किसान नेताओं के मन की बात, कहा- सरकारी आदेश सिर्फ दिखावा.. सर्वे के लिए खेतों में नहीं आए कर्मचारी

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने 'किसान इंडिया' से कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मार्च महीने से कई बार फसल नुकसान की गिरदावरी कराने के लिए निर्देश दे चुके हैं. लेकिन जमीन पर उनके निर्देश का पालन नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि अभी गांवों में कृषि अधिकारियों फसल नुकसान का जायजा लेने के लिए भी नहीं पहुंचे हैं.

नोएडा | Updated On: 12 Apr, 2026 | 04:29 PM

Crop Damage: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब सहित कई राज्यों में फसलों की बर्बादी हुई है. कई राज्यों में सरकार ने गिरदावरी कराने का आदेश तक दे दिया है. उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं. उन्होंने विशेष गिरदावरी करने का आदेश दिया और 24 घंटे के अंदर फसल नुकसान की रिपोर्ट भी मांगी है. लेकिन उनके आदेश के बावजूद जमीन पर काम होता हुआ नहीं दिख रहा है. ये हाल केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि अधिकांश राज्यों में यही हाल है. इससे किसान नेताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है. राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसान नेताओं ने ‘किसान इंडिया’ से बात करते हुए सरकार से तुरंत फसल मुआवजे की मांग की है.

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने ‘किसान इंडिया’ से कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मार्च महीने से कई बार फसल नुकसान की गिरदावरी कराने के लिए निर्देश दे चुके हैं. लेकिन जमीन पर उनके निर्देश का पालन नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि अभी गांवों में कृषि अधिकारियों फसल नुकसान का जायजा लेने के लिए नहीं पहुंचे हैं, जबकि किसान हफ्ते भर से इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस बेमौसम बारिश  से 30 से लेकर 70 फीसदी तक फसल को नुकसान पहुंचा है. एक शब्द में कहें तो किसानों की भारी आर्थिक हानि हुई है. ऐसे में केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्य के किसानों को भी वहां की सरकारों को विशेष रूप से मदद करनी चाहिए.

पूरी भरपाई सरकारी खजाने से की जानी चाहिए

धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि किसानों को जितना नुकसान हुआ है, उसकी पूरी भरपाई सरकारी खजाने से की जानी चाहिए. हालांकि, सरकारें ऐसा नहीं करती हैं. उन्होंने कहा कि अमूमन सरकारें फसल नुकसान के नाम पर 100 रुपये से लकेर 300 रुपये प्रति बीघा की दर से मुआवजा राशि जारी करती हैं, जो ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर है. इस तरह का मुआवजा किसानों की पीड़ा कम करने के बजाए, घाव पर और नमक छीड़कने का काम करता है. धर्मेंद्र मलिक ने किसान इंडिया से कहा कि इस बार हिमाचल प्रदेश में बागवानी फसलों को बहुत नुकसान हुआ है. सेब और अन्य फलों के बाग बर्बाद हो गए हैं. इसलिए हिमाचल सरकार को भी बागवानों को विशेष राहत कोष से मदद करनी चाहिए.

बायोमेट्रिक प्रक्रिया से किसान नेता नाराज

एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने भी कहा कि हरियाणा में बेमौसम बारिश और तेज हवाएं चलने से हजारों हेक्टेयर में गेहूं, मक्का, सरसों, चना और सब्जियों की फसल  को नुकसान हुआ है. लेकिन सरकार ने अभी तक मुवआजे का ऐलान नहीं किया है. उन्होंने कहा कि मंडियों में पूरी व्यवस्था इतनी जटिल हो गई है कि किसान अपनी उपज बेचने से डर रहे हैं. वेरिफिकेशन के नाम पर मंडियों में उनकी घंटों जांच की जा रही है. ऐसे में मंडियों के अंदर किसानों को कई बार घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक जैसी प्रक्रिया किसानों के लिए सर दर्द बन गई है. उन्होंने कहा कि इस प्रकिया में किसानों को अंगूठा लगाना पड़ता है, चाहे उसकी हालत ठीक हो या नहीं, सिस्टम को बस यह साबित करना होता है कि व्यक्ति मौजूद है.

क्वालिटी के नाम पर MSP में कटौती नहीं नहीं हो

किसान नेता और किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि राजस्थान में बेमौसम बारिश और तेज ओलावृष्टि ने किसानों को भारी नुकसान  पहुंचाया है. इसाबगोल, जीरा, गेहूं, मक्का और सरसों जैसी फसलें खराब हो गई हैं. लेकिन किसानों की अभी तक कोई मदद नहीं मिली है. हालांकि, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राजस्थान को गेहूं खरीद मानकों में छूट दी है, लेकिन सरकार को खरीदी के दौरान क्वालिटी के नाम पर MSP में कटौती नहीं करनी चाहिए. इससे किसानों को नुकसान पहुंचता है. उन्होंने कहा कि सिकुड़े हुए दाने से भी आटे का उत्पादन बेहतर क्वालिटी के बराबर ही होता है.

 

Published: 12 Apr, 2026 | 04:19 PM

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