हरियाणा के गेहूं किसानों को MSP का बड़ा फायदा! 5 साल में लाभार्थी दोगुने, संख्या 6 लाख पार
हरियाणा में MSP पर गेहूं बेचने वाले किसानों की संख्या पांच साल में करीब दोगुनी होकर 6.04 लाख पहुंच गई है. 2022-23 में यह संख्या 3.14 लाख थी. 2026-27 में किसानों को MSP के तहत 20,992 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ. लाभार्थियों की संख्या बढ़ने में अनिवार्य ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की भी अहम भूमिका बताई जा रही है.
हरियाणा में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचने वाले किसानों की संख्या पिछले पांच साल में करीब दोगुनी हो गई है. 2022-23 में जहां 3.14 लाख किसानों ने MSP का लाभ लिया था, वहीं 2026-27 में यह संख्या बढ़कर 6.04 लाख हो गई. यानी पांच साल में MSP लाभ पाने वाले किसानों की संख्या में करीब 93 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
दरअसल, राज्यसभा में मंगलवार को पेश रिपोर्ट के मुताबिक, MSP के तहत गेहूं खरीद से होने वाला भुगतान भी इस दौरान दोगुने से ज्यादा बढ़ा है. 2022-23 में किसानों को 8,434 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, जो 2026-27 में बढ़कर 20,992 करोड़ रुपये हो गया. खास बात यह है कि MSP का लाभ पाने वाले गेहूं किसानों की संख्या के मामले में हरियाणा देश में तीसरे स्थान पर है. जबकि, मध्य प्रदेश में 13.42 लाख और पंजाब में 8.14 लाख किसानों को MSP का लाभ मिला.
हरियाणा में 6.04 लाख किसानों ने बेचा गेहूं
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 2026-27 के खरीद सीजन में हुई. 2025-26 में हरियाणा के 4.49 लाख किसानों ने MSP पर गेहूं बेचा था, जो इस साल बढ़कर 6.04 लाख हो गया. पांच साल में यह सबसे अधिक संख्या है. इससे राज्य में गेहूं खरीद और MSP व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. वहीं, हरियाणा में MSP पर गेहूं बेचने वाले किसानों की संख्या बढ़ने के पीछे राज्य सरकार का अनिवार्य ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी एक बड़ी वजह है. कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, किसान ई-खरीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराए बिना MSP पर अपनी फसल नहीं बेच सकते. इसके लिए किसानों को ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर भी पंजीकरण कराना जरूरी है.
MSP भुगतान 4 साल में बढ़कर 14,825 करोड़ हुआ
अधिकारियों के मुताबिक, MSP का लाभ लेने के लिए अब लगभग सभी किसान रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं. इससे MSP लाभार्थियों की संख्या बढ़ी है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि असली किसान का रजिस्ट्रेशन फर्जी खरीद से नहीं जोड़ा जा सकता, क्योंकि ई-खरीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए जमीन का रिकॉर्ड देना अनिवार्य है. यह सफाई ऐसे समय आई है जब पिछले खरीफ और रबी सीजन में राज्य में फर्जी खरीद के आरोप भी लगे थे. आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 में MSP के तहत किसानों को 10,843 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर 14,825 करोड़ रुपये हो गया. अधिकारियों के अनुसार, MSP में बढ़ोतरी और बेहतर पैदावार से भुगतान की राशि बढ़ी है.
104 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी
बता दें कि इस साल मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 104 लाख मीट्रिक टन यानी 1.04 करोड़ टन से ज्यादा गेहूं खरीदा गया है. इस रिकॉर्ड खरीद से देश का केंद्रीय गेहूं भंडार भी मजबूत हुआ है. गेहूं खरीद में पंजाब के बाद मध्य प्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा योगदान देने वाला राज्य बन है. किसानों की अच्छी पैदावार, सरकारी योजनाओं और प्रभावी खरीद व्यवस्था से राज्य में गेहूं की रिकॉर्ड खरीद संभव हुई है.