PMMSY योजना से युवक की बदली किस्मत, अब सालाना कमा रहे 13 लाख का शुद्ध मुनाफा

Success Story: बिहार के कैमूर जिले के बसंत कुमार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की मदद से मछली पालन में बड़ी सफलता हासिल की है. सरकारी अनुदान और आधुनिक तकनीक के जरिए उन्होंने अपना कारोबार बढ़ाया और आज लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. उनकी सफलता से गांव के कई लोगों को रोजगार और नई प्रेरणा मिली है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 27 May, 2026 | 01:59 PM

Success Story: बिहार के कैमूर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर बसंत कुमार ने मेहनत और सरकारी योजना की मदद से सफलता की नई मिसाल कायम की है. कभी सीमित संसाधनों और कम आय के कारण परेशान रहने वाले बसंत कुमार आज आधुनिक मत्स्य उद्यमी बन चुके हैं. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) से मिली आर्थिक सहायता और वैज्ञानिक तकनीक के इस्तेमाल ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी. आज वह हर साल लाखों रुपये का कारोबार कर रहे हैं और कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.

सरकारी योजना बनी सफलता की मजबूत नींव

कैमूर जिले के रामगढ़ प्रखंड के जमुना गांव निवासी बसंत कुमार ने वर्ष 2020-21 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत नए तालाब निर्माण  के लिए सहायता प्राप्त की. इसके बाद वर्ष 2024-25 में उन्हें मध्यम बायोफ्लॉक टैंक निर्माण के लिए भी सरकारी अनुदान मिला. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार बसंत कुमार को योजना के तहत लगभग 14 लाख रुपये की अनुदान सहायता दी गई. इसी मदद से उन्होंने आधुनिक तकनीकों के जरिए मछली पालन का व्यवसाय शुरू किया. सरकारी सहायता मिलने के बाद उन्होंने पारंपरिक तरीके छोड़कर वैज्ञानिक पद्धति अपनाई, जिससे उत्पादन और आमदनी दोनों में तेजी से बढ़ोतरी हुई.

वैज्ञानिक तकनीक से बदली किस्मत

बसंत कुमार ने IMC (इंडियन मेजर कार्प) और पंगासियस मछलियों  का वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन शुरू किया. उन्होंने तालाब और बायोफ्लॉक तकनीक का इस्तेमाल कर कम जगह में ज्यादा उत्पादन हासिल किया. बायोफ्लॉक तकनीक में पानी की गुणवत्ता को नियंत्रित रखते हुए कम लागत में अधिक मछली उत्पादन किया जाता है. इससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से मत्स्य पालन अब गांवों में भी तेजी से लाभदायक व्यवसाय बनता जा रहा है. बसंत कुमार की सफलता इसी बदलाव का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है.

लाखों का कारोबार और गांव में रोजगार

आज बसंत कुमार सालाना करीब 20 से 25 लाख रुपये का कारोबार कर रहे हैं. इसमें उन्हें 8 से 13 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो रहा है. सबसे खास बात ये है कि उन्होंने केवल खुद को आत्मनिर्भर  नहीं बनाया, बल्कि गांव के अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा किए हैं. वर्तमान में उनके मत्स्य व्यवसाय से स्थानीय स्तर पर 10 से 12 लोगों को रोजगार मिल रहा है. गांव के कई युवा अब उनकी सफलता से प्रेरित होकर मत्स्य पालन की ओर रुचि दिखा रहे हैं.

दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बने बसंत कुमार

बिहार सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है. बसंत कुमार की कहानी ये साबित करती है कि अगर सही योजना, मेहनत और आधुनिक तकनीक का साथ मिले तो गांव में रहकर भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. आज वह जिले के कई किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि मत्स्य पालन केवल पारंपरिक व्यवसाय नहीं, बल्कि आधुनिक दौर में कमाई और रोजगार का मजबूत जरिया बन सकता है.

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