खाद आपूर्ति पर दिखने लगा जंग का असर, क्या खरीफ सीजन में बढ़ जाएगी उर्वरक की कीमत ?
पश्चिम एशिया संघर्ष का असर अब भारत की खेती पर दिखने लगा है. धान सीजन से पहले किसानों को खाद और डीजल की कमी की चिंता सता रही है. गैस सप्लाई घटने से यूरिया उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि रासायनिक खाद पर बढ़ती निर्भरता और सप्लाई बाधित होने से कृषि संकट गहरा सकता है.
Fertilizer Shortage: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत की खेती और खाद आपूर्ति पर भी दिखने लगा है. धान की बुवाई का सीजन 1 जून से शुरू होने वाला है, लेकिन इससे पहले किसानों को खाद की कमी और कीमत बढ़ने की चिंता सताने लगी है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक गैस समेत कच्चे माल के आयात में दिक्कत आने से देश में यूरिया उत्पादन प्रभावित हो सकता है. कई फैक्ट्रियों में गैस सप्लाई पहले ही 30 फीसदी तक घट चुकी है.
किसानों का कहना है कि खेती में पहले से मुनाफा कम हो रहा है और अगर समय पर खाद नहीं मिली तो उत्पादन और घट जाएगा, जिसका सीधा असर उनकी आमदनी और परिवार पर पड़ेगा. भारतीय किसान यूनियन (लक्खोवाल) के अध्यक्षए चएस लखोवाल ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा कि किसान पहले से ही डीजल की भारी कमी से जूझ रहे हैं. सप्लाई में रुकावट और घबराहट में ज्यादा खरीदारी के कारण यह समस्या बढ़ी है. इसका असर खेती के कामों पर पड़ रहा है, क्योंकि ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और डीजल से चलने वाले ट्यूबवेल चलाने में दिक्कत आ रही है. अब धान सीजन से पहले खाद की कमी की चिंता भी किसानों के सामने खड़ी हो गई है.
7 लाख टन से अधिक यूरिया की जरूरत
उन्होंने कहा कि किसान युद्ध खत्म होने की प्रार्थना कर रहे हैं. फिलहाल इसका बड़ा असर दिखाई नहीं दे रहा, लेकिन खरीफ सीजन की तैयारियां मई के आखिर से शुरू हो जाती हैं. ऐसे में अगर जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो किसानों को खाद और ईंधन की कमी का सीधा असर झेलना पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार केवल पंजाब में ही धान की खेती 31 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में होती है, जिसके लिए 7 लाख टन से अधिक यूरिया की जरूरत पड़ती है. ऐसे में खाद की कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है.
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किसान जरूरत से ज्यादा स्टोर कर रहे खाद
लुधियाना के बीजा गांव के किसान हरबीर सिंह ने कहा कि हालात को देखते हुए कई किसान घबराहट में जरूरत से ज्यादा खाद जमा करने लगे हैं, जबकि इसकी स्टोरेज अवधि भी सीमित होती है. उनका कहना है कि अगर खाद की कमी हुई तो इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा.
जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद का इस्तेमाल
विशेषज्ञों का कहना है कि धान की खेती में पहले से ही जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद का इस्तेमाल हो रहा है और अगर खाद की कमी बढ़ी तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के एक वैज्ञानिक ने कहा कि भारतीय खेती अभी भी काफी हद तक रासायनिक खादों पर निर्भर है. ऐसे में सप्लाई में थोड़ी भी रुकावट किसानों के बीच चिंता बढ़ा देती है.