अरहर के खेत में बार-बार लग रहा रोग? ये फसल चक्र अपनाएं, कीड़े-बीमारियां रहेंगी दूर!

अगर अरहर के खेत में हर साल उखठा रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है, तो फसल चक्र अपनाना फायदेमंद हो सकता है. कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, अरहर के बाद मक्का, बाजरा या रागी लगाने से रोग का दबाव घटाने और मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद मिल सकती है.

नोएडा | Updated On: 29 Aug, 2026 | 06:33 PM

दलहनी फसलों की लगातार खेती करने वाले किसानों के लिए जरूरी सलाह सामने आई है. एक ही खेत में बार-बार अरहर या दूसरी दलहनी फसल उगाने से उखठा रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, ऐसे खेतों में फसल चक्र अपनाना रोगों का दबाव कम करने और मिट्टी की सेहत बनाए रखने का प्रभावी तरीका है.

एक ही फसल बार-बार लगाने से बढ़ सकता है रोग

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार,  किसानों को एक ही खेत में लगातार कई वर्षों तक अरहर या अन्य दलहनी फसल की खेती  करने से बचना चाहिए. लगातार एक जैसी फसल उगाने से मिट्टी में कुछ रोग पैदा करने वाले जीवाणु और फफूंद के बढ़ने की संभावना रहती है. इसके साथ ही कुछ विशेष कीटों का प्रकोप भी बढ़ सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के मुताबिक, अगर किसी खेत में अरहर की फसल में बार-बार उखठा रोग की समस्या सामने आ रही है, तो अगले मौसम में फसल बदलना फायदेमंद हो सकता है. इससे मिट्टी में मौजूद रोग कारकों का दबाव कम करने में मदद मिलती है.

अरहर के बाद मक्का, बाजरा या रागी लगाएं

फसल चक्र को अपनाते समय किसान अरहर के बाद गैर-दलहनी फसलों को शामिल कर सकते हैं. इसके लिए मक्का, बाजरा और रागी  जैसी फसलें उपयोगी विकल्प हो सकती हैं. एक या अधिक मौसम तक फसल बदलने से खेत में एक ही फसल से जुड़े रोग और कीटों का जीवन चक्र प्रभावित होता है. प्रमोद कुमार के अनुसार, फसल चक्र का चुनाव स्थानीय मिट्टी, मौसम, सिंचाई की उपलब्धता और किसान की जरूरत के अनुसार किया जाना चाहिए. इससे खेत की उत्पादकता को बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है.

मिट्टी की सेहत और उर्वरता को मिलेगा फायदा

फसल चक्र का फायदा सिर्फ रोग और कीट नियंत्रण तक सीमित नहीं है. अलग-अलग फसलों की जड़ें मिट्टी की अलग-अलग गहराई से पोषक तत्वों का उपयोग करती हैं. ऐसे में अलग-अलग प्रकार की फसलों को बारी-बारी से उगाने से मिट्टी में पोषक तत्वों के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिल सकती है. इसके अलावा खेत को लंबे समय तक खाली छोड़ने से बारिश और हवा के कारण मिट्टी का कटाव हो सकता है. फसल चक्र अपनाने से भूमि पर वनस्पति आवरण  बना रहता है, जिससे मिट्टी के संरक्षण में भी मदद मिलती है. इससे लंबे समय में खेत की उत्पादन क्षमता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है.

रोग से बचाव के लिए किसानों को क्या करना चाहिए?

जिन खेतों में हर साल अरहर या अन्य दलहनी फसलों में उखठा रोग की समस्या आती है, वहां लगातार उसी फसल की खेती नहीं करनी चाहिए. किसान एक वर्ष का अंतर रखते हुए मक्का, बाजरा, रागी जैसी गैर-दलहनी फसलों को चक्र में शामिल कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, फसल चक्र को खेती की नियमित योजना का हिस्सा बनाना चाहिए. इससे रोग और कीटों का दबाव कम करने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और खेती की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, रोग की स्थिति और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर फसल चक्र तय करना बेहतर रहेगा.

Published: 29 Aug, 2026 | 07:31 PM

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