गर्मी में मूली 45 दिनों में होगी तैयार, उत्पादन इतना कि मुनाफे से भर जाएगी जेब

गर्मी के दिनों में मूली को सलाद में खूब खाया जाता है. इस सीजन मूली की नई वैरायटी जो 45–55 दिन में तुड़ाई के योग्य हो जाती है, से किसान रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रहे हैं. गर्मियों में भी किसान मूली उगाकर मोटी कमाई कर पा रहे हैं.

किसान इंडिया डेस्क
नोएडा | Published: 15 May, 2026 | 01:28 PM

Radish Farming Tips: वैसे तो किसान कई सालों से खेती कर रहें है लेकिन मेहनत और मौसम की अनुकूलता जब साथ आती है, तो खेतों से निकलने वाली फसल उम्मीदों से कहीं ज्यादा लाभ दे जाती है. एक स्थानीय किसान के साथ भी इस बार ऐसा ही हुआ है. 20 सालों से सब्जी उत्पादन में लगे किसान को, मूली की नई वैरायटी ने इस सीजन उन्हें रिकॉर्ड तोड़ कमाई का मौका दिया है.

Mooli Ki Kheti: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस समय मूली की खेती किसानों के लिए बेहतर कमाई का जरिया बनी हुई है. मौसम की अनुकूलता, समय पर सिंचाई और बाजार में ठीक भाव मिलने के कारण मूली की खेती करने वाले किसान अच्छा फायदा ले रहे हैं. इसी कड़ी में एक स्थानीय किसान ने भी सितंबर के महीने में मूली की बुवाई इस उम्मीद से करते हैं, कि उत्पादन ठीक-ठाक मिल जाएगा लेकिन नतीजा उनकी उम्मीदों से कई गुना ज्यादा मिला.

मूली की नई वैरायटी

इस सीजन मूली की नई वैरायटी ने उन्हें रिकॉर्ड तोड़ कमाई का मौका दिया है. किसानों ने 3 बीघा खेत में मूली की बुवाई की थी. सितंबर में बोई गई मूली की फसल नवंबर से तुड़ाई के योग्य हो जाती है और दिसंबर तक लगातार उत्पादन जारी रहता है. पहली तुड़ाई में 5 क्विंटल मूली निकली, जबकि पूरी फसल से लगभग 60 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद है. मौजूदा समय में बाजार में मूली 12 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जिससे किसानों की आमदनी में खासा इजाफा हुआ है.

45–55 दिन में तुड़ाई के योग्य

गर्मियों में भी किसान मूली की खेती करते हैं और इस दौरान 45–55 दिन में तुड़ाई के योग्य हो जाती है. मौसम अनुकूल और सिंचाई सुविधा रहे तो फसल इससे भी पहले तैयार होने लगती है. सितंबर में बोई गई मूली की फसल नवंबर से तुड़ाई के योग्य हो जाती है और दिसंबर तक लगातार उत्पादन जारी रहता है.

क्या बताते है एक्सपर्ट्स-

  1. अच्छी पैदावार का मुख्य कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि, मूली की फसल के लिए नरम और भुरभुरी मिट्टी होनी चाहिए. सही मिट्टी में मूली की जड़ें आसानी से नीचे तक जाती हैं, जिससे मूली लंबी, मोटी और सफेद निकलती है.
  2.  सिंचाई पर विशेष ध्यान देते हुए उन्होंने बताया कि अधिक पानी देने से मूली फटने का खतरा रहता है, जबकि कम पानी विकास रोक देता है। इसलिए उन्होंने हल्की और नियमित सिंचाई की सलाह देते है, जिससे फसल मजबूत और सुरक्षित बनती है.
  3. मूली की फसल पर भी कीटों का प्रकोप होता है, जिनसे मूली की पत्तियां प्रभावित होती है. कीटों के प्रबंधन के लिए समय-समय पर जैविक और हल्की दवा का छिड़काव किया जाता है, जिससे पत्तियां सुरक्षित रहती हैं और फसल को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता.

कम लागत, ज्यादा मुनाफा

मूली कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल है. बीज, खाद और सिंचाई पर कम खर्च होने के कारण किसान साल में दो बार इसका उत्पादन कर लेते हैं. मौजूदा समय में बाजार में मूली 12 रुपये प्रति किलो के भाव में बिक रही है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ी है.

बाजार में ज्यादा डिमांड

बाजार में लगातार अच्छी मांग होने से किसानों की मूली को व्यापारी अच्छे दाम पर खरीद रहे हैं. स्थानीय किसान का कहना है कि इस बार मूली का साइज और वजन दोनों बेहद संतुलित निकले हैं, जिसके चलते बाजार में इसकी मांग बनी हुई है. उनके मुताबिक यह सीजन उनके लिए सबसे ज्यादा लाभदायक रही है और मूली की यह फसल पूरी तरह मुनाफे वाली साबित हुई है.

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