Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए किसान पहचान पत्र (Farmer ID) को अनिवार्य कर दिया है. अब कृषि और उससे जुड़ी योजनाओं का लाभ लेने के लिए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने के लिए यह आईडी जरूरी होगी. इसका उद्देश्य लाभार्थियों की सही पहचान करना और सिस्टम में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना है. मुख्य सचिव एसपी गोयल के आदेश के अनुसार, राज्य के सभी कृषि संबंधी विभाग धीरे-धीरे केंद्र की एग्रीस्टैक पहल के तहत इस किसान आईडी को योजनाओं से जोड़ेंगे.
वहीं, भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने Farmer ID पर किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है. इससे सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े पर ब्रेक लगेगा. किसी भी स्कीम का लाभ केवल पात्र किसान ही उठा पाएंगे. लेकिन सरकार को जल्दबाजी में Farmer ID को अनिवार्य नहीं करना चाहिए. जब प्रदेश के सभी किसानों की आईडी बन जाए, तब इसे पूरी तरह से लागू करनी चाहिए. उनके मुताबिक, प्रदेश के हजारों किसानों के नाम आधार कार्ड और रेवेन्यू रिकॉर्ड में गलत छपे हुए हैं. इससे उन किसानों को Farmer ID बनवाने में दिक्कतें आ रही हैं. इसलिए सरकार जल्दबाजी में इसे अनिवार्य नहीं करें.
75 फीसदी किसानों की आईडी बन गई
सरकार के मुताबिक, अब तक लगभग 75 फीसदी किसानों को यह किसान आईडी जारी की जा चुकी है और बाकी पात्र किसानों को जल्द कवर करने का काम तेजी से चल रहा है. कृषि विभाग के निदेशक पंकज त्रिपाठी ने कहा है कि राज्य के 2.88 करोड़ किसानों में से अब तक 2.33 करोड़ किसानों को आईडी जारी की जा चुकी है. बाकी किसानों को आईडी देने के लिए 6 अप्रैल से पूरे राज्य में एक विशेष अभियान चलाया गया है.
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10 अंकों का एक यूनिक किसान आईडी नंबर दिया जाता है
यूपी किसान रजिस्ट्री (यूपीएफआर एग्रीस्टैक) एक डिजिटल डेटाबेस है, जिसे सभी किसानों का रिकॉर्ड रखने के लिए बनाया गया है. इसे किसानों के लिए आधार जैसी पहचान प्रणाली माना जा रहा है. इसके तहत हर किसान को 10 अंकों का एक यूनिक किसान आईडी नंबर दिया जाता है, जिससे वे सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और कृषि सेवाओं का लाभ आसानी से ले सकते हैं.
यूपी में किसान पहचान प्रणाली लागू होगा
आदेश के अनुसार अब पीएम-किसान योजना की आने वाली किस्तें केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगी, जिनका किसान आईडी बन चुका होगा. उत्तर प्रदेश सरकार ने यह भी तय किया है कि राज्य की अपनी कृषि और उससे जुड़ी सभी योजनाओं में भी इसी किसान पहचान प्रणाली को लागू किया जाएगा. इसमें बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता और गन्ना विकास विभाग की योजनाएं भी शामिल हैं. पहले चरण में कृषि विभाग उर्वरक, बीज, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री वितरण वाली योजनाओं में किसान आईडी को अनिवार्य करेगा. इन योजनाओं के लाभार्थियों का चयन भी अब किसान आईडी डेटाबेस के आधार पर ही किया जाएगा.
इन फसलों की खरीदी Farmer ID दिखाने पर होगी
आदेश के अनुसार अब गेहूं, धान, दलहन, सरसों और अन्य अधिसूचित फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर तभी की जाएगी जब खरीद केंद्रों पर किसानों की किसान पहचान पत्र (Farmer ID) की अनिवार्य जांच हो जाएगी. मई 2026 से PACS सोसायटी और निजी डीलरों के माध्यम से मिलने वाली सब्सिडी वाली खाद का वितरण भी किसान आईडी और किसान रजिस्ट्री से जोड़ा जाएगा. इसके लिए राज्य का एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (IFMS) पोर्टल एग्रीस्टैक से इंटीग्रेट किया जाएगा.
लाभार्थी चयन और पोर्टल अपडेट करने के निर्देश
कृषि विभाग को 1 मई 2026 तक अपने सभी लाभार्थी चयन पोर्टल अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि सभी संबंधित विभागों को 31 मई 2026 तक यह सिस्टम पूरी तरह लागू करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है. इस कदम का उद्देश्य सभी किसानों का एक एकीकृत डिजिटल डेटाबेस बनाना है, ताकि सरकारी सब्सिडी और कल्याण योजनाओं का लाभ सही और जरूरतमंद किसानों तक सीधे पहुंच सके. साथ ही, फसल खरीद और कृषि इनपुट (जैसे खाद-बीज) के वितरण में पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत और पारदर्शी बनाया जा सके.