जैविक खेती करने वाले किसानों को 46,500 रुपये प्रति हेक्टेयर देगी सरकार, अमित शाह ने बताया प्लान

केंद्र सरकार सहकारी मॉडल के जरिए जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है. परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) और MOVCDNER के तहत किसानों को 3 वर्षों में 31,500 रुपये से 46,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की सहायता मिलेगी. उत्पादन, सर्टिफिकेशन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग तक सरकार पूरा सहयोग देगी.

नोएडा | Updated On: 7 Aug, 2026 | 11:30 AM

Organic Farming: देश में रासायनिक खेती पर बढ़ती लागत और प्राकृतिक खेती की बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार अब जैविक खेती को नई रफ्तार देने की तैयारी में है. सरकार का फोकस केवल जैविक उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को खेती से लेकर उत्पाद बेचने तक पूरी मदद देने पर है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार सहकारी मॉडल के जरिए जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है, ताकि किसानों को बेहतर बाजार, कम लागत और अधिक आय का लाभ मिल सके. इसके लिए परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) और मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन (MOVCDNER) के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जा रही है.

जैविक खेती के लिए सरकार दे रही सीधी आर्थिक मदद

अमित शाह (Amit Shah) ने बताया कि परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत किसानों को तीन वर्षों में 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाती है. इसमें 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है. इस राशि का उपयोग किसान जैविक खेती  के लिए जरूरी खाद, जैविक इनपुट और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में कर सकते हैं. सरकार का उद्देश्य किसानों की लागत कम करना और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाना है.

पूर्वोत्तर के किसानों को मिलेगा 46,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक का लाभ

पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू  चेन डेवलपमेंट (MOVCDNER) योजना चलाई जा रही है. इसके तहत किसानों को तीन वर्षों में 46,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की सहायता दी जाती है. योजना के अंतर्गत 32,500 रुपये प्रति हेक्टेयर जैविक इनपुट के लिए दिए जाते हैं, जिनमें 15,000 रुपये DBT के माध्यम से सीधे किसानों के खाते में भेजे जाते हैं. इसके अलावा किसान उत्पादक संगठन (FPO) का गठन, जैविक उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग को भी बढ़ावा दिया जाता है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके.

सहकारी मॉडल से बढ़ेगी आय, बनेगी मजबूत सप्लाई चेन

सरकार इन योजनाओं के तहत जैविक खेती  के क्लस्टर विकसित कर रही है, जहां छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाती है. इससे किसान समूह बनाकर खेती कर सकेंगे, उत्पादन लागत कम होगी और बाजार तक पहुंच आसान बनेगी. साथ ही मजबूत सप्लाई चेन तैयार होने से जैविक उत्पादों की बिक्री और निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी. केंद्र सरकार का मानना है कि सहकारी मॉडल पर आधारित जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी. यही वजह है कि सरकार उत्पादन से लेकर सर्टिफिकेशन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग तक किसानों को हर स्तर पर सहयोग देने की रणनीति पर काम कर रही है.

Published: 7 Aug, 2026 | 11:29 AM

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