जीनोम एडिटेड फसलों से बढ़ रहा उत्पादन, लागत में कमी आने से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार

Genome edited crops impact on farming: ICAR-IARI (दिल्ली) और ICAR-IIRR (हैदराबाद) के वैज्ञानिकों के जरिए विकसित जीनोम-एडिटेड धान की किस्में. इन नई धान किस्मों को जल दक्षता के लिए विकसित किया गया है, जिससे किसान कम सिंचाई में अधिक उत्पादन कर सकते हैं. यह पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे धान उत्पादक क्षेत्रों में जल संकट और जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान करता है.

नोएडा | Published: 30 Mar, 2026 | 05:33 PM

How Genome Technology Helps Agriculture: ऐसे दौर में जब जलवायु अनिश्चितता के साथ ही घटते प्राकृतिक संसाधन और बढ़ती आबादी को भोजन उपलब्ध कराने की चुनौती हमारे सामने है. भारतीय कृषि एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है. भारत को न केवल अधिक खाद्य उत्पादन करना है, बल्कि इसे टिकाऊ तरीके से करना होगा. ऐसे में फसलों की जीनोम एडिटेड किस्में बड़ी निर्णायक भूमिका निभाने वाली हैं. क्योंकि यह किस्में कम पानी और कम समय में अधिक उत्पादन देने के साथ ही हर मौसम को झेलने में सक्षम हैं. इसके चलते किसानों को भी आर्थिक कामयाबी हासिल हो पा रही है.

जीनोमिक्स क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

कृषि क्षेत्र में बायोटेक सॉल्यूशन और डाटा रिसर्च करने वाली कंपनी स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज के NGS एप्लिकेशंस के एसोसिएट डायरेक्टर श्रीकांति आर ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आबादी की चुनौतियों का सामना करने के लिए उभरते सबसे प्रभावशाली उपकरणों में से एक है जीनोमिक्स. यह विज्ञान हर जीवित प्राणी के डीएनए को समझने और उसकी व्याख्या करने पर केंद्रित है. जीनोमिक्स शोधकर्ताओं को डीएनए में मौजूद संपूर्ण आनुवंशिक निर्देशों का विश्लेषण करने में सक्षम बनाता है.

उन्होंने बताया कि फसलों और पशुधन के संदर्भ में इसका मतलब है कि वैज्ञानिक उन जीन की पहचान कर सकते हैं जो सूखा सहनशीलता, पोषक तत्वों के कुशल उपयोग, कीट प्रतिरोध या बेहतर पोषण जैसे गुणों के लिए जिम्मेदार होते हैं. इस जानकारी का इस्तेमाल पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सटीक और तेजी से बेहतर किस्मों के विकास के लिए किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि जीनोमिक्स की शक्ति के इस्तेमाल से भारत का कृषि क्षेत्र एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहां उन्नत बीज, मजबूत फसलें और सटीक प्रजनन तकनीकें खेती के भविष्य को नया आकार दे रही हैं.

ICAR दिल्ली और हैदराबाद ने धान की जीनोम एडिटेड किस्में विकसित कीं

भारतीय कृषि में जीनोमिक्स की परिवर्तनकारी क्षमता का एक सटीक उदाहरण है ICAR-IARI (दिल्ली) और ICAR-IIRR (हैदराबाद) के वैज्ञानिकों के जरिए विकसित जीनोम-एडिटेड धान की किस्में. इन नई धान किस्मों को जल दक्षता के लिए विकसित किया गया है, जिससे किसान कम सिंचाई में अधिक उत्पादन कर सकते हैं. यह पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे धान उत्पादक क्षेत्रों में जल संकट और जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान करता है.

अरहर और अमरूद की किस्में विकसित की जा रहीं

इसी तरह इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) ने गर्मी सहन करने वाली अरहर (तूर) की किस्मों पर शोध किया है, जिन्हें अब पारंपरिक मानसून के बाहर भी उगाया जा सकता है. इससे सालभर खेती संभव होती है. किसानों की आय बढ़ती है और भारत की दाल आयात पर निर्भरता कम होती है. एक अन्य महत्वपूर्ण प्रयास के तहत पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में अमरूद की नई किस्मों के विकास में जीनोमिक टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे फल की क्वालिटी, शेल्फ लाइफ और पोषण में सुधार हो रहा है. इसका लाभ किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को मिलेगा.

जीनोमिक्स तकनीक से सटीक रिजल्ट मिलने में मदद

जीनोमिक्स तकनीक के जरिए फसलों को इस तरह विकसित किया जा सकता है कि वे पानी और पोषक तत्वों का अधिक कुशलता से उपयोग करें, जिससे रासायनिक उर्वरकों और सिंचाई की जरूरत कम हो. जब जीनोमिक्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग के साथ जोड़ा जाता है तो इसकी क्षमता और बढ़ जाती है. उन्नत विश्लेषण तकनीकें जीनोमिक डेटा को वास्तविक परिस्थितियों और पर्यावरणीय फैक्टर्स से जोड़कर यह अनुमान लगा सकती हैं कि कौन सी फसल किस परिस्थिति में बेहतर प्रदर्शन करेगी, जिससे प्रजनन प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक हो जाती है.

भारतीय किसानों के लिए लाभकारी है ये तकनीक

भारत का हर किसान अनिश्चितताओं से परिचित है. चाहे वह अनियमित मानसून हो, अत्यधिक गर्मी हो या कीटों का प्रकोप. जीनोमिक्स इन चुनौतियों के प्रति फसलों और पशुधन को पहले से ही सक्षम बनाता है. इससे संकट आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय किसान ऐसी किस्में उगा सकते हैं जो पहले से ही इन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार हों.

ये लाभ केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं. राष्ट्रीय नवाचार जलवायु-सहनशील कृषि (NICRA) जैसे कार्यक्रमों के परिणाम पहले ही भारत के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में लागू किए जा रहे हैं और स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय नीतियों तक इसका प्रभाव बढ़ रहा है.

जीनोम तकनीक खेती के विकास के लिए शक्तिशाली साधन

श्रीकांति आर ने कहा कि जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMOs) और जीनोम एडिटिंग को लेकर सार्वजनिक धारणा अलग-अलग हो सकती है. भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह नवाचार और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखा जाए. साथ ही सख्त सुरक्षा और नैतिक मानकों को नियामक ढांचे में शामिल करें. भारतीय कृषि का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हम वैज्ञानिक प्रगति को किसानों के अनुभव के साथ कैसे जोड़ते हैं, छोटे किसानों तक इसकी पहुंच कैसे सुनिश्चित करते हैं और इन नवाचारों को जिम्मेदारी से कैसे लागू करते हैं. जीनोमिक्स कोई जादुई समाधान नहीं है, लेकिन यह एक शक्तिशाली साधन है जो भारत को एक हरित और सतत कृषि भविष्य की ओर ले जा सकता है.

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