वियतनाम के लोग चखेंगे भारत के अंगूर-अनार का स्वाद, मत्स्य और पशु उत्पादों के निर्यात में तेजी
पीएम मोदी ने कहा कि जल्द ही वियतनाम के लोग भारत के अंगूर और अनार का स्वाद चखेंगे. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हर क्षेत्र में सहयोग तेजी से आगे बढ़ रहा है और व्यापार भी पिछले 10 साल में दोगुना होकर 16 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है.
India-Vietnam Trade Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आने वाले समय में जल्द ही भारत और वियतनाम के बीच कृषि उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी होगी. खासकर फलों के निर्यात में इजाफा देखने को मिलेगा. वियतनाम के लोग भारत के अंगूर और अनार का स्वाद चखेंगे. वहीं, सरकार के इस फैसले से बागवानी करने वाले किसानों में खुशी की लहर है. किसानों का कहना है कि निर्यात में इजाफा होने से अनार और अंगूर की खेती करने वाले किसानों को फायदा होगा. उन्हें उनके उत्पाद का बेहतर रेट मिलेगा.
दरअसल, वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम इन दिनों भारत के दौरे पर हैं. इस दौरान भारत और वियतनाम के बीच कई बड़ी व्यापारिक डील हुई हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे. इस बीच साझा प्रेस कांफ्रेंस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और वियतनाम के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर कई बातें कही हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हर क्षेत्र में सहयोग तेजी से आगे बढ़ रहा है और व्यापार भी पिछले 10 साल में दोगुना होकर 16 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि हमारी दवा नियामक एजेंसियों के बीच हुए समझौते से अब वियतनाम में भारतीय दवाओं की पहुंच बढ़ेगी. इसके साथ ही भारत के कृषि, मत्स्य और पशु उत्पादों का वियतनाम को निर्यात भी पहले से ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा.
व्यापार को 25 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
पीएम मोदी ने कहा कि जल्द ही वियतनाम के लोग भारत के अंगूर और अनार का स्वाद चखेंगे. साथ ही, दोनों देशों के बीच एयर कनेक्टिविटी भी लगातार मजबूत हो रही है, जिससे व्यापार और पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के साथ साझा प्रेस वार्ता में कहा कि दोनों देश अब क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ और ऊर्जा सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाएंगे. उन्होंने 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 25 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिससे आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी. इस दौरान दोनों देशों के बीच कुल 13 समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जो डिजिटल तकनीक, दवा नियमन, पर्यटन, संस्कृति, पब्लिक ऑडिट सिस्टम, शिक्षा और वित्तीय क्षेत्रों सहित कई अहम क्षेत्रों को कवर करते हैं.
- लंबे समय तक ताजा रहेगी और न सूखेगी न सड़ेगी.. IIVR की नई सब्जी किस्म ‘काशी विशान’ का जलवा
- अमित शाह के इस ऐलान से पशुपालकों की बढ़ेगी कमाई.. ज्यादा दूध देने वाली बछिया लेंगी जन्म
- मजदूरों के लिए बड़े शहरों में बनेगा ‘लेबर अड्डा’.. बच्चे के जन्म पर मिलेंगे 20 हजार.. CM का ऐलान
- पराली जलाने के मामले में 157 फीसदी की बढ़ोतरी, जानें किस जिले में आए कितने केस
इन समझौतों में भारत की IREL और वियतनाम के इंस्टीट्यूट फॉर टेक्नोलॉजी ऑफ रेडियोएक्टिव एंड रेयर एलिमेंट्स के बीच सहयोग शामिल है, जिससे रेयर अर्थ और खनिज क्षेत्र में काम बढ़ेगा. इसके अलावा, डिजिटल पेमेंट को मजबूत करने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वियतनाम के पेमेंट नेटवर्क के बीच भी साझेदारी की गई है, जिससे दोनों देशों में लेन-देन और आसान हो सकेगा.
कृषि और पशु उत्पादों को बढ़ावा
अन्य समझौतों में भारत के CDSCO और वियतनाम के ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के बीच दवा नियमन में सहयोग, 2026-30 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम और नालंदा यूनिवर्सिटी समेत भारतीय व वियतनामी विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक साझेदारी शामिल है. प्रधानमंत्री ने कहा कि दवा क्षेत्र से जुड़ा यह समझौता वियतनाम में भारतीय दवाओं की पहुंच बढ़ाएगा. साथ ही, इससे भारत के कृषि, मत्स्य और पशु उत्पादों के निर्यात को भी आसान और तेज बनाया जा सकेगा.
बैंक आपसी सहयोग को और मजबूत करेंगे
वित्तीय कनेक्टिविटी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और वियतनाम के केंद्रीय बैंक आपसी सहयोग को और मजबूत करेंगे. उन्होंने बताया कि भारत का UPI सिस्टम जल्द ही वियतनाम के फास्ट पेमेंट सिस्टम से जुड़ जाएगा, जिससे डिजिटल भुगतान और आसान हो जाएगा. सांस्कृतिक रिश्तों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत और वियतनाम के संबंध सिर्फ विकास ही नहीं, बल्कि साझा विरासत पर भी आधारित हैं. उन्होंने बताया कि भारत से भेजे गए बौद्ध अवशेषों को वियतनाम में 1.5 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा, जो दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है.
रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर भी जोड़
रणनीतिक स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वियतनाम भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘विजन ओशन’ का अहम हिस्सा है. उन्होंने बताया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की सोच काफी हद तक एक जैसी है. उन्होंने जोर दिया कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने से क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियमों पर आधारित व्यवस्था मजबूत होगी. साथ ही, इससे भारत के आसियान देशों के साथ संबंध भी और गहरे होंगे.