DSR vs Nursery Method: धान की खेती में कौन-सी तकनीक किसानों को दे रही ज्यादा मुनाफा, जानें

Paddy Farming: धान की खेती में अब किसान पारंपरिक नर्सरी विधि के साथ-साथ DSR तकनीक भी अपना रहे हैं. DSR विधि में बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं, जिससे पानी और मजदूरी दोनों की बचत होती है. इस तकनीक से 15 से 25 प्रतिशत तक पानी बचाया जा सकता है और प्रति एकड़ 5 से 6 हजार रुपये तक लागत कम हो सकती है.

नोएडा | Updated On: 24 May, 2026 | 07:37 PM

DSR vs Nursery Method: धान भारत की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में इसकी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है. पहले किसान पारंपरिक नर्सरी विधि से धान की रोपाई करते थे, लेकिन अब खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इन्हीं में से एक तकनीक है डीएसआर (Direct Seeded Rice), जिसे किसान तेजी से अपना रहे हैं.

दोनों तरीकों के अपने फायदे और चुनौतियां हैं. ऐसे में किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि उनकी जमीन, पानी और श्रम उपलब्धता के अनुसार कौन-सी तकनीक ज्यादा लाभदायक साबित हो सकती है.

क्या होती है नर्सरी विधि?

नर्सरी विधि में किसान पहले खेत के एक छोटे हिस्से में धान की पौध तैयार करते हैं. करीब 20 से 30 दिन बाद इन पौधों को मुख्य खेत में रोप दिया जाता है. धान की खेती का यह पारंपरिक तरीका लंबे समय से किसानों के बीच इस्तेमाल होता आ रहा है. इस विधि में खेत की अच्छी और गहरी जुताई करनी पड़ती है. साथ ही खेत में पानी भरकर मजदूरों की मदद से धान की रोपाई की जाती है. जिन इलाकों में सिंचाई की बेहतर सुविधा होती है और मजदूर आसानी से मिल जाते हैं, वहां यह तरीका आज भी काफी असरदार माना जाता है.

क्या है DSR तकनीक?

डीएसआर यानी डायरेक्ट सीडेड राइस धान की खेती की एक नई और आधुनिक तकनीक है. इसमें धान की नर्सरी तैयार करने और बाद में पौध रोपाई करने की जरूरत नहीं पड़ती. किसान सीधे खेत में बीज की बुवाई कर देते हैं. इस तकनीक में सीड ड्रिल या सुपर सीडर मशीन की मदद से धान के बीज सीधे खेत में डाले जाते हैं. इससे खेती में लगने वाला समय और मेहनत दोनों कम हो जाते हैं. साथ ही मजदूरों पर निर्भरता भी घटती है. बदलते मौसम और बढ़ती मजदूरी लागत को देखते हुए DSR तकनीक अब किसानों के लिए एक अच्छा और सुविधाजनक विकल्प बनती जा रही है.

दोनों विधियों में क्या है मुख्य अंतर?

नर्सरी विधि और DSR तकनीक में सबसे बड़ा फर्क बुवाई के तरीके का होता है. नर्सरी विधि में पहले धान की पौध तैयार करनी पड़ती है और बाद में उसे खेत में रोपा जाता है. वहीं DSR तकनीक में बीज सीधे खेत में बो दिए जाते हैं.

पारंपरिक रोपाई वाली खेती में ज्यादा पानी की जरूरत होती है, जबकि DSR में तुलनात्मक रूप से कम पानी लगता है. इसके अलावा नर्सरी विधि में रोपाई के लिए ज्यादा मजदूरों की जरूरत पड़ती है, जिससे लागत बढ़ती है. वहीं DSR तकनीक में मेहनत कम लगती है और किसानों का खर्च भी काफी हद तक घट जाता है.

DSR विधि के बड़े फायदे

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, DSR तकनीक का सबसे बड़ा फायदा पानी की बचत है. इस तरीके से धान की खेती में करीब 15 से 25 प्रतिशत तक पानी कम लगता है. इससे सिंचाई का खर्च घटता है और किसानों को राहत मिलती है. इस तकनीक में पौध रोपाई नहीं करनी पड़ती, इसलिए मजदूरों पर होने वाला खर्च भी काफी कम हो जाता है. किसान समय पर बुवाई कर पाते हैं और फसल जल्दी तैयार होने की संभावना रहती है. इसका फायदा यह होता है कि अगली फसल लगाने के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि DSR तकनीक अपनाकर किसान एक एकड़ खेती में करीब 5 से 6 हजार रुपये तक की बचत कर सकते हैं.

बुवाई के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?

DSR विधि में सही नमी होना बेहद जरूरी है. हाइब्रिड धान के लिए लगभग 1 किलो बीज प्रति बीघा और रिसर्च किस्मों के लिए करीब 2 किलो बीज प्रति बीघा उपयोग करना चाहिए. सुपर सीडर मशीन से बुवाई करते समय लाइन से लाइन की दूरी 20 से 22 सेंटीमीटर रखनी चाहिए, जबकि बीज की गहराई लगभग 2 से 2.5 सेंटीमीटर होना बेहतर माना जाता है.

नर्सरी विधि के फायदे भी कम नहीं

हालांकि DSR तकनीक को आधुनिक और समय बचाने वाली विधि माना जा रहा है, लेकिन पारंपरिक नर्सरी विधि के भी अपने कई फायदे हैं. इस तरीके में खेत में खरपतवार यानी बेकार घास की समस्या अपेक्षाकृत कम रहती है और किसान पौधों की बढ़वार पर बेहतर नजर रख सकते हैं. जिन इलाकों में सिंचाई की अच्छी सुविधा होती है और मजदूर आसानी से मिल जाते हैं, वहां नर्सरी विधि आज भी अच्छी पैदावार देने में सक्षम मानी जाती है.

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जहां पानी की कमी हो या मजदूर कम मिलते हों, वहां DSR तकनीक किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है. वहीं जिन क्षेत्रों में पर्याप्त पानी और श्रमिक उपलब्ध हों, वहां पारंपरिक नर्सरी विधि भी बेहतर उत्पादन दे सकती है.

Published: 25 May, 2026 | 06:00 AM

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