IMD का अलर्ट, मार्च का महीना रहेगा ज्यादा गर्म.. गेहूं सहित कई फसलों की पैदावार में आ सकती है गिरावट
मार्च 2026 में उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने की संभावना है, जिससे गेहूं और तिलहन की पैदावार घट सकती है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक और तेल का सबसे बड़ा आयातक है. गर्मी बढ़ने से फसल नुकसान और खाद्य महंगाई की चिंता बढ़ गई है.
Heat Wave And Wheat Farming: इस बार पूरे देश औसत से बहुत ज्यादा गर्म मौसम रह सकता है. उत्तर-पश्चिम भारत में मार्च का महीना कुछ ज्यादा ही गर्म रहेगा. इससे रबी फसलों के मुकसान पहुंच सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि 31 मई तक देश के कई हिस्सों में हीटवेव (लू) के दिनों की संख्या बढ़ सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक, खासकर गेहूं और तिलहन उगाने वाले राज्यों में तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है, जिससे फसल की पैदावार कम हो सकती है. ऐसे में एक्सपर्ट का कहना है कि पैदावार में गिरावट आने से खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं.
दरअसल, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है. जबकि खाने के तेल का सबसे बड़ा आयातक है. हालांकि, भारत 2026 की अच्छी फसल पर भरोसा कर रहा है, ताकि अतिरिक्त गेहूं का निर्यात किया जा सके और महंगे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात को कम किया जा सके. पर जानकारों का कहना है कि गेहूं पकने के समय ज्यादा गर्मी पड़ने से फसल की पैदावार घट सकती है और पूरी उत्पादन क्षमता, जो इस साल रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की उम्मीद थी, कम हो सकती है.
इन राज्यों की है कुल गेहूं और तिलहन उत्पादन में 80 फीसदी हिस्सेदारी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि उत्तर और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में मार्च में अधिकतम और न्यूनतम तापमान औसत से काफी ऊपर रहने की संभावना है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारी के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मार्च में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है. ये राज्य भारत के कुल गेहूं और तिलहन उत्पादन का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा हैं.
गेहूं की पैदावार में फिर से आ सकती है गिरावट
गेहूं, तिलहन और चना जैसी सर्दियों की फसलें अक्टूबर से दिसंबर के बीच बोई जाती हैं और अच्छी पैदावार के लिए पूरी वृद्धि अवधि में ठंडे मौसम की जरूरत होती है. 2022 में गर्म फरवरी और मार्च के कारण गेहूं की फसल घट गई थी, जिससे भारत को गेहूं निर्यात पर रोक लगानी पड़ी थी. वहीं, IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि अधिक तापमान से भारत में गेहूं का उत्पादन पिछले सीजन के रिकॉर्ड स्तर से नीचे जा सकता है. इससे सरकार के लिए पर्याप्त भंडार बनाए रखना मुश्किल हो सकता है, खासकर उन कल्याणकारी योजनाओं के लिए जिनमें हर महीने करीब 80 करोड़ लोगों को तय मात्रा में मुफ्त अनाज दिया जाता है. दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक भारत ने हाल ही में कोटा सिस्टम के तहत सीमित मात्रा में गेहूं के निर्यात की अनुमति दी है, जिससे तीन साल से ज्यादा समय से लगे प्रतिबंधों में आंशिक ढील मिली है.
बारिश कम होने से सिंचाई की लागत बढ़ जाएगी
लेकिन अगर इस बार फसल कम होती है, तो सरकार इस फैसले पर फिर से विचार कर सकती है. इससे बाजार में आपूर्ति और कम हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब मौसम की अनिश्चितता पहले से ही बाजार को प्रभावित कर रही है. मौसम विभाग के अनुसार मार्च में देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य रहने की संभावना है. लेकिन अगर फसल के अहम समय में बारिश कम हुई, तो किसानों को सिंचाई पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे उनकी लागत बढ़ सकती है. बदलते मौसम की वजह से पहले ही उनकी कमाई पर दबाव है. जलवायु परिवर्तन के कारण भारत उन देशों में शामिल है जो सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. यहां हीटवेव, बाढ़ और गंभीर सूखे जैसी चरम मौसम घटनाएं पहले से ज्यादा बार हो रही हैं. हर साल इन वजहों से सैकड़ों लोगों की जान जाती है और खेती की पैदावार भी प्रभावित होती है.