एक पेड़ में 42 किस्म के आम लगाने में सफलता मिली, वैज्ञानिकों का दूसरे पौधों पर शोध शुरू किया
कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि एक ही पेड़ में कई किस्मों की वजह से उत्पादन में कमी देखी गई है और इस तरह के पौधों को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किसानों को सौंपना अभी भी चुनौती बना हुआ है.
एक पेड़ पर कई किस्म के फल हासिल करने को बड़ी उपलब्धि माना जाता है. यह उपलब्धि उत्तराखंड के उद्यान विभाग ने हासिल कर ली है. यहां पर मूल रूप से लंगड़ा आम के पेड़ पर 42 किस्म के आम फल पैदावार हासिल की गई है. पेड़ पर पके फल देखकर वैज्ञानिक खुश हैं और दूसरे फलों पर भी इसी तरह की शोध प्रक्रिया शुरू की जा रही है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे कई किस्म के पेड़ अलग-अलग लगाने से किसान बच पाएंगे. हालांकि, उत्पादन में कमी बड़ी चिंता बनी हुई है.
उत्तराखंड के देहरादून उद्यान विभाग के अनुसार उद्यान सर्किट हाउस में लंगड़ा आम के पेड़ में 42 किस्मों के आम उगाने में सफलता मिली है. पेड़ पर 42 किस्म के फल भी निकले हैं. इसे अनोखे रिकॉर्ड के रूप में देखा जा रहा है और कृषि बागवानी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. देहरादून के उद्यान सर्किट हाउस में एक ही आम के पेड़ पर 42 से अधिक अलग-अलग प्रजातियों के आम उगाए जा रहे हैं.
50 किस्में लगाई गईं पर 42 सफल हुईं
वरिष्ठ बागवानी निरीक्षक दीपक पुरोहित ने मीडिया को बताया कि साल 1910 में स्थापित इस ऐतिहासिक उद्यान में 5 साल पहले शुरू हुए जीर्णोद्धार कार्य के दौरान इस प्रयोग की कल्पना की गई थी. मूल रूप से लंगड़ा प्रजाति के इस पेड़ पर ग्राफ्टिंग तकनीक का इस्तेमाल कर 50 प्रजातियां लगाई गई थीं, जिनमें से 42 प्रजातियां पूरी तरह से सफल रहीं हैं.
कम जगह वाले और शौकीन लोगों के लिए कारगर
दीपक पुरोहित ने बताया कि यह तकनीक शहरी क्षेत्रों के उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है, जिनके पास जगह की कमी है और वे अपने छोटे से बगीचे में ही कई तरह के स्वादों का आनंद लेना चाहते हैं. लेकिन, खेती के लिए इस प्रयोग को किया जाना बाकी है. कृषि वैज्ञानिक अन्य फलों में कई किस्मों को उगाने की कोशिशों में शोध करने में जुटे हैं.
कम उत्पादन बना किसानों के लिए चुनौती
कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि एक ही पेड़ में कई किस्मों की वजह से उत्पादन में कमी देखने की चुनौतियां सामने आई हैं और इस तरह के पौधों को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किसानों को सौंपना चुनौती बना हुआ है. क्योंकि, एक किस्म वाले आम के पेड़ की तुलना में कई किस्म के फल उत्पादन करने वाले पेड़ कम उपज होने का खतरा ज्यादा है. ऐसे में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
आम के पेड़ से मिले कई किस्मों के फल (ऊपर). वरिष्ठ बागवानी निरीक्षक दीपक पुरोहित (नीचे).
लखनऊ में एक पेड़ में 234 किस्में मिल रहीं
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CISH) लखनऊ के रहमानखेड़ा में वैज्ञानिकों ने 50 साल पुराने एक पेड़ पर ग्राफ्टिंग करके 234 किस्मों के आम सफलतापूर्वक उगाए हैं. इस पेड़ पर अंबिका, दशहरी, बैंगन पल्ली और तोतापुरी जैसी किस्में मौजूद हैं. केंद्रीय कृषि मंत्री भी कुछ माह पहले इस पेड़ को देखने पहुंचे थे और इसे उपलब्धि बताया था.
क्या है ग्राफ्टिंग तकनीक
ग्राफ्टिंग तकनीक (Grafting Method) बागवानी और कृषि में उपयोग की जाने वाली एक लोकप्रिय विधि है, जिसमें दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों को कलम करके इस तरह से जोड़ा जाता है कि वे एक ही पौधे के रूप में विकसित होते है. यह तकनीक मुख्य रूप से फलों के पेड़ों, फूलों और सब्जियों में बेहतरीन गुणवत्ता पाने और पौधों को बीमारियों से बचाने के लिए की जाती है. हालांकि, इस तकनीक से उगाए गए पौधों की देखभाल और पोषक तत्वों की पूर्ति सामान्य पौधों की तुलना में अधिक करनी होती है.