गुजरात में चीकू उत्पादन घटा, 10 साल में 25 फीसदी गिरावट, जानें क्यों तेजी से कम हुई खेती
गुजरात के कई जिलों में चीकू की खेती घट रही है, लेकिन सबसे ज्यादा असर सूरत जिले में देखने को मिला है. सूरत पहले चीकू उत्पादन के मामले में अग्रणी जिलों में शामिल था, लेकिन अब यहां हालात काफी बदल चुके हैं. साल 2015-16 में सूरत में चीकू की खेती का क्षेत्रफल करीब 2,150 हेक्टेयर था, जो अब घटकर 892 हेक्टेयर रह गया है.
Gujarat chikoo production: गुजरात, जिसे देश में चीकू उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है, वहां पिछले कुछ वर्षों में इस फसल की स्थिति चिंताजनक हो गई है. बीते एक दशक में चीकू की खेती और उत्पादन दोनों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है. बागवानी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में चीकू उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि खेती के क्षेत्रफल में करीब 16.7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है. यह गिरावट ऐसे समय में सामने आई है जब चीकू को राज्य की प्रमुख बागवानी फसलों में गिना जाता है.
उत्पादन और क्षेत्रफल दोनों में आई गिरावट
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, अगर पिछले दस वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति और स्पष्ट हो जाती है. वर्ष 2015-16 में गुजरात में चीकू का कुल उत्पादन लगभग 3.25 लाख टन था, जो अब घटकर 2024-25 में करीब 2.40 लाख टन रह गया है. इसी तरह, खेती के क्षेत्र में भी कमी आई है. पहले जहां चीकू की खेती करीब 29,562 हेक्टेयर में होती थी, वहीं अब यह घटकर 24,622 हेक्टेयर तक सीमित हो गई है. इन आंकड़ों से साफ है कि किसान धीरे-धीरे इस फसल से दूरी बना रहे हैं, जो भविष्य में और बड़ी समस्या बन सकती है.
सूरत में सबसे ज्यादा असर
गुजरात के कई जिलों में चीकू की खेती घट रही है, लेकिन सबसे ज्यादा असर सूरत जिले में देखने को मिला है. सूरत पहले चीकू उत्पादन के मामले में अग्रणी जिलों में शामिल था, लेकिन अब यहां हालात काफी बदल चुके हैं. साल 2015-16 में सूरत में चीकू की खेती का क्षेत्रफल करीब 2,150 हेक्टेयर था, जो अब घटकर 892 हेक्टेयर रह गया है. यानी यहां करीब 58.5 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है. यह गिरावट इस बात का संकेत है कि किसान अब चीकू की खेती से हटकर दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं.
अन्य जिलों में भी गिरावट
सिर्फ सूरत ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों में भी चीकू उत्पादन में कमी आई है. भावनगर में लगभग 42.3 प्रतिशत और वलसाड में करीब 20.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इन जिलों में भी पहले चीकू की खेती बड़े स्तर पर होती थी, लेकिन अब धीरे-धीरे यह कम होती जा रही है.
नवसारी बना हुआ है मजबूत केंद्र
हालांकि पूरे राज्य में गिरावट देखने को मिल रही है, लेकिन दक्षिण गुजरात का नवसारी जिला अभी भी चीकू उत्पादन का मजबूत केंद्र बना हुआ है. नवसारी में करीब 8,052 हेक्टेयर क्षेत्र में चीकू की खेती की जा रही है और यहां पिछले एक दशक में लगभग 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी देखी गई है. यही कारण है कि गिरावट के बावजूद गुजरात अभी भी देश में चीकू उत्पादन के मामले में दूसरे स्थान पर बना हुआ है.
फिर भी गुजरात की स्थिति मजबूत
चीकू उत्पादन में गिरावट के बावजूद गुजरात अभी भी इस फसल के मामले में एक बड़ा राज्य है. राज्य में अभी भी 25,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में चीकू की खेती हो रही है और साल 2024-25 में लगभग 2.40 लाख टन उत्पादन दर्ज किया गया है. यह दिखाता है कि अगर सही नीतियां और समर्थन मिले, तो इस फसल को फिर से मजबूत किया जा सकता है.
गिरावट के पीछे क्या हो सकते हैं कारण?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं. बदलता मौसम, पानी की कमी, बढ़ती लागत और बाजार में सही दाम न मिलना जैसे कारण किसानों को चीकू की खेती से दूर कर रहे हैं. इसके अलावा, कुछ किसान ज्यादा लाभ देने वाली अन्य फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं, जिससे चीकू का रकबा कम हो रहा है.
किसानों के लिए चुनौती और अवसर
चीकू की खेती में आई यह गिरावट किसानों के लिए चिंता का विषय है, लेकिन इसे सुधारने का अवसर भी है. अगर सरकार और कृषि विभाग इस दिशा में काम करें, बेहतर तकनीक और बाजार सुविधा उपलब्ध कराएं, तो इस फसल को फिर से बढ़ावा दिया जा सकता है. नवसारी जैसे क्षेत्रों का उदाहरण दिखाता है कि सही प्रबंधन और समर्थन मिलने पर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.