अमृतसर में किसानों-मजदूरों का हल्लाबोल, भारत-अमेरिका ट्रेड डील का किया विरोध
पंजाब के अमृतसर में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बिजली और बीज बिल का विरोध किया. उन्होंने MSP की कानूनी गारंटी, किसान कर्जमाफी, 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन और पुराने श्रम कानून बहाल करने की मांग की. साथ ही निजीकरण और ठेका प्रथा खत्म करने की मांग भी उठाई.
Farmers Protest: पंजाब के अमृतसर में केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों ने जिलेभर में प्रदर्शन किया. बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी गिरफ्तारी देने के लिए डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर पहुंचे. बाद में उन्होंने जिला राजस्व अधिकारी (DRO) नवकीरत सिंह को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा. प्रदर्शनकारियों ने किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर तुरंत कदम उठाने की मांग की. उन्होंने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध करते हुए कहा कि अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों की भारतीय बाजार में एंट्री से किसानों और घरेलू कारोबार को नुकसान हो सकता है.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों ने बिजली बिल 2026 और बीज बिल 2026 को लागू करने का फैसला वापस लेने और मनरेगा के पुराने स्वरूप को बहाल करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने आंगनवाड़ी, आशा और मिड-डे मील कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की. इसके अलावा स्ट्रीट लाइट और सफाई कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी उठाई गई.
कर्जमाफी और पुराने श्रम कानून बहाल करने की मांग
उन्होंने ठेका प्रथा और निजीकरण खत्म करने के साथ कम से कम 26 हजार रुपये मासिक वेतन तय करने की मांग की. किसानों और मजदूरों की कर्जमाफी, पुराने श्रम कानूनों की बहाली और बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने की भी मांग की गई. प्रदर्शनकारियों ने चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग भी रखी. अटारी में जम्हूरी किसान सभा पंजाब, बॉर्डर एरिया संघर्ष कमेटी और भारतीय किसान सभा ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया. इसमें 30 से ज्यादा गांवों के किसान और मजदूर शामिल हुए.
भारत छोड़ो आंदोलन के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
प्रदर्शनकारियों ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के कार्यक्रम के तहत किसान आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया. किसान नेताओं बाबा अर्जुन सिंह, मुख्तार मुहावा, रतन सिंह रंधावा और बलविंदर झाबल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं किया.
निजीकरण के खिलाफ आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
किसान नेताओं ने कहा कि कर्जमाफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी जैसी मांगें पूरी करने के बजाय सरकार ऐसे व्यापार समझौतों की ओर बढ़ रही है, जिनसे भारतीय कृषि और छोटे उद्योगों को नुकसान हो सकता है. जिला स्तरीय प्रदर्शन में किसान और ट्रेड यूनियन नेताओं सुच्चा सिंह अजनाला, अमरजीत सिंह अंसल और जगतार सिंह करमपुरा ने भी हिस्सा लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों का निजीकरण बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है. नेताओं ने कहा कि किसान, मजदूर और समाज के दूसरे वर्ग इन नीतियों के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे.