Haryana Agriculture News: हरियाणा के करनाल जिले में धान घोटाले से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. कहा जा रहा है कि पिछले खरीफ सीजन के दौरान जिले में फर्जी धान खरीद मामले में शामिल पाए जाने पर पांच अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है. ये कार्रवाई नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक (DG) ने विभाग ने की है. इन अधिकारियों के खिलाफ पहले ही अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी थीं और जांच के दौरान उन्हें सस्पेंड भी किया गया था. बर्खास्त किए गए अधिकारियों में इंस्पेक्टर समीर वशिष्ठ, लोकेश, संदीप शर्मा और यशबीर के साथ सब-इंस्पेक्टर रामफल शामिल हैं. जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) मुकेश कुमार ने इसकी पुष्टि की है.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, बर्खास्तगी पत्र में विभाग ने धान खरीद सीजन के दौरान सामने आई कई गड़बड़ियों को कार्रवाई की वजह बताया है. साल 2025-26 के धान खरीद सीजन में इन अनियमितताओं को लेकर अखबार में लगातार खबरें प्रकाशित हुई थीं, जिसके बाद करनाल पुलिस ने छह एफआईआर दर्ज कीं. जांच में राइस मिलों में स्टॉक की कमी, बाहर के IP एड्रेस से फर्जी गेट पास जारी होने, रिकॉर्ड में धान खरीद दिखाने के बावजूद असल में धान न पहुंचने और बिना रिकॉर्ड व घटिया गुणवत्ता वाले चावल मिलने जैसे मामले सामने आए. इन मामलों की जांच के लिए करनाल के एसपी ने एक विशेष जांच टीम (SIT) भी बनाई थी.
जीपीएस लोकेशन हिस्ट्री की विस्तार से जांच
एसआईटी ने जांच के दौरान गेट पास रिकॉर्ड, सभी मंडियों की सीसीटीवी फुटेज और धान उठान में इस्तेमाल हुए वाहनों की जीपीएस लोकेशन हिस्ट्री की विस्तार से जांच की. टीम ने ई-खरीद पोर्टल के डेटा को भी खंगाला और खरीद के ऑनलाइन रिकॉर्ड का भौतिक रिकॉर्ड से मिलान किया. जांच में मिले सबूतों के आधार पर अब तक 40 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है या उनसे पूछताछ की जा रही है.
12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
गिरफ्तार किए गए लोगों में अलग-अलग मार्केट कमेटियों के चार सचिव, एक पूर्व जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC), खरीद एजेंसियों और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एचएसएएमबी) से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं. इसके अलावा आढ़ती, राइस मिलर और कुछ निजी लोग भी जांच के दायरे में आए हैं. करनाल पुलिस ने तरावड़ी और इंद्री अनाज मंडियों से जुड़े दो मामलों में अब तक 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. पुलिस ने चार्जशीट में इस पूरे मामले को अधिकारियों और राइस मिलरों की मिलीभगत बताया है, जिन्होंने खरीद रिकॉर्ड में हेराफेरी कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक बाकी आरोपियों के खिलाफ भी चार्जशीट तैयार की जा रही है और जल्द ही अदालत में पेश की जाएगी.