौर में ही पकड़ा जा सकता है. इससे न सिर्फ उत्पादन सुरक्षित रहता है, बल्कि बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है.
भारत जैसे देश में, जहां गर्म जलवायु कपास के लिए अनुकूल मानी जाती है, यह फसल किसानों की आय का बड़ा सहारा बनती है. लेकिन अगर फसल कमजोर हो जाए या उसमें पोषक तत्वों की कमी आ जाए, तो चमकदार रूई की जगह पीली पत्तियां और कमजोर टिंडे ही हाथ लगते हैं. इसलिए जरूरी है कि किसान कपास की पत्तियों की भाषा समझें और समय रहते सही कदम उठाएं.
पत्तियां क्यों होती हैं फसल की सेहत का आईना
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि पौधे की पत्तियां उसकी रसोई होती हैं. यहीं भोजन बनता है और यहीं से पौधे की ताकत तय होती है. अगर किसी कारण से पौधे को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, तो उसका असर सबसे पहले पत्तियों पर दिखाई देता है. रंग बदलना, सिकुड़ना, सूखना या कमजोर पड़ना, ये सब संकेत होते हैं कि फसल के भीतर कुछ गड़बड़ चल रही है.
कपास में यह संकेत और भी साफ नजर आते हैं. अलग-अलग पोषक तत्वों की कमी से पत्तियों में अलग-अलग बदलाव देखने को मिलते हैं. अगर किसान इन बदलावों को पहचान ले, तो महंगी दवाइयों और अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है.
नाइट्रोजन की कमी कैसे पहचानें
जब कपास के पौधे को नाइट्रोजन सही मात्रा में नहीं मिलती, तो इसका असर सबसे पहले पुरानी पत्तियों पर दिखाई देता है. शुरुआत में ये पत्तियां हल्के हरे रंग की नजर आती हैं. धीरे-धीरे इनका रंग फीका पड़ने लगता है और वे पीली होने लगती हैं. अगर समय रहते सुधार न किया जाए, तो यही पीलापन नई पत्तियों तक पहुंच जाता है. पौधे की बढ़वार रुक जाती है और टिंडों की संख्या भी कम हो जाती है. ऐसे में नाइट्रोजन की पूर्ति करना बेहद जरूरी हो जाता है.
फॉस्फोरस की कमी से कमजोर होता पौधा
फॉस्फोरस कपास की जड़ों और फूलों के विकास के लिए जरूरी तत्व है. इसकी कमी का असर भी पहले नीचे की पुरानी पत्तियों पर दिखता है. पत्तियां सामान्य हरे रंग की बजाय बैंगनी या गहरे रंग की हो जाती हैं और पौधा कमजोर दिखाई देने लगता है. धीरे-धीरे यह असर ऊपर की पत्तियों तक फैल सकता है. अगर खेत में ऐसी स्थिति दिखे, तो समझ लेना चाहिए कि फॉस्फोरस की कमी फसल को नुकसान पहुंचा रही है.
मैग्नीशियम की कमी से लाल पड़ती हैं पत्तियां
कई बार किसान देखते हैं कि कपास की पत्तियां लाल या तांबे जैसे रंग की हो रही हैं, जबकि डंठल और नसें हरी बनी रहती हैं. यह लक्षण आमतौर पर मैग्नीशियम की कमी का संकेत होते हैं. यह समस्या ज्यादा तर पुरानी और पूरी तरह विकसित पत्तियों में दिखाई देती है. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो पत्तियां गिरने लगती हैं और पौधा कमजोर हो जाता है.
सल्फर की कमी नए पत्तों से देती है संकेत
सल्फर की कमी में सबसे पहले कपास की नई पत्तियां प्रभावित होती हैं. ये पत्तियां हल्के हरे से पीले रंग की होने लगती हैं, जबकि पुरानी पत्तियां कुछ समय तक हरी बनी रहती हैं. इससे साफ समझा जा सकता है कि पौधे को सल्फर की जरूरत है. सल्फर की कमी से पौधे की बढ़वार धीमी पड़ जाती है और फसल का समग्र विकास प्रभावित होता है.
आयरन की कमी से पत्तियों में पीलापन
अगर कपास के पौधे की ऊपरी नई पत्तियों में नसों के बीच पीलापन दिखने लगे, तो यह आयरन की कमी का संकेत हो सकता है. इस स्थिति में पुरानी पत्तियां सामान्य हरी रहती हैं, लेकिन नई पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़ जाती हैं. इसे क्लोरोसिस कहा जाता है. समय रहते आयरन की पूर्ति न की जाए, तो पौधा कमजोर हो जाता है और उत्पादन पर असर पड़ता है.
बोरॉन की कमी से गिरने लगते हैं फूल और टिंडे
बोरॉन की कमी कपास की फसल के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक मानी जाती है. इसकी कमी में पौधे के ऊपरी हिस्से सूखने लगते हैं. नए फूल और टिंडे झड़ने लगते हैं, जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ता है. कई बार खेत हरा-भरा दिखता है, लेकिन टिंडों की संख्या बेहद कम रह जाती है. यह साफ संकेत है कि फसल को बोरॉन की जरूरत है.
समय पर पहचान ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय
कपास की पत्तियों को ध्यान से देखकर किसान बहुत पहले ही फसल की बीमारी या पोषक तत्वों की कमी को पहचान सकते हैं. अगर शुरुआती संकेतों पर ही सही खाद और पोषक तत्व दे दिए जाएं, तो फसल को बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सकता है. यही वजह है कि अनुभवी किसान कहते हैं – खेत में रोज एक चक्कर लगाना और पत्तियों को गौर से देखना, आधी खेती बचा देता है.