खेत में कितना भी बढ़े पानी, धान की ये खास किस्में किसानों को दिला सकती हैं शानदार पैदावार

मॉनसून में जलभराव से परेशान किसानों के लिए धान की कुछ उन्नत किस्में राहत बन सकती हैं. ये किस्में अधिक पानी की स्थिति में भी बेहतर विकास करती हैं और फसल को नुकसान से बचाने में मदद करती हैं. सही समय पर नर्सरी और रोपाई अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा हासिल कर सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 5 Jun, 2026 | 10:51 PM

Flood Resistant Paddy : मॉनसून के दौरान जलभराव और बाढ़ की समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है. खासकर निचले क्षेत्रों में कई दिनों तक पानी जमा रहने से सामान्य धान की फसल खराब हो जाती है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे हालात को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कुछ विशेष धान किस्में किसानों के लिए राहत लेकर आई हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, इन उन्नत किस्मों में पानी के बढ़ते स्तर के साथ पौधों की लंबाई बढ़ाने की क्षमता होती है, जिससे फसल लंबे समय तक पानी में रहने के बावजूद सुरक्षित रह सकती है.

पानी के साथ बढ़ती है पौधों की लंबाई

जलभराव प्रभावित क्षेत्रों के लिए विकसित धान  की कई किस्में अत्यधिक पानी को सहन करने में सक्षम हैं. इन किस्मों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खेत में पानी का स्तर बढ़ने पर पौधे भी तेजी से अपनी लंबाई बढ़ा लेते हैं. इससे पौधों का ऊपरी हिस्सा पानी के ऊपर बना रहता है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती. यही कारण है कि लंबे समय तक पानी भरे रहने के बावजूद फसल का विकास जारी रहता है और उत्पादन पर अधिक असर नहीं पड़ता.

समय पर नर्सरी तैयार करना है जरूरी

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में सफल खेती के लिए समय पर नर्सरी तैयार करना बेहद महत्वपूर्ण है. यदि पौधे पहले से मजबूत और विकसित अवस्था में होंगे, तो वे बाढ़ या भारी बारिश का बेहतर तरीके से सामना कर सकेंगे. समय पर नर्सरी डालने से पौधों को शुरुआती विकास के लिए अनुकूल वातावरण मिलता है, जिससे उनकी जड़ें और तना मजबूत बनते हैं. मजबूत पौधे बाद में अधिक पानी की स्थिति में भी जीवित रहकर बेहतर उत्पादन देने में सक्षम होते हैं.

रोपाई के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

धान की रोपाई  करते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाना जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार, पौधों का ऊपरी हिस्सा पानी के स्तर से कम से कम 2 से 4 इंच ऊपर रहना चाहिए. बहुत छोटी पौध को गहरे पानी वाले खेत में लगाने से फसल के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. रोपाई के शुरुआती दिनों में पौधों का पूरी तरह पानी में डूबना नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए खेत की स्थिति के अनुसार उचित ऊंचाई वाले पौधों का चयन करना चाहिए. सही किस्म, समय पर नर्सरी और वैज्ञानिक तरीके से रोपाई अपनाकर किसान जलभराव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी धान की अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं तथा आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं.

Published: 6 Jun, 2026 | 06:45 AM

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