Tip Of The Day: सिर्फ 1 साल में फल देगा शहतूत का पौधा! जानें ग्राफ्टिंग से तैयार करने का आसान तरीका
Shahtoot Ki Kheti: शहतूत का पौधा बागवानी के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसके फलों की बाजार में अच्छी मांग रहती है. ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार किया गया शहतूत का पौधा तेजी से बढ़ता है और सामान्य पौधों की तुलना में काफी जल्दी फल देना शुरू कर देता है. सही तरीके से पौधा तैयार करने और उसकी देखभाल करने पर यह कम समय में अच्छा उत्पादन दे सकता है.
Shahtoot Ki Kheti: खेती और बागवानी में शहतूत का पौधा धीरे-धीरे एक लोकप्रिय विकल्प बनता जा रहा है. यह पौधा न केवल छाया प्रदान करता है बल्कि इसके स्वादिष्ट और पौष्टिक फलों की बाजार में अच्छी मांग भी रहती है. सही तकनीक से पौधा तैयार किया जाए तो यह कम समय में फल देना शुरू कर देता है. यही कारण है कि बागवानी करने वाले लोग इसे अपने बगीचों और खेतों में लगाने लगे हैं.
कृषि वैज्ञानिक डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक (बागवानी) के अनुसार, शहतूत के पौधे की खास बात यह है कि इसे ग्राफ्टिंग तकनीक के माध्यम से जल्दी तैयार किया जा सकता है, जिससे पौधा तेजी से बढ़ता है और जल्दी उत्पादन देने लगता है.
शहतूत का पौधा तैयार करने का तरीका
शहतूत का पौधा तैयार करने के लिए सबसे पहले देशी पौधे की एक मजबूत और स्वस्थ टहनी का चयन किया जाता है. इस टहनी को काटकर पॉलीथीन बैग में लगाया जाता है, ताकि उसमें जड़ें विकसित हो सकें. अगर चाहें तो इस टहनी को सीधे जमीन में भी लगाया जा सकता है.
- किसानों के लिए अलर्ट! आम में मंजर आते ही भूलकर भी न करें ये गलती, वरना घट जाएगी पैदावार
- पौधों में बोरॉन की कमी बन सकती है बड़ा खतरा! समय रहते नहीं संभले तो घट जाएगी पैदावार, एक्सपर्ट से जानें टिप्स
- बकरी पालने वालों के लिए बड़ी चेतावनी! 24 घंटे में बकरियों की जान ले सकती हैं ये बीमारियां, एक्सपर्ट से जानें बचाव
पौधा लगाने के बाद उसकी अच्छी देखभाल करना जरूरी होता है. सही नमी और पोषण मिलने पर पौधा धीरे-धीरे मजबूत होने लगता है और आगे की प्रक्रिया के लिए तैयार हो जाता है.
ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार होता है बेहतर पौधा
शहतूत के पौधे को जल्दी फल देने योग्य बनाने के लिए ग्राफ्टिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है. इस प्रक्रिया में किसी अच्छे और ज्यादा फल देने वाले पौधे की टहनी ली जाती है और उसे लगभग चार इंच तक काटा जाता है. इसके बाद इस टहनी को देशी पौधे के ऊपर लगाकर ग्राफ्टिंग की जाती है. टहनी को मजबूती से जोड़ने के लिए पॉलीथीन या टेप की मदद से अच्छी तरह बांध दिया जाता है.
ग्राफ्टिंग के बाद तेजी से होती है वृद्धि
अगर ग्राफ्टिंग सही तरीके से की जाए तो लगभग सात से आठ दिनों के भीतर पौधे में नई कोंपलें निकलने लगती हैं. जैसे-जैसे पौधा बढ़ता है, वह धीरे-धीरे मजबूत होता जाता है. जब पौधा करीब डेढ़ फीट तक बढ़ जाता है, तब उसे स्थायी स्थान या बगीचे में लगा दिया जाता है. इस तकनीक से तैयार पौधा तेजी से बढ़ता है और कुछ ही समय में अच्छी ऊंचाई हासिल कर लेता है. सामान्य परिस्थितियों में पौधा लगभग सात से आठ फीट तक बढ़ सकता है.
जल्दी फल देने की खासियत
शहतूत के पौधे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार पौधा जल्दी फल देना शुरू कर देता है. सामान्य तरीके से लगाए गए पौधों को फल देने में लगभग चार साल का समय लग सकता है, जबकि ग्राफ्टिंग से तैयार पौधा करीब एक साल में ही फल देने लगता है.
बाजार में अच्छी रहती है मांग
शहतूत के फलों की बाजार में अच्छी मांग देखी जाती है. आमतौर पर इसका सीजन शुरू होने पर बाजारों में इसकी अच्छी बिक्री होती है. फलों का मूल्य सामान्यतः 40 से 55 रुपये प्रति किलो तक मिल सकता है, जिससे अच्छी आमदनी की संभावना रहती है. एक स्वस्थ और मजबूत पौधा साल भर में लगभग पांच हजार रुपये तक के फल दे सकता है. यही वजह है कि अब कई लोग अपने बगीचों और खेतों में शहतूत के पौधे लगाने की ओर रुचि दिखा रहे हैं. शहतूत का पौधा बागवानी के लिए एक उपयोगी और लाभदायक विकल्प माना जाता है.
सही तकनीक और ग्राफ्टिंग विधि अपनाकर इसे जल्दी तैयार किया जा सकता है और कम समय में फल प्राप्त किए जा सकते हैं. इसके पौधे की देखभाल आसान होती है और बाजार में इसके फलों की अच्छी मांग भी रहती है, जिससे यह पौधा बागवानी के लिए एक बेहतर विकल्प बनता जा रहा है.