गन्ना किसानों के लिए चिंता की खबर! अल नीनो के कारण घट सकती है पैदावार, चीनी सप्लाई पर भी असर संभव
El Nino 2026: अल नीनो के कारण इस साल मॉनसून कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर गन्ने की खेती और चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जुलाई-अगस्त में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो गन्ने की पैदावार घट सकती है.
Sugarcane Production India: देश में अल नीनो को लेकर चिंता बढ़ रही है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस साल मॉनसून कमजोर रहा, तो इसका असर गन्ने की खेती और चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है. गन्ना ऐसी फसल है जिसे अच्छी पैदावार के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. ऐसे में बारिश की कमी किसानों और चीनी उद्योग दोनों के लिए चुनौती बन सकती है.
गन्ना उत्पादन घटने की आशंका
ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) के सलाहकार जी.के. सूद ने बिजनेस लाइन को बताया कि, इस सीजन में देश का गन्ना उत्पादन 40 से 42 करोड़ टन के बीच रहने का अनुमान है. पिछले साल यह करीब 42 करोड़ टन था. हालांकि अगर जुलाई और अगस्त में बारिश उम्मीद से कम हुई, तो उत्पादन घटकर 39 करोड़ टन तक पहुंच सकता है. चीनी क्षेत्र के लिए 2 करोड़ टन उत्पादन की कमी भी बड़ी चुनौती साबित हो सकती है. इससे चीनी की उपलब्धता और बाजार पर असर पड़ सकता है.
महाराष्ट्र, कर्नाटक और यूपी पर नजर
देश के कुल गन्ना उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा महाराष्ट्र और कर्नाटक से आता है. राहत की बात यह है कि महाराष्ट्र के जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल जैसा है, जबकि कर्नाटक में हाल की बारिश से स्थिति बेहतर हुई है. वहीं उत्तर प्रदेश में भी जलाशयों की स्थिति दो साल पहले की तुलना में मजबूत बताई जा रही है. इससे जरूरत पड़ने पर किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकता है.
कमजोर मॉनसून के शुरुआती संकेत
स्काईमेट के मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक शुरुआती संकेत बताते हैं कि, 2026 में मॉनसून सामान्य से कमजोर रह सकता है. कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति भी बन सकती है. उनका कहना है कि, मौसमी बारिश लंबे समय के औसत से 90 प्रतिशत से नीचे रह सकती है. उन्होंने बताया कि, आमतौर पर अल नीनो का प्रभाव 9 से 12 महीने तक बना रहता है. हालांकि यह अगले साल मॉनसून से पहले कमजोर पड़ सकता है, लेकिन इसके बाद आने वाला ‘डीवॉल्विंग अल नीनो’ चरण भी बारिश पर नकारात्मक असर डाल सकता है.
सिंचाई सुविधाओं से मिली कुछ राहत
कृषि क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है. आर्कस पॉलिसी रिसर्च की संस्थापक श्वेता सैनी के अनुसार, देश में सुनिश्चित सिंचाई का दायरा 40 प्रतिशत से बढ़कर करीब 55 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इससे मौसम की मार का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है.
अन्य फसलें भी हो सकती हैं प्रभावित
अल नीनो का असर सिर्फ गन्ने तक सीमित नहीं रहेगा. मक्का समेत कई खरीफ और रबी फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं. इसके अलावा खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. फिलहाल किसानों, चीनी मिलों और बाजार की नजर आने वाले हफ्तों की बारिश पर टिकी है. अगर मॉनसून सामान्य रहा तो स्थिति संभल सकती है, लेकिन कमजोर बारिश गन्ना और चीनी उद्योग के लिए चिंता बढ़ा सकती है.