बागवानी क्षेत्र में नई ऊंचाई पर पहुंचेगा भारत, जानिए कितना बढ़ जाएगा उत्पादन

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जारी वर्ष 2025-26 के द्वितीय अग्रिम अनुमानों के अनुसार देश में बागवानी उत्पादन 3777.76 लाख टन रहने का अनुमान है. यह पिछले साल की तुलना में 70.39 लाख टन अधिक है. फल, सब्जियां, फूल और औषधीय एवं सुगंधित पौधों के उत्पादन में वृद्धि दर्ज होने की संभावना जताई गई है.

नोएडा | Published: 11 Jun, 2026 | 10:13 PM

देश में बागवानी क्षेत्र लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जारी वर्ष 2025-26 के द्वितीय अग्रिम अनुमानों (Second Advance Estimates of Horticultural Crop) के अनुसार, विभिन्न बागवानी फसलों का कुल उत्पादन 3777.76 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है. यह वर्ष 2024-25 के अंतिम अनुमान 3707.38 लाख टन की तुलना में 70.39 लाख टन या 1.90 प्रतिशत ज्यादा है.

आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में बागवानी फसलों का कुल क्षेत्रफल 301.51 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 301.36 लाख हेक्टेयर की तुलना में 0.14 लाख हेक्टेयर अधिक है. उत्पादन वृद्धि में फलों, सब्जियों, फूलों तथा सुगंधित एवं औषधीय पौधों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. यानी बागवानी का रकबा और उत्पादन दोनों में बढ़त है.

कितना बढ़ेगा फलों का उत्पादन

फलों के उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2024-25 में 1176.49 लाख टन फल उत्पादन के मुकाबले 2025-26 में यह बढ़कर 1214.75 लाख टन पहुंचने का अनुमान है. यानी फलों के उत्पादन में 38.26 लाख टन या 3.25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है. विभाग के अनुसार केला, आम, पपीता, सेब और अमरूद के बेहतर उत्पादन ने इस वृद्धि में प्रमुख योगदान दिया है.

सब्जियों में कैसी होंगी संभावनाएं

सब्जियों की खेती के तहत क्षेत्रफल 117.91 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 118.79 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है. वहीं सब्जियों का उत्पादन 2177.97 लाख टन से बढ़कर 2210 लाख टन तक पहुंच सकता है. यह 32.04 लाख टन या 1.47 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. आलू, टमाटर, भिंडी, मटर, फूलगोभी और लौकी के उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है.

प्याज का रकबा बढ़ेगा, उत्पादन नहीं

प्याज के मामले में खेती का रकबा बढ़ने के बावजूद उत्पादन लगभग स्थिर रहने का अनुमान है. साल 2024-25 के 19.68 लाख हेक्टेयर की तुलना में 2025-26 में प्याज का क्षेत्रफल 20.14 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जो 2.31 प्रतिशत अधिक है. हालांकि उत्पादन 307.67 लाख टन से मामूली घटकर 307.37 लाख टन रह सकता है.

आलू और फूलों में भी होगी बढ़त

आलू का उत्पादन 585.71 लाख टन से बढ़कर 598.89 लाख टन पहुंचने का अनुमान है, जबकि टमाटर का उत्पादन 205.99 लाख टन से बढ़कर 214.61 लाख टन हो सकता है. इसी तरह सुगंधित एवं औषधीय पौधों का उत्पादन 9.01 लाख टन से बढ़कर 9.76 लाख टन रहने की संभावना है.

फूलों की खेती भी विस्तार की ओर बढ़ रही है. वर्ष 2025-26 में फूलों का क्षेत्रफल 4 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि उत्पादन 42.65 लाख टन से बढ़कर 45.84 लाख टन हो सकता है. यह लगभग 7.47 प्रतिशत की वृद्धि होगी.

रोपण फसलों के अंतर्गत क्षेत्रफल 46.56 लाख हेक्टेयर तथा उत्पादन 169.34 लाख टन रहने का अनुमान है. वहीं कृषि सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन निदेशालय (DASD) के आंकड़ों के अनुसार मसालों का क्षेत्रफल 50 लाख हेक्टेयर तक पहुंच सकता है और उनका उत्पादन 126.55 लाख टन रहने की संभावना है. लहसुन, हल्दी, करी पत्ता और मेथी के उत्पादन में विशेष बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है.

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बागवानी क्षेत्र भारतीय कृषि विकास का एक प्रमुख आधार बनता जा रहा है. उत्पादन में लगातार वृद्धि न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है, बल्कि देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करेगी.

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